कुपोषित और टीबी संक्रमित बच्चों को लें गोद: आनंदीबेन पटेल

- तीन दिनी दौरे पर पहुंचीं सूबे की राज्यपाल ने मीटिंग कर विभिन्न वर्गों से की अपील

- वाराणसी में दो-तीन माह में किये गये कार्यों का सराहा, कई  बिंदुओं पर दिये सुझाव 

- गांवों में हो शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव और प्रत्येक बच्चे को भेजने पर दिया जोर

- सर्वाइकल और स्तन कैंसर से महिलाओं को बचाने के लिए आरंभिक जांच पर बल



सुरोजीत चैटर्जी

वाराणसी। सूबे की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रत्येक क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि कुपोषित और टीबी संक्रमित बच्चों को गेद लेकर उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए कार्य करें। अच्छी शिक्षा ही गरीबी मुक्ति का उपाय है और इस दिशा में सभी समर्थ लोगों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। गांवों में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव हो। प्रत्येक बच्चे को स्कूल भेजें। कन्या सुमंगला योजना से हरएक पात्र को लाभांवित करें। सर्वाइकल और स्तन कैंसर रोकने के लिए पीएचसी-सीएचसी स्तर पर प्राथमिक जांच हो। प्रत्येक किशोरी का ब्लड टेस्ट कर एनीमिक किशोरियों को दवा दिलाएं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर गोद भराई कार्यक्रमों में पति की उपस्थिति भी हो।

तीन दिनी दौरे पर सोमवार को पहुंची गवर्नर श्रीमती पटेल सर्किट हाउस हाउस सभागार बैठक के दौरान यह कहा। मीटिंग में अईसीडीएस, क्षय रोग उन्मूलन, स्वंय सहायता समूह, स्वैच्छिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों की प्रमुख उपस्थिति रही। राज्यपाल ने बच्चों-महिलाओं के विकास के लिए माइक्रो प्लान बनाकर समाज के हर वर्ग को जोड़ते हुए कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वाराणसी में बीते दो-तीन माह में इस क्षेत्र में सराहनीय कार्य हुए हैं। तीन साल तक की उम्र का गांव का प्रत्येक बच्चा आंगनवाड़ी में भर्ती हो। छह वर्ष की उम्र के बच्चों को स्कूल भेजें। बच्चों का ड्रॉप आउट एक फीसदी से कम रहे।

सेवापुरी ब्‍लाक में मंगलवार को राज्‍यपाल के आगमन को देखते हुए सोमवार को रिहर्सल किया गया।



गवर्नर ने नई शिक्षा नीति को बेहद उपयोगी बताते हुए सिलेबस पर बल दिया। दूसरी ओर, उन्होंने कहा कि बच्चों की गांव में सामूहिक टूर और खेल कराएं। उन्हें मंदिर आदि स्थल दिखाएं। संस्कार संबंधी जानकारी दें। शैक्षिक कैलेंडर में नाश्ता-भोजन का प्रावधान हो। उधर, ऐसी व्यवस्था हो ताकि यूपी में कैंसर से किसी महिला की मौत न हो सके। माताओं को बचाना है। समर्थ किसान गांव के आंगनबाड़ी में अपनी उपज के फल-सब्जी देकर सहयोग कर सकते हैं।

वहीं, विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों और उनके माता-पिता-अभिभावकों, चिकित्सकों संग सम्मेलन करें। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को भी सामान्य ज्ञान आदि में समक्ष बनाकर प्रमोट करें। भारत को विश्वगुरु बनने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों, महिलाओं, बच्चों की स्थिति और कार्यपद्धती पर ध्यान देना होगा। गुजरात में अपने मुख्यमंत्रित्व काल में नरेंद्र मोदी ने आईसीडीएस का अलग विभाग बनवाकर आदर्श आंगनवाड़ी की परिकल्पना से कार्य आरंभ कराया था। बैठक के दौरान कई लोगों को उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया। सेवापुरी एवं मिर्जामुराद प्रतिनिधि के अनुसार मंगलवार को सेवापुरी ब्लॉक में राज्यपाल के कार्यक्रम को देखते हुए सोमवार को विकास खंड मुख्यालय समेत मटुका और अमीनी गांवों में रिहर्सल और तैयारियां चलती रहीं।

बच्चों की सेहत पर रखे ध्यान

राज्यपाल ने कुपोषित बच्चों के सर्वे में लंबाई व वजन संग उसकी ताकत और पैरों में सूजन को भी पैरामीटर में रखने का सुझाव दिया। साथ ही कहा कि विश्व में एक समान वातावरण नहीं है। सो, कुपोषण सर्वे का पैरामीटर वहां की जलवायु एवं परिस्थिति को ध्यान में रखकर किये जाएं, तभी वास्तविकता सामने आएगी। आंगनवाड़ी केंद्रों को अक्षय पात्र से भोजन व्यवस्था जोड़ने में अच्छा रिजल्ट मिलेगा। 



ये हुए टीबी उन्मूलन में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कुपोषित बच्चों व टीबी संक्रमित बच्चों को गोद लेने और अन्य कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए कई लोगों को सम्मानित किया। उनमें आईएमए की डॉ. मनीषा सेंगर के अलावा अन्य क्षेत्र के डॉ. अतुल कुमार सिंह, दीपक अस्थाना, संजय गुप्ता, चैतन्य पण्ड्या, भावना भरतिया, नित्या पोद्दार, शैलेन्द्र कुमार सिंह चंदेल, जागिल राम सहित अन्य रहे। 

 


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