प्रबन्धन पाठ्यक्रमों में भारतीयता समावेश करना होगा, आनलाइन आयोजन में बोले अतुल कोठारी

प्रबन्धन पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परम्परा के समावेश करना होगा

‘वैदिक गणित’ विषयक सप्तदिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का समापन सत्र का आयोजन 



विजय सिंह

वाराणसी। नई शिक्षा नीति-2020 पर गहराई से कार्य करना है। संस्कृत के सभी विश्वविद्यालय में अधिकाधिक विषय पर अलग-अलग कार्य योजना बनाकर काम करने की आवश्यकता है। प्रबन्धन पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान   परम्परा के समावेश करना होगा। वैदिक ज्ञान को व्यवहारिक बनाने की आवश्यकता है। क्योंकि वैदिक गणित बच्चों को प्रतियोगिता परीक्षा में वरदान साबित हो सकता है। 

यह बातें बतौर मुख्यवक्ता राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास,नई दिल्ली अतुल कोठारी ने कहा कि शक्ति, बुद्धि, पराक्रम की पराकाष्ठाका है। छात्रो के गणित के भय से बचाव वैदिक गणित के सूत्रों से किया जा सकता है। हमारे पूर्वज इसी वैदिक सूत्रों के माध्यम से गणित के सभी प्रश्नों को मौखिक रूप से हल कर लेते थे। 

वह बीएचयू के वैदिक विज्ञान केन्द्र श्यामाचरण-डे हाउस मालवीय भवन संकुल बीएचयू में ‘वैदिक गणित’ विषयक सप्तदिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का समापन सत्र वैदिक विज्ञान केन्द्र, बीएचयू में आयोजित ‘वैदिक गणित’  विषयक सप्त दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार के सप्त दिवस आयोजन के समापन सत्र में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगे बताया कि आज भी पूरा विश्व भारतीय वैदिक गणित के महत्त्व को स्वीकार करता है। प्रतिदिन इसके अभ्यास की आवश्यकता है। पूर्वराष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने अपनी पुस्तक में उल्ल्ेख किया है कि आईंस्टिन एवं विदेशी विद्वानों ने स्वीकार किया है कि सर्व प्रथम भारत ने ही हमें गणना सीखाई है। इस विषय पर वेदों में गहराई से कार्य करने की आवश्यकता है। 



कार्यशाला प्रशिक्षकीय उद्बोधन प्रो. कैलाश विश्वकर्मा, राष्ट्रीय संरक्षक, वैदिक गणित शिक्षा संस्कृति, उत्थान न्यास, नई दिल्ली ने आज वैदिक गणित के घनमूल तथा वर्गमूल निकालने की विधि के विषय में जानकारी देते हुए कही।  

सोमवार को पूर्वाह्न 3.30 से सायं 6 बजे तक चले वेबिनार का प्रारम्भ वैदिक मंगलाचरण शोध छात्र कृष्ण मुरारी त्रिपाठी ने किया एवं कुलगीत प्रो. मधुमिता भट्टाचार्य, गायन विभाग, ने किया। समापन सत्र कासंचालन डॉ.नारायण प्रसाद भट्टराई, सहायक आचार्य वेद विभाग ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन  प्रो.शशिकांत मिश्र, गणित विभाग, विज्ञानसंस्थान ने किया। वेबिनार का समापन वैदिक विज्ञान केन्द्र के ध्येय मंत्र ‘ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात...’   से हुआ।   

भारतीय ज्ञान-विज्ञान का जच् मूल आधार है। वह वेद है बिना वेद के ज्ञान अच्च्रप्रमाण के कच्ई भी विद्या या शास्त्र न तच् आगे बढ़ पाती है। - प्रो.देवी प्रसाद त्रिपाठी, कुलपति, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार 

वैदिक गणित ज्ञान-विज्ञान का मूलाधार है जिसे प्रारम्भिक रूप से अध्यापन की व्यवस्था एवं पाठ्यक्रम की संरचना करना होगा और यह कार्य वैदिक विज्ञान केन्द्र को करना होगा। - दिनेश चंद्र, सलाहकार समिति वैदिक विज्ञान केंद्र, संरक्षक विश्व हिन्दू परिषद, नई दिल्ली  




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