अस्पताल में दर्द से तड़पती रही महिला, दौड़ता रहा पति, लेकिन बेपरवाह चिकित्सकों ने नहीं दिया ध्यान



अमित राय

आजमगढ़। जन स्वास्थ्य व स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त दुरूस्त करने के प्रति सरकार चाहे कितना भी गंभीर रहे, हिदायतें देती रहे लेकिन जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक बेपरवाह नजर आ रहे हैं। अधिकतर देखने को मिलता है कि कभी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर वसूली, बाहर से दवा लिखने के मामले तो सामने आते रहे हैं लेकिन हद तो तब हो गयी जब मंगलवार को अस्पताल में भर्ती एक महिला बेड पर दर्द से कराहते हुए करवटें बदल रही और उसका पति अस्पताल में तैनात डाक्टर और स्टाफ नर्सों के सामने गिड़गिड़ाता रहा। फिर भी उसका इलाज घंटों तक नहीं हो सका। 

तरवां थाने के भगवानपुर गांव की रहने वाले सुबाष की पत्नी मालती को अचानक पेट में दर्द शुरू हुई। परिजनों द्वारा इलाज के लिए उसे मंडलीय अस्पताल में ले जाया गया जहां इमरजेंसी में तैनात कर्मचारियों ने इमरजेंसी वार्ड में भर्ती तो कर लिया लेकिन इलाज के नाम पर हीलाहवाली करते रहे। असहनीय पीड़ा से मालती कराहते हुए बेड पर करवटें बदलती रही। उसका पति सुबाष कभी स्टाफ नर्स, कभी वार्ड ब्वाय तो कभी तैनात चिकित्सक के पास दौड़ता रहा लेकिन उसकी कोई सुनने को तैयार नहीं था। पीड़िता के पति की मानें तो चिकित्सक यह कह कर टालते रहे कि शिफ्ट चेंज होने वाली है, दूसरे डाक्टर और स्टाफ आयेंगे तो महिला का इलाज शुरू हो जायेगा। धरती के भगवान की संज्ञा प्राप्त चिकित्सकों की यह संवेदनहीनता समझ से परे है। वहीं जानकारी होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी हर मामले से पल्ला झाड़ते हुए मौन साध लेते हैं। आखिर कब तक यह सिलसिला चलता रहेगा।


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