किसी आर्ट फिल्म की स्टोरी नहीं, दुश्वारियों से भरा है यह गांव, मार्ग तक का टोटा, कई सड़कें हैं खस्ताहाल

आजादी के सात दशक बाद भी इस गांव के लोग जोह रहे बहुअयामी तरक्की की बाट

- कई ग्रामीणों के घर तक पहुंचने के लिए मार्ग तक का टोटा, कई सड़कें हैं खस्ताहाल

- ग्रामीणों का आरोप  रू मनमाने ढ़ंग से खर्च किया है विकास का पैसा, नहीं हुयी बैठकें



जनसंदेश न्यूज

चांदमारी। पूर्व की सरकारों में भी गांवों के गरीबों के लिए आवास योजनाएं रहीं। उनमें से एक आवास दस साल बीतने के बाद भी आजतक पूरी तरह नहीं बन सका। एक अदद अपनी छत के लिए तरस रहे परिवार प्लास्टिक शीट डालकर जीवन-यापन कर रहा है। किसानों की सुविधा के लिए स्थापित और खराब पड़ा सरकारी ट्यूबवेल कई वर्ष ने मरम्मत के इंतजार में है और वर्तमान सरकार में अन्नदाताओं की आय दोगुनी करने की कवायद चल रही है। बच्चों के लिए बने आंगनबाड़ी केंद्र का पहुंच मार्ग है ही नहीं। सरकारी प्राथमिक विद्यालय का ठप पड़ा हैंडपंप अपनी किस्मत पर रो रहा है। एक विद्यालय का टूट चुका गेट टंगी हालत में व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है।



जी हां, ये किसी आर्ट फिल्म, धारावाहिक या वेब सिरीज की स्टोरी या सीन नहीं बल्कि हरहुआ ब्लॉक के सरैया ग्राम पंचायत की तस्वीर है। किसानों और मेहनतकश मजदूरों के इस गांव में कदम-कदम पर दुश्वारियां मुंह बाए खड़ी हैं। अन्नदाता खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं और श्रमिकों को काम की तलाश में प्रतिदिन शहर की दौड़ लगानी पड़ती है। गांव में न तो कोई काम-धंधा है और न ही बच्चों और युवाओं के लिए खेल का मैदान।



इस गांव में सरकारी नौकरी करने वालों की संख्या अधिक नहीं है। युवाओं को रोजगार दिलाने या आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। यहां न तो कोई कल-कारखाना है और न ही बाजार ताकि ग्रामीणों की आय बढ़ सके। सरैया निवासियों का आरोप है कि गांव की सरकार सिर्फ पिछले पांच साल का कार्यकाल पूर्ण करने और विकास कार्यों के लिए जारी पैसों को मनमाने ढंग से खर्च करने में ही व्यस्त रही।



ग्रामीणों का आरोप है कि वोट की राजनीति करते हुए अपने चहेतों और पिछलग्गुओं को लाभ दिलाया गया। दूसरी ओर, गांव में खेलकूद का मैदान न होने के चलते यहां का युवा वर्ग भी खफा है। गांव की कुछ और तस्वीर देखें तो पंचायतों की खुली बैठकें और विकास का खाका खींचने के लिए आवश्यक पंचायत भवन आधा-अधूरा बनकर खड़ा है। ग्राम सचिवालय के लिए खरीदे गये फर्निचर निवर्तमान ग्राम प्रधान के घर की शोभा बढ़ा रहा है।



गांव की बस्ती तक आवागमन पथरीली सड़क से करनी पड़ती है। इस रोड पर ग्रामीण हमेशा ठोकरें खाते व गिरते-पड़ते रास्ता तय करने के लिए बाध्य हैं। सिर्फ बस्ती तक का मार्ग ही नहीं बल्कि गांव के कई रास्ते कच्चे और ऐसे ही खस्ताहाल हैं। हाल यह कि ग्रामीण दीना, चंदन, बच्चेलाल के घर तक जाने के लिए कोई मार्ग ही नहीं है। स्ट्रीट सोल लाइट सार्वजनिक स्थलों पर लगाने के बजाय अपने वोटरों को संतुष्ट करने के लिए घरों में लगवा दिये गये।



एक अदद छत के इंतजार में हो रहे बूढ़े

आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी सरैया गांव के निवासी बहुमुखी तरक्की की बाट जोह रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आवास योजनाओं में सरकारी पैसे की जमकर लूट की गयी। गांव में ऐसे आवासों की कमी नहीं जो दस साल बीतने के बावजूद अबतक अधूरे पड़े हैं और लाभार्थी अपने लिए छत के इंतजार में बूढ़ा हो रहा है। आवासहीन परिवार झोपड़ियों और प्लास्टिक शीट के सहारे जीने के लिए बाध्य हो रहे हैं। उनमें शामिल जलसा देवी, शकुंतला देवी, रीता, बिहारी, शंकर, सीताराम, प्रेमसागर व राजकुमार समेत दर्जनों परिवार आवास योजनाओं में अपनी पात्रता साबित कराने में असफल रहे हैं। इसके बावजूद आज भी सरैया गांव के इन जरूरतमंदों को उम्मीद है कि कभी न कभी हमें एक अदद आवास के लिए पात्रा घोषित कर दिया जाएगा। गांव की गुड्डी देवी ने बताया कि जिस समय मेरे लिए आवास स्वीकृत हुआ था, उस समय घर बनाने के लिए 40 हजार रुपये के बजाय 20 हजार रुपये की मुहैया कराए गये थे।



क्या ऐसे होगी आय दोगुनी ?

सरैया के लोग शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। गांव में जलनिगम की टंकी है। वहीं, सिंचाई के लिए लगाया गया सरकारी नलकूप वर्षों से खराब पड़ा है। फलस्वरूप किसानों को समस्या से जूझना पड़ रहा है। गांव के कृषक रामजी सवाल खड़े करते हैं कि वर्तमान सरकार अन्नदाताओं की आमदनी दोगुना करने की कोशिश क्या इसी प्रकार कर रही है ? स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में भी धांधली का आरोप लगाया। यह टायलेट्स मानक के विपरीत बनाए गये हैं। अधिकांश इज्जत घरों पर छत ढालने के बजाय पतरा रख कर कोरम पूरा कर दिया गया।



शुतुरमुर्ग के अंदाज में किया काम

सरैया ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी केंद्र का रंग-रोगन कर चमका दिया गया है। ताकि यदि कभी कोई अफसर मुआयने पर आये तो वह इस भवन को देखकर खुश हो जाए। शुतुरमुर्ग के अंदाज में इस प्रकार का कामकाज करने वालों ने कभी उस आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंच मार्ग बनाने की जरूरत तक नहीं समझी। आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास झाड़ियां उग आयी हैं। हद तो यह कि जहां रास्ता नहीं उस स्थान पर पैसा खर्च कर दिया गया है। हालांकि वर्तमान के कोराना काल में के कारण यह सेंटर बंद चल रहा है। यहां वाटर रिचार्ज के लिए निर्मित नाली ध्वस्त हो चुकी है। वर्षा के दिनों में एक बूंद पानी उसमें नहीं जाता।



मंत्रियों का वादा हवा-हवाई

सरैया के संपर्क मार्ग पर शहीद मंगला पटेल की याद में गेट निर्माण अबतक नहीं हुअ। जब मंगला पटेल शहीद हुए थे तो तमाम नेता, मंत्री और अफसर उनके घर पहुंचे थे। सभी ने आश्वस्त किया था कि शहीद मंगला सिंह यी याद में संपर्क मार्ग पर एक गेट बनवाएंगे। कई साल से वह आश्वासन अबतक पूर्ण नहीं हुआ। उधर, गांव के प्राइमरी स्कूल की सुरक्षा का हाल यह कि गेट आधा टूट चुका है।



घोटालों का रहा बीता कार्यकाल

पूर्व ग्राम प्रधान पप्पू ने पिछले कार्यकाल तक की गांव की सरकार पर आरोप लगाया कि सोलर लाइट में 2.25 लाख रुपये का गबन किया गया। हैंडपंप रिबोर दिखाकर पैसा निकाले गये। ऐसे मामलों समेत कई शिकायतें डीएम से की जा चुकी हैं। जल्द ही रिमाइंडर देते हुए जिलाधिकारी से दोबारा ग्रामीणों की ओर से शिकायती पत्र भेजा जाएगा।



आरोप बेबुनियाद  : मुन्ना सिंह

सरैया के निर्वमान ग्राम प्रधान मुन्ना सिंह ने ग्रामीणों के आरोपों का बेसिरपैर का बताते हुए कहा कि वोट की राजनीति में विरोधी ही ऐसे आरोप लगा सकते हैं। विकास कार्यों जितने पैसों का भुगतान किया गया था, वह सभी कार्य कराए गये हैं। जिन्हें मेरे कार्यकाल में कराये गये कार्यों से शिकायत है, वो जांच करवा लें। सभी आरोप बेबुनियाद हैं।



औचित्यहीन सामुदायिक शौचालय

गांव के अवधेश पटेल ने कहा कि सामुदायिक शौचालय गांव की आबादी से काफी दूर बन रहा है। फलस्वरूप ग्रामीणों को इस कम्यूनिटी टॉयलेट का लाभ नहीं मिलेगा। बहुत दूर यह शौचालय बनवाना सरकारी पैसों की बर्बादी ही है।



 वहीं, ग्राम पंचायत सदस्य सुभाष और उनकी पत्नी आशा देवी ने शिकायत की कि बीते पांस साल के कार्यकाल में उनकी बातें नहीं सुनी गईं। मेरे दरवाजे पर लगा हैंडपंप खराब हो चुका है। उसका रिबोर नहीं कराया गया।

प्रस्तुति: रामदुलार यादव 


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