श्रम कानून में बदलाव सरकार की कमजोरी, नार्दन रेलवे मेंस यूनियन के महामंत्री कामरेड शिवगोपाल का आरोप



अश्वनी कुमार श्रीवास्तव

वाराणसी। रेलवे यूनियन के चुनाव में देरी और श्रम कानून में बदलाव सरकार की कमजोरी को दर्शाता है। मंगलवार को स्टेशन स्थित नार्दन रेलवे मेंस यूनियन के कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए आॅल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन और नार्दन रेलवे मेंस यूनियन के महामंत्री कामरेड शिव गोपाल मिश्रा ने यह बात कही। 

उन्होेंने भविष्य में रेल उद्योग पर आने वाले संकट के बारे में कर्मचारियों को अवगत कराया और चुनौतियों से लड़ने के लिए दिशा निर्देश दिया। कहा कि भारत सरकार निरंतर रेलवे कर्मचारियों और अन्य असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के हितों पर कुठाराघात करने का काम नए-नए श्रम कानून लाकर करते जा रही है।

नई पेंशन योजना से उनके सामाजिक अधिकार और भविष्य अंधकार में है। जिसके लिए आॅल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन लगातार भारत सरकार पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए दबाव बनाए हुए है। उन्होंने नौजवानों से अपील किया कि संगठित होकर एक मंच से आंदोलन को गति प्रदान करने की आवश्यकता है। भारत सरकार रेलवे का निजीकरण निगमीकरण और रेलवे की अचल संपत्ति को लीज पर दे कर रेलवे को निजी हाथों में धकेलने का प्रयास कर रही है लेकिन जब तक आॅल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन है हम रेलवे का निजीकरण नहीं होने देंगे। इसके साथ ही उन्होंने कर्मचारियों को जागरुक किया। 

इस दौरान लखनऊ मंडल के मंडल अध्यक्ष राजेश सिंह, सहायक मंडल मंत्री एसके सिंह, वाराणसी शाखा के शाखा सचिव सुनील कुमार सिंह,  डीके सिंह, राजकुमार, शाखा अध्यक्ष राजेश्वर शुक्ला, सुभाष गौतम, डीपी सिंह, अखिलेश पांडे प्रमोद कुमार अशोक राय तफ्जील अहमद पवन उपाध्याय बलवंत गुप्ता आदि उपस्थित थे।


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