घोटालों और जांच की आग में झुलस गयी राजापुर की प्रजा, आपसी खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप में वक्त हुआ बर्बाद

- लाखों रुपये गोलमाल के आरोप में निवर्तमान ग्राम प्रधान हो चुके सस्पेंड

- स्वच्छ भारत मिशन के पैसे से खूब धोया हाथ, मनमाने ढंग से कराए कार्य



जनसंदेश न्यूज

चांदमारी। राजापुर ग्राम पंचायत सिर्फ नाम का ही राजा है। यहां बीते पांच साल तक चली गांव की सरकार की छांव में प्रजा घोटालों की आग में ऐसी जलती रही कि उसकी लपटों ने यहां के विकास को भी जलाकर राख कर दिया। सरकारी पैसों का गबन और घोटालों की जांच पर जांच होती रही। ग्रामीणों की आपसी खींचतान के बीच उसकी आंच से तत्कालीन ग्राम प्रधान अशोक कुमार बच नहीं सके। कार्रवाई की जद में आ गये और निलंबित कर दिये गये। कई मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और पड़ताल का सिलसिला इतना लंबा चला कि काफी वक्त उसी में बर्बाद हो गए। फलस्वरूप विकास की किरण यहां की जनता तक पहुंचाने की जरूरत थी, वह कोसों दूर रही।



जनपद के सभी विकास खंड भले ही सरकारी फाइलों में पूरी तरह खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) घोषित हो ग ए हों लेकिन हरहुआ ब्लॉक के राजापुर गांव के पूर्व प्रधान रहे मग्गन कनौजिया का परिवार समेत तमाम लोग शौच के लिए बाहर खुले में जाते हैं। वह दिशा-मैदान के लिए खेतों और नाली-नालों के किनारे निवृत्त हो रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के तहत इस गांव को ओडीएफ करने के लिए मिली लाखों रुपये की धनराशि में जमकर हेराफेरी की गयी।



इस कारण राजापुर में जिधर देखिए उधर शिकायतों की काफी लंबी ग्रामीणों की जुबान पर फेहरिस्त दिखेगी। शौचालय निर्माण और आवास योजना में गबन समेत मनरेगा श्रमिकों को मजदूरी न मिलने की शिकायतें को आम हैं। निवर्तमान ग्राम पंचायत सदस्य चनरा देवी ने भी टॉयलेट निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए बताया कि शौचालय का दरवाजा टूट चुका है।



गांव के बीच बिछाए गये खड़ंजे को लेकर भी ईमानदारी नहीं बरती गयी। इस मार्ग पर मिट्टी डालने की जरूरत न समझे जाने के चलते रास्ता उबड़-खाबड़ है। भैठौली गांव से राजापुर जाने वाले मार्ग पर भी चलना मुश्किल है। गड्ढों से भरे इस ऊंचे-नीचे रोड पर गिट्टयां निकल आयी हैं।



स्थानीय बाजार में स्थापित एकमात्र और वर्षों से खराब हैंडपंप अपनी ही प्यास बुझाने में असमर्थ है तो मार्केट की जनता का गला कैसे तर करेगा। इस हैंडपंप की मरम्मत कराने की कोशिश भी नहीं हुई। शौचालय निर्माण में भारी गोलमाल की पुष्टि होने पर निवर्तमान ग्राम प्रधान अशोक कुमार को अक्टूबर 2019 में सस्पेंड कर दिया गया था। गांव की स्थिति के बारे में प्रयास के बावजूद अशोक कुमार प्रतिक्रिया देने के कतरा गये।



शौचालय निर्माण का नहीं मिला पैसा

राजापुर गांव के निवासी एसबीएम के तहत बनवाए गये शौचालायों पर सवाल खड़े करते हैं। किसी को निर्माण सामग्री घटिया होने की शिकायत है तो कोई मानकों की अनदेखी कर स्कीम को जैसे-तैसे निबटा दिया जाने पर नाराजगी है। 



गांव के श्याम प्रसाद गुप्ता और श्याम नारायन का आरोप है कि अधिकांश शौचालयों के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रपयोग किया गया। ज्यादातर लोगों के शौचालयों के बाहर सिर्फ पंजीकरण संख्या लिखकर पैसों की बंदरबांट हुई। 



राजापुर की शुभावती देवी, गुड़िया, मल्लो, अजीत यादव, स्वतंत्र यादव, केशव राजभर, पप्पू विश्वकर्मा, विनोद, संदीप विश्वकर्मा, इंद्रावती, झूरी, सुंदर आदि ने आरोप लगाया कि उन्हें शौचालय निर्माण की धनराशि नहीं मिली। ग्रामीण पं. राजेंद्र मिश्र व परदेश नारायण चैबे ने आरोप लगाया कि स्वच्छ भारत मिशन लाखों का घोटाला हुआ है।



दुर्घटना को दावत दे रहा स्कूल भवन

राजापुर गांव में बीते पांच साल में शिक्षा की बेहतरी के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ। यहां के पुराने प्राथमिक विद्यालय भवन का एक हिस्सा ध्वस्त हो चुका है। बेहद जर्जर हाल में पहुंच चुके इस भवन का एकमात्र क्लास भी मौत को दावत दे रहा है। ग्रामीण बच्चे यहां खेलते हैं। ऐसी स्थिति में किसी भी दिन किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।



भुतहा फिल्मी सेट जैसा एएनएम सेंटर

गांव के बीच स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में संचालित एएनएम सेंटर किसी भुतहा फिल्म का सेट जैसा लगता है। न तो वहां तक के लिए पहुंच मार्ग है और न ही उसमें कामकाज करने जैसी स्थिति है। सेंटर के मेनगेट पर जंगली झाड़ियों उग आयी हैं। प्रांगण में गंदगी का अंबार है। सेंटर के दरवाजे को दीमकों चाटकर खोखला बना दिया है। वर्षों से इस परिसर में साफ-सफाई की ही नहीं गयी। निकट ही बाहर स्थित हैंडपंप पर नहाने-धोने के बाद निकलने वाला गंदा पानी सेंटर की चहारदीवारी के नीचे से परिसर में जमा होता रहता है। फलस्वरूप महिलाओं और बच्चों में संक्रामक रोग फैलने की आशंका भी रहती है। सेंटर प्रांगण का हैंडपंप लंबे समय से खराब है। ग्रामीणों के अनुसार बच्चों के टीकाकरण के लिए एएनएम सप्ताह में एक-दो दिन आती हैं।



वर्षों से बंद पंचायत भवन, सफाईकर्मी नदारद

राजापुर में कई साल से पंचायत भवन बंद है। यहां कभी खुली बैठकें हुई ही नहीं। इसकी न तो कभी मॉनिटरिंग हुई और न ही किसी की जिम्मेदारी तय करने के बारे में सोचा ही गया। गांववालों के मुताबिक यहां खुली बैठकें सिर्फ काजगों पर होती रही हैं। परिसर में उपले पाथे जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया पंचायत भवन के एक कमरे में भूसा रखा गया है। अन्य कमरों में गंदगी भरी पड़ी है। भवन के पीछे कचरे का ढेर है। गांव के लोगों को सफाईकर्मी के बारे में कोई जानकारी नहीं है।



सामुदायिक शौचालय निर्माण ठप

लाखों रुपये की लागत से राजापुर गांव में बनवाए जा रहे सामुदायिक शौचालय का कार्य इन दिनों ठप है। इसे अधूरा छोड़ दिया गया है। इसके बाहर सोकपिट खोदकर खुला छोड़ दिये जाने के दुर्घटना की डर बना रहता है। ग्राम विकास अधिकारी अभिलाष के मुताबिक भुगतान ठप होने से मनरेगा श्रमिक नहीं आ रहे हैं। एडीओ पंचायत गुलाब सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के चलते काम रुका है। प्रशासक की नियुक्ति होते ही कार्य आरंभ करा दिया जाएगा।



सांप के डर से गुजरती है रात

राजापुर के आवासहीन परिवारों को हर मौसम में डराता रहता है। यहां की सुनीता देवी अपनी झोपड़ी में बच्चों संग जमीन पर पुआल बिछाकर सोती हैं। बोलीं, जमीन पर सोने से हमेशा सांप आदि के डसने का भय बना रहता है। एक अन्य ग्रामीण अशोक के मुताबिक काफी भागदौड़ के बावजूद आवास नहीं मिला।

प्रस्तुति: रामदुलार यादव


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