काशी विद्यापीठ में शोध अध्यादेश संशोधन संग स्वीकार, चार साल बाद हुआ बदलाव

मिली स्वीकृति

-गंगापुर एनटीपीसी परिसर में बीए एलएलबी के पांच वर्षीय कोर्स होंगे शुरू

-विद्यापरिषद की बैठक में कई अहम मुद्दों को लेकर बनी सहमति



मनोज कुमार

वाराणसी। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद यूजीसी से प्राप्त निर्देशों के आधार पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने लगभग चार साल बाद शोध अध्यादेश में बदलाव करने का निर्णय लिया है। गुरुवार को विश्वविद्यालय के समिति कक्ष में कुलपति प्रोफेसर टीएन सिंह की अध्यक्षता में हुए विद्यापरिषद की बैठक में शोध अध्यादेश को संशोधन के साथ स्वीकार कर लिया गया।  इसके साथ ही इस बैठक में अन्य कई मुद्दों पर अहम चर्चा हुई। 

गंगापुर एनटीपीसी परिसर में बीए  एलएलबी के पांच वर्षीय कोर्स शुरू करने का निर्णय हुआ। वहीं गंगा पुर परिसर में ही साइकोथिरेपी काउंसिल एण्ड गाइडेन्स का एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने की सहमति बनी। वहीं बैठक में यह भी निर्णय हुआ कि विश्वविद्यालय से संबंध्द सभी महाविद्यालयों में डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किया जायेगा। 

इसके साथ ही योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान केन्द्र को स्वतंत्र विभाग के रूप में संचालित करने का निर्णय लिया गया। वहीं अब योग विषय में स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर भी संचालित किये जाने की सहमति बनी। वहीं शारीरिक शिक्षा एवं योग विभाग में बीपीएड, एमपीएड के पीजी डिप्लोमा एवं नेचुरोपैथी एवं योग का योग फार वेलनेस सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का अनुमोदन हुआ।  विश्वविद्यालय में यूजी-पीजी स्तर पर अब उर्दू की भांति पंजाबी विषय भी पढ़ाया जायेगा। वहीं आईपीआरपीएम विषय में अब विश्वविद्यालय में पीजी स्तर पर भी पढ़ाई होगी। 

शासन स्तर से प्राप्त निर्देश के अनुसार विश्वविद्यालय में दिव्यांग अध्ययन विभाग की स्थापना होगी। जिसमें दिव्यांगजनों के पुनर्वास के लिए व्यवसायिक शिक्षा दी जायेगी। वहीं एलएलबी त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम में चतुर्थ सेमेस्टर प्रश्न पत्र में श्रमिक विधि के चारों इकाईयों में आंशिक संशोधन के साथ ही प्रायोगिक को छोड़ सभी प्रश्न पत्रों में ट्यूटोरियल एससेमेण्ट के प्रावधान की स्वीकृति दी गई।

वहीं शिक्षा संकाय में चार वर्षीय बीए बीएड व बीएससी बीएड पाठ्यक्रम का आगाज होगा। शासन की मंशा के अनुरूप युवाओं को ‘स्टार्ट-अप’ हेतु प्रेरित करने के लिए ‘नव प्रवर्तन’ उद्यमिता आधारित पाठ्यक्रम को यूजी व पीजी स्तर पर संचालित होगा। मानविकी संकाय के विभिन्न विषयों के विभागाध्यक्ष अनुमोदित विषय में आंशिक संसोधन की संस्तुति हुई। कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्या ने बताया कि विद्यापरिषद की बैठक में कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी गई है, जिसे अब विश्वविद्यालय में तत्काल लागू किया जायेगा। 

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