जीवन का लक्ष्य निर्धारित करें हर जीव: संपत कुमाराचार्य स्वामी



जनसंदेश न्यूज़

वाराणसी। मदरवा लंका वाराणसी में स्थित श्री वैष्णो मठ में शुक्रवार को श्रीमद जगद्गुरु संपत कुमाराचार्य स्वामी जी महाराज ने कहा कि जीव के पीछे जो शत्रु है। वे छह शत्रु-काम, क्रोध लोभ मोह मद और मत्सर है। 

स्वामी जी ने कहा कि जितेंद्रिय तो घर में रहकर भी ईश्वर की आराधना कर सकता है और जो जितेंद्रिय नहीं है वह तो वन में भी प्रमाद ही करेगा। स्त्री पुत्र का त्याग करके वन में जाकर भी भरत जी मृग के मुंह में फंस गए थे। प्रह्लाद ने दैत्यो के साथ रहकर, कई प्रकार के कष्ट सहकर घर में ही भक्ति की थी।

कहा कि भगवान सभी के लिए हैं। गृहस्थ के लिए भी और गृहत्यागी वनवासियों के लिए भी। भागवत की कथा मार्गदर्शक है। ऐसा नहीं है कि गृहत्यागी को ही भगवान मिलते हैं। पवित्र और सदाचार पूर्ण जीवन जीने वाले को तो घर में रहते हुए भी भगवान मिलते हैं। घर का वातावरण प्रतिकूल होते हुए भी प्रहलाद जी ने घर में रहकर भक्ति की और भगवान का दर्शन किया।

यह भी कहा कि अपने जीवन का लक्ष्य निश्चित करना बड़ा आवश्यक है। लक्ष्यको ध्यान में रखकर ही जीवनव्यवहार किया जाए। मानव जीवन का लक्ष्य है प्रभु की प्राप्ति। प्रह्लाद ने प्रतिकूल परिस्थिति होने पर भी भक्ति की। जबकि घर को भक्ति में बाधा रूप मानकर गृह त्याग करने पर भी भरत जी वनवास में भक्ति न कर सके। मनुष्य कहीं भी जाए पंच विषय तो साथ साथ आएंगे ही। घर में रहकर ही भक्ति करनी है तो प्रह्लाद आदर्श दृष्टि के समक्ष रखो और वनवासी होकर भक्ति करनी है तो भरत जी का जीवन लक्ष्य में रखो। 



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