उगा उगा हे सुरुज देव...देब हम अरघिया, घर की आंगन से लगायत गंगा तट तक रही व्रती महिलाओं की भीड़

रात भर जागरण के साथ छठी मईया के गीतों से गुलजार रहा पूजा स्थल

बरेका के सूर्य सरोवर और शास्त्री घाट पर भी दिखी डाला छठ की सतरंगी छठा



अश्वनी कुमार श्रीवास्तव

वाराणसी। नहाय खाय के तीसरे दिन शुक्रवार को पूरा शहर छठ गीतों से गूंज उठा। पूजा समितियों की ओर से लाउडस्पीकर बजाया जा रहा था। तो घरों में भी मोबाइल, टीवी पर सिर्फ छठ गीत ही सुनाई दे रहा था। अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए व्रती तैयारी में दोपहर से ही जुटी गयी थी। मंडी से प्रसाद लाने के बाद इसे साफ पानी से धोकर घाट पर ले जाने के लिए दउरा भी घर-घर सजता रहा। इसके साथ ही कांच ही बांस के बहगिंया...गीत गाती व्रती महिलाएं शाम होते ही घर की छत से लेकर गंगा घाट व कुंडों पर जुटने लगी और ठीक समय पर अस्ताचलगामी भगवान भाष्कर को अर्घ्य देकर छठी मईया से व्रत पूर्ण करने को आर्शीवाद मांगा। 



भगवान सूर्य की उपासना के महापर्व छठ के तीसरे दिन नदी घाटों, तालाबों और अन्य जलाशयों में अघर््य देने व्रतियों का सैलाब उमड़ पड़ा। अस्ताचलगामी सूर्य को अघर््य के साथ देकर व्रती अपने घर-समाज के लिए खुशहाली की प्रार्थना कर रही थी। सुदूर गांवों से लेकर गंगा घाट तक छठ पर्व की रौनक से अमीर-गरीब हर वर्ग का जीवन रोशन हो रहा था।  लोग पूरी श्रद्धा, भक्ति, आस्था और उमंग से पर्व को मनाने में जुटे रहें। कोरोना के कारण सुस्त पड़े जीवन और बाजार फिर से खिल उठे तो घरों  से  लेकर  घाट  तक  छठी  मईया  के सुरीले लोकगीतों गूंजते रहे। 



कोविड के चलते सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद

लोग स्वयं भी कोरोना से बचाव के साथ पर्व को उल्लास से मना रहे थे। तो प्रशासन की ओर से भी काशी के 84 घाटों पर एहतियात के साथ सूर्य उपासना की तैयारी की गई थी घाटों पर  साफ-सफाई से लेकर आकर्षक रोशनी की व्यवस्था की गई। लोक आस्था का यह पर्व इसलिए तो अनूठा है कि इसमें प्रकृति की पूजा, प्राकृतिक चीजों के व्यापक प्रयोग की कुशलता, शिक्षा और स्वास्थ्य की सीख, स्वच्छता, संस्कृति, भाईचारा और आस्था का बेजोड़ मेल है।  



शाम के बाद जलते दिए के साथ घर भी लौटने का दिखा दौर

अस्ताचलगामी सूर्य को अघर््य देने के साथ व्रतियों का छठ घाट से घर लौटना शुरू हो गया था। कोरोना के यह पहला ऐसे पर्व था जिसमें जबर्दस्त उत्साह के साथ भगवान भास्कर को पहला अघर््य दिया गया। इस दौरान कहीं लोगों ने कोरोना के प्रति जागरुकता दिखाई तो कहीं व्रती पूरी तरह लापरवाह दिखे।



घाट रात भर व्रती महिलाओं से रहा गुलजार

अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती को भगवान भाष्कर के उगने का इंतजार रात भर रहता है रात भर ऊगा ऊगा हे सुरुज देव...देवे के बाद अरघिया की गूंज होती रही। इस दौरान कई समितियों की ओर से घाट पर मिनी सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे। घाट झालर मोती से सजा रहा। 



शास्त्री घाट पर भी दिया गया अर्घ्य

वरुणा पुल के शास्त्री घाट पर भी व्रती ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी परिवार के जीवन मंगल के साथ ही कोरोना से मुक्ति की कामना की। इस दौरान वहां भी सुरक्ष व्यवस्था चुस्त दुरुस्त दिखी। इसके साथ ही लोग कोरोना के प्रति भी सजग दिखे। 



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