अब ‘बंद’ में नहीं होंगी पंचायतों की खुली बैठकें, रूकेगी ग्राम प्रधान और उनके समर्थक की मनमानी

- आगामी वित्तीय वर्ष में होने वाली ग्राम पंचायतों की बैठकों के लिए चल रहा सर्वे

- जिले में 390 से अधिक ग्राम पंचायतों में हो चुका है मिशन अंत्योदय का सर्वेक्षण

- बैठकों की निगरानी को जिला स्तरीय अफसरों को बना सकते हैं नोडल अधिकारी



सुरोजीत चैटर्जी

वाराणसी। ग्राम पंचायतों की आगामी बैठकों में ‘चीटिंग’ नहीं चलेगी। दावा किया जा रहा है कि यह खुली बैठकें अब बंद कमरों में या मनमाने ढंग से अपने समर्थकों के साथ मिलकर करने के बजाय नियमतरू खुली बैठकें ही करनी होंगी। इन बैठकों की न सिर्फ निगरानी होगी बल्कि मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तरीय अफसर लगाए जाएंगे। इसकी कवायद शुरु हो चुकी है।

आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 में होने वाली ग्राम पंचायतों की बैठकों में विकास कार्यों को अमली जामा पहनाने के उद्देश्य से शामिल होने वाले एजेंडे के लिए इन दिनों बेस लाइन सर्वे चल रहा है। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन-किन ग्राम पंचायतों में या राजस्व गांवों में अबतक विकास संबंधी क्या-क्या कार्य कराए जा चुके हैं और कौन-कौन कार्य कराने की आवश्यकता है। मिशन अंत्योदय के तहत यह सर्वेक्षण जारी है।

ग्राम पंचायतों की आगामी बैठकों में उसी आधार पर ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) का खाका खींचेंगे। अबतक 390 से अधिक ग्राम पंचायतों का सर्वे हो चुका है। उनमें बड़ागांव ब्लॉक की 27, आराजी लाइन विकास खंड की 23, हरहुआ विकास खंड की 72, सेवापुरी ब्लॉक की 22, चिरईगांव की 60 और काशी विद्यापीठ विकास खंड की 53 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

ग्राम पंचायतों की बैठकों की मॉनिटरिंग के लिए विकास खंड स्तर पर स्टाफ लगाए जाते हैं। उसके बावजूद अधिकांश मामलों में ब्लॉककर्मियों की उदासीनता के कारण यह बैठकें पंचायत भवनों में आयोजित करने के बजाय ग्राम प्रधान अपने घर, प्राइमरी स्कूल में या अन्य किसी स्थान पर मनमाने ढंग से करा लेते हैं। उन बैठकों में ग्राम प्रधान के समर्थक ग्राम पंचायत सदस्य आदि बहुमत के आधार पर फैसला भी ले लेते हैं, जिसकी जानकारी ग्रामीणों को नहीं हो पाती।

कई मामलों में ग्रामीणों की उदासीनता का लाभ भी पंचायत सदस्य उठाते हैं। खास यह भी कि ग्राम पंचायतों की बैठकों से संबद्ध उपस्थिति पंजिका में किये गये हस्ताक्षरों पर भी प्रायः सवाल खड़े होते हैं। लेकिन ऐसे प्रकरणों को नजरअंदाज किया जाता रहा है। महिला ग्राम प्रधान होने की स्थिति में उसके प्रतिनिधि के रूप में लोग अपने ढंग से बैठकों का फैसला ले लेते हैं। पूर्व में शासन ने ग्राम पंचायतों की बैठकों की वीडियोग्राफी को अनिवार्य कर दिया था लेकिन उस पर पूरी तरह पालन हुआ ही नहीं।

आगामी कुछ ही महीनों में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद नये ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य और बीडीसी आदि आएंगे। इसे देखते हुए भविष्य में ग्राम पंचायतों की खुली बैठकों की निगरानी की तैयारी की जा रही है। सूत्रों की मानें तो उन मीटिंग्स की मॉनिटरिंग विकास खंड के स्टाफ के बजाय नोडल अफसर के रूप में जिला स्तरीय अधिकारी करेंगे।

यह अधिकारी ग्राम पंचायतवार खुली बैठकों के लिए जारी होने वाले कैलेंडर की तय तिथि पर मौके पर उपस्थित रहेंगे। ताकि पारदर्शी ढंग से बैठकें हों और मौके पर ग्रामीणों की ओर से दिये जाने वाले सुझाव या बतायी जाने वाली समस्याओं के समाधान की पहल हो सके। इन तैयारियों को देखते हुए संभावना जतायी जा रही है कि पंचायतों का नया सत्र आरंभ होने से पहले सभी ग्राम सभाओं में शत-प्रतिशत पंचायत भवन भी बनकर अस्तित्व में आ जाएंगे।

नया सॉफ्टवेयर नहीं करने देगा चीटिंग

- आगामी सत्र की जीपीडीपी के लिए इन दिनों ग्राम पंचायतों में जारी बेस लाइन सर्वे में मौके की गलत रिपोर्ट दी तो पकड़े जाएंगे। यदि किसी विकास कार्य की फोटो विभागीय पोर्टल पर अपलोड करना है तो मौके पर जाकर ही वह तस्वीर खींचनी होगी। उदाहरण के लिए अगर रिपोर्ट में किसी खड़ंजा कार्य की फोटो भेजनी है तो ठीक उसी स्थान पर जाकर कैमरा क्लिक करना पड़ेगा। उसके स्थान पर भेजी गयी किसी और खड़ंजा की तस्वीर रिजेक्ट हो जाएगी। सो, संबंधित स्थान पर गये बगैर फोटो अपलोड करना असंभव होगा। पोर्टल तब तक वह फोटो स्वीकार नहीं करेगा जब तक सही स्थान पर पहुंचकर मौके की तस्वीर न ली जाय। इसके लिए सरकार ने उस पोर्टल में विशेष प्रकार का सॉफ्टवेयर लगाया है। इसलिए सर्वे रिपोर्ट पोर्टल पर भेजने वाले कर्मचारी को संबंधित विवरण की तस्वीर अक्षांश और देशांतर के आधार पर ठीक उसी स्थान पर जाकर खींचनी होगी जहां की वास्तव में भेजने की जरूरत है।


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