कहीं फीकी ना हो जाये दिवाली की मिठास, गांधी प्रतिमा के सामने संविदा शिक्षकों का सत्याग्रह जारी

संविदा शिक्षकों और विद्यापीठ प्रशासन के बीच गतिरोध तेज

कुलसचिव ने धरने को अवैध ठहराते हुए बीती शाम दी थी नोटिस



जनसंदेश न्यूज़

वाराणसी। वेतन भुगतान को लेकर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संविदा शिक्षकों का सत्याग्रह पांचवें दिन भी जारी रहा। पंत प्रशासनिक भवन के सामने महात्मा गांधी जी की प्रतिमा के समक्ष गांधी दर्शन एवं विचारों के अनुरूप अत्यंत शांतिपूर्ण ढंग से इन संविदा शिक्षकों ने विद्यापीठ प्रशासन से वेतन भुगतान की मांग रखी। जिससे उनकीी दिवाली भी रौशन हो सकें। 

दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस सत्याग्रह को अवैध बताते हुए एक नोटिस भी है। विद्यापीठ प्रशासन का कहना है कि उक्त कार्यक्रम के लिए विद्यापीठ प्रशासन की अनुमति नहीं ली गई थी। जबकि संविदा शिक्षकों का कहना है कि 1 नवंबर को ही सत्याग्रह की सूचना न केवल प्रदान की गई, बल्कि उसे विश्वविद्यालय प्रशासन तथा जिला प्रशासन को रिसीव भी कराई गई थी। 

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा जारी 13 मार्च 2020 के आदेशानुसार इनकी संविदा अवधि स्वतः विस्तारित होकर पाठ्यक्रम चलते रहने तक सेवा का उल्लेख है। उत्तर प्रदेश के अन्य राज्य विश्वविद्यालयों यथा पूर्वांचल विश्वविद्यालय आदि ने भी राज्य सरकार के उक्त आदेश को लागू कर  दिया है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने भी इसे अपनी कार्यसमिति में इस आदेश को स्वीकार कर अपने परिनियमावली में शामिल कर लिया और उसी आदेशानुसार जून माह का वेतन भी निर्गत किया है। 

परन्तु जुलाई से अब तक कोरोना संकट का हवाला देकर विश्वविद्यालय प्रशासन हमेशा इन शिक्षकों को आश्वासन देता रहा कि यथाशीघ्र वेतन के सम्बन्ध में आदेश निर्गत कर दिया जाएगा। परन्तु अचानक 28 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने इनके वेतन भुगतान से मुकरने लगा।

सत्याग्रह में शामिल होने वालों में डॉ रीता, डॉ आलोक शुक्ला, डॉ अरुण श्रीवास्तव, डॉ रमेश कुमार मिश्र, डॉ राजेश कुमार, डॉ आनंद सिंह, डॉ बालरूप, डॉ दिनेश कुमार, डॉ  महेन्द्र डिसूजा, डॉ प्रदीप कुमार, अभिषेक कुमार डॉ शशिकांत नाग, डॉ निर्मला, डॉ अनुपमा आदि लोग शामिल रहे।











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