बौद्धिक विकास से महत्वपूर्ण चारित्रिक विकास: प्रो. डीपी सिंह

राष्ट्र निर्माण के उद्ेश्य से महामना ने की बीएचयू की स्थापना: कुलपति

दो दिवसीय व्याख्यान में महामना को किया गया याद



विजय सिंह

वाराणसी। यूजीसी चेयरमैन, प्रो. डी पी सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण होना चाहिए। बौद्धिक विकास से अधिक महत्वपूर्ण चारित्रिक विकास है। महामना की इसी दृष्टि को आज नए विश्वविद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थानों की स्थापना के केन्द्र में रखना होगा। वें भारतरत्न पंडित मदन मोहन मालवीय के जयंती पर आयोजित दो दिवसीय व्याख्यान में गुरूवार को वेब लिंक के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि जब संपूर्ण देश विषम परिस्थितियों से गुजर रहा था और परतंत्रता की जंजीरों में जकड़ा था, ऐसे वक्त में महामना ने एक ऐसे विश्वविद्यालय की संकल्पना की जो न केवल शैक्षिक विकास, बल्कि चरित्र निर्माण का भी कार्य करे और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने कहा कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने राष्ट्र निर्माण के लिये शिक्षा को एक माध्यम चुना। उनका ये मानना था कि शिक्षा एक ऐसा प्रकाश है जो गरीबी, भुखमरी और अशिक्षा के अंधकार को दूर करता है और इसी ध्येय से उन्होनें राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की।  

इस दौरान प्रो. आनंद मोहन, प्रो. आशा राम त्रिपाठी, प्रो. बच्चा सिंह, प्रो. आद्या प्रसाद पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी, प्रो. ए. के. सिंह, डॉ. उषा त्रिपाठी समेत कई केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपति व राष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुख व पदाधिकारी, छात्र और शिक्षक आॅनलाइन जुड़े।


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