...आखिर कौन सी दुकानदारी चला रहे चंदौली सपा जिलाध्यक्ष, सपा कार्यकर्ता ने फेसबुक पर लगाया गंभीर आरोप



आरिफ हाशमी

चंदौली। एक वक्त था जब समाजवादी पार्टी जनहित के मुद्दे पर कड़े संघर्षों के लिए जानी जाती थी। लेकिन अब पार्टी आंतरिक कलह के कारण अपनों से जूझती नजर आ रही है। शायद यही वजह है कि सपा अपने पुराने पैनेपन को पाने में अब तक नाकाम रही है। सपा जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर द्वारा मंगलवार को फेसबुक एक पोस्ट लिखा गया, जिस पर जिले के एक कद्दावर सपा नेता ने सीधे लिखा कि दुकानदारी ठीक से नहीं चल रही है क्या। यह बात बड़ी है और आरोप भी काफी बड़ा है। देखा जाए तो सपा नेता द्वारा सत्यनारायण राजभर पर जिलाध्यक्ष पद को लाभ का पद बनाए जाने का अप्रत्यक्ष आरोप लगाया गया है। आरोप कितना पुष्ट और अपुष्ट है यह तो समाजवादी पार्टी के कर्ता-धर्ता ही जाने। लेकिन फेसबुक सोशल साइट पर इतनी बड़ी बात लिखना यह दर्शाता है कि सपा में सबकुछ ठीक नहीं है।



किसान आंदोलन की थकान अभी उतरी भी नहीं थी कि जिले के सपाइयों ने एक नया संघर्ष छेड़ दिया। यह संघर्ष फिजीकल न होकर वर्जुअल था जिसे दुनिया की सबसे बड़ी सोशल साइट फेसबुक भी छेड़ा गया। सपा जिलाध्यक्ष ने अपने शब्दों में अपना रुख व अंदाज बयां करने के लिए इसकी शुरुआत की। लेकिन इसके बाद दनादन कई कमेंट सपा जिलाध्यक्ष के पोस्ट पर आने लगे। जिसमें पार्टी के अंदरखाने की बातें सार्वजनिक मंच पर दिखने लगी। जिले के महाइच परगने के कद्दावर सपा नेता व पूर्व सयुस प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जगमेन्द्र यादव ने सपा जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर के राजनीतिक आवश्यकताओं व संघर्ष के आलोक में संगठन के पुनर्निर्माण के लिए राष्ट्रीय से मुलाकात करने संबंधित पोस्ट पर कड़ा पलटवार किया है। 



उन्होंने अपने पहले पोस्ट में ठीक से दुकानदारी न चलने की बात कही। इसके बाद दूसरे कमेंट में उन्होंने संकट की घड़ी में पाकिट वाले नेता काम नहीं आ रहे हैं जैसी बात लिखी। वैसे तो राजनीतिक जनसेवा का सशक्त माध्यम माना गया है, लेकिन यदि किसी राजनीतिक दल के साथ दुकानदारी व पाकेट जैसे शब्द जुड़ जाए तो उसके नेतृत्वकर्ता पर सवाल उठना लाजिमी है। अब सपा के अंदरखाने में मची कलह के मूल में क्या है और कौन किसकी दुकानदारी चला रहा है यह बात जिले के समाजवादी ही बेहतर जानते हैं।


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