हैरान न होइए, यही है सीडीओ का गोद लिया बदहाल गांव, इस ग्रापं में इंसान ही नहीं खेत से लेकर पशु-पक्षी तक प्यासे

 जनपद के गांवों के विकास कार्यों और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर ‘जनसंदेश टाइम्स’ लगातार गंभीर रहा है। किसानों की समस्या हो या पेयजल संकट, स्वच्छता का मुद्दा हो अथवा अन्य बुनियादी जरूरतों का मामला, सभी मुद्दों के समाधान के लिए नागरिकों की आवाज बनता है। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर भी जनसंदेश टाइम्स ने अभियान के शुरुआती दौर से ही गांवों की उन तस्वीरों को सामने रखा, जिनकी अनदेखी हो रही थी। अफसरों ने उन समस्याओं को संज्ञान में लेकर उनका समाधान भी कराया। उसी क्रम में विभिन्न विकास खंडों के गांवों की तस्वीर भी पेश की गयी। गांव की सरकारों का कार्यकाल बीते 25 दिसंबर को खत्म हो चुका है। ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति हो रही है। अगले कुछ ही महीनों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने वाले हैं। गत पांच साल में ग्राम प्रधानों ने अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में विकास की कितनी गंगा बहाई, इस पर वहां की जनता के जरिये एकबार फिर हम आपको गांवों की ओर लिए चल रहे हैं। उसकी पहली कड़ी की शुरुआत हरहुआ ब्लॉक के भैठोली ग्राम पंचायत से कर रहे हैं।

ग्रामीणों के लिए न तो शुद्ध पानी उपलब्ध, न ही सिंचाई के हैं समुचित साधन

तीन-तीन सामुदायिक शौचालय बनवाकर बर्बाद कर दिये गये हैं लाखों रुपये 

उड़ रही स्वच्छ भारत मिशन की खिल्ली, सीवर जाम, रोड पर बह रहा गंदा पानी

- बदहाल है जच्चा-बच्चा केंद्र, नंदघर में रखकर सूखा दिये पौधरोपण के पौधे

- ग्राम पंचायत के लोग खुद को महसूस कर रहे ठगा, उनमें दिख रही नाराजगी



जनसंदेश न्यूज

चांदमारी। गांव की सरकार के पांच साल बीत गये। हरहुआ विकास खंड के भैठौली ग्राम पंचायत की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। जबकि इस गांव को जनपद के मुख्य विकास अधिकारी ने गोद लिया हुआ है। जब जिले में विकास का मुखिया अपने ही गोद लिए गांव की अनदेखी कर उसे उसके हाल पर छोड़ दे तो अन्य गांवों की स्थिति समझी जा सकती है। भैठौली के लोग ही नहीं खेत से लेकर पशु-पक्षी तक पानी के लिए तरसते हैं। खड़ंजा कार्य की अनदेखी हुई। सरकारी पैसे की बर्बादी कुछ यूं समझिए की एक ही गांव में तीन सामुदायिक शौचालय पर धनराशि खर्च कर दी गयी। 



लगभग दो हजार की आबादी वाले भैठौली के लोगों को कुछ साल पहले जब पता चला कि इस गांव को सीडीओ ने गोद लिया है तो उनकी उम्मीदें बढ़ गईं। उनमें आशाओं की किरण जाग उठी। इस बारे में वह दिन में भी जागते हुए सपने देखने लगे। लेकिन मुख्य विकास अधिकारी ने ही जब अपने गोद लिए गांव से मुंह फेर लिया और मनमाने ढंग से विकास कार्य कराये जाने लगे तो ग्रामीणों के सपने चकनाचूर हो गए। क्योकिं जनपद के आला अफसर ही अपने गोद लिए गांवों की जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके।



भैठौली की जो सूरत बदलनी चाहिए वह नहीं हो सका। यहां पशु-पक्षी और खेत से लेकर इंसान तक प्यासे हैं। ग्रामीणों को पीने के लिए शुद्ध नहीं नसीब हो सका। यहां के लोगों ने बताया कि जलनिगम की टंकी पड़ोसी गांव राजापुर में है। उसकी पाइप लाइन भैठौली तक नहीं है। आदर्श जलाशय (तालाब) में समय-समय पर मनरेगा से सफाई तो होती है लेकिन उसमें एक बूंद पानी नहीं है। छुट्टा पशुओं और पक्षियों को दूसरे गांव में जाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ती है।



हद तो यह भी कि नलकूप न होने के चलते सिंचाई के लिए अन्नदाताओं को जद्दोजहद करनी पड़ती है। गांव का एकमात्र ट्यूबवेल कई साल से खराब पड़ा है। किसान अपने निजी साधन से लंबी-लंबी पाइप लगाकर किसी प्रकार खेतों को सींचते हैं। फलस्वरूप खेती की लागत बढ़ जाती है। ऐसे में भैठौली के किसानों की आय दोगुनी हो भी तो कैसे।



गांव के मुख्य मार्ग स्थित जच्चा-बच्चा केंद्र बदहाली का शिकार है। गेट टूटा है और परिसर में गंदगी फैली है। वृहद पौधरोपण अभियान के दौरान भारी संख्या में मंगवाए गये पौधों में से सैकड़ों पौधे रोपने के बजाय नंदघर में डंप कर दिये गये, जो अब सूख चुके हैं और कागजों पर शत-प्रतिशत पौधरोपण अभियान चला दिया गया।



हद है, गांव एक, सामुदायिक शौचालय तीन

भैठौली गांव में तीन सामुदायिक शौचालय का औचित्य ग्रामीणों की समझ से परे है। यहां के लोग इस प्रकार के कार्य को फिजूलखर्ची बता रहे हैं। गांव में पहले से ही प्राचीन दुर्गा माता मंदिर के निकट उपलब्ध सामुदायिक शौचालय पर हमेशा ताला बंद रहता है। इस कारण मंदिर आने वाले दर्शनार्थियों को निवृत्ति की स्थिति में समस्या का सामना करना पड़ता है। इसी सामुदायिक शौचालय के ठीक पीछे एक और सामुदायिक शौचालय का निर्माण करा दिया गया। उस पर भी ताला पड़ा रहता है। वहां से करीब 500 मीटर दूर नंदघर के पास तीसरा और नया सामुदायिक शौचालय अर्द्धनिर्मित दशा में है। निर्वतमान ग्राम प्रधान लालती देवी ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के तहत प्रत्येक घर में शौचालय उपलब्ध है। इधर, जब तीसरा सामुदायिक शौचालय बनाने की तैयारी शुरु हुई तो ग्रामीणों ने विरोध किया। जिस पर अधिकारियों ने उन्हें बताया कि प्रत्येक गांव में सामुदायिक शौचालय बनाया जाना है। ग्रामीणों ने कहा कि तीरसा सामुदायिक शौचालय निर्माण पर खर्च होने वाली तीन लाख रुपये की धनराशि गांव के अन्य विकास कार्यों में व्यय की जा सकती थी। सामुदायिक शौचालय के निकट लगे स्ट्रीट सोलर लाइट के खंभे में पशु बांधे जा रहे हैं।



ऐसा अफसर किस काम का

हरहुआ ब्लॉक के भैठौली गांव के आवासविहीन परिवारों को आज भी अपने ऊपर एक छत का इंतजार है। सरकारी योजनाओं से आवास मिलने की उम्मीद से उनकी आंखें पथरा गयी हैं। सीडीओ के गोद लिए इस गांव में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे जरूरतमंद परिवारों की रामा देवी, कमला देवी, उषा सिंह, गुड्डू, मुन्नी देवी, सुनीता देवी, रेशमा देवी, जयचंद, गिरिजा, रानी, बदामा और सुड्डू आदि ने कहा कि ऐसा मुख्य विकास अधिकारी किस काम का जो अपने गोद लिए हुए गांव को सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रखे।



सीवर जाम, मार्ग पर बह रहा गंदा पानी

भैठौली की हरिजन बस्ती में सीवर जाम होने के कारण उसका गंदा पानी समार्ग पर बहता रहता है। उससे लगातार उठने वाली भारी दुर्गंध के बीच लोगों को आवाजाही करनी पड़ रही है। निर्वतमान बीडीसी भरत ने ने बताया कि कई प्रयासों के बावजूद जाम सीवर और बहते गंदे पानी को रोकना संभव नहीं हो पाया।



पूरा नहीं हुआ आदर्श गांव बनाने का आश्वासन

निवर्तमान ग्राम प्रधान लालती देवी ने शिकायत की कि मेरा एक साल का मानदेय बकाया है। गांव के लिए सालाना बजट बहुत कम आता रहा। प्रत्येक वर्ष कुल जमा चार लाख रुपये से ही कार्य कराने की जिम्मेदारी मिलती रही। बीते सालभर से बताया जा रहा है कि यह गांव आदर्श ग्राम के तौर पर चयनित कर लिया गया है और विकास कार्यों के लिए 20 लाख रुपये जारी होंगे। लेकिन कोई पहल नहीं दिखी। दूसरी ओर, किसान स्वतंत्र मिश्रा ने कहा कि सिंचाई के लिए किलो के भाव खरीदा जाने वाला प्लास्टिक पाइप एक सीजन भी नहीं चलता। उद्यान विभाग ने पाइप के लिए फॉर्म भरवाकर गये तो फिर लौटे ही नहीं। ट्यूबवेल के अभाव में सिंचाई में मुश्किल होती है।



सफाईकर्मी नहीं भक्त लगाते हैं झाड़ू

भैठौली गांव में मुख्य मार्ग से लगभग 200 मीटर की दूरी पर प्राचीन दुर्गा मंदिर स्थित है। इस रोड पर हमेशा गंदगी पसरी रहती है। निगरानी के अभाव में गांव में तैनात सफाईकर्मी नदारद ही रहता है। मंदिर में असपास के गांवों से नियमित रूप से तमाम भक्त पहुंचते हैं। उन्हीं में से एक श्रद्धालु सुलेमापुर (डुहिया) निवासी जितेंद्र यादव ‘बबली’ ने खुद बीड़ा उठाया। वह प्राय रू मंदिर मार्ग की साफ-सफाई करने और झाड़ू लगाने के लिए अपने गांव से भैठोली आते हैं। बबली ने कहा कि इस गांव के सफाईकर्मी को लेकर ग्रामीण और सचिव गंभीर नहीं दिखते। इस बारे में किसी से शिकायत करने से बेहतर है कि मैं खुद ही यहां झाड़ू लगाऊं। ताकि मंदिर में आने वाले भक्तों को परेशानी न हो।




(प्रस्तुति: रामदुलार यादव)


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