संवैधानिक सारक्षता को बढ़ाने की जरूरत- एमएस कुशवाहा

बनारस पुस्तक मेला में संविधान दिवस पर गोष्ठी का आयोजन



जनसंदेश न्यूज़

वाराणसी। भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद है। 22 भागों में विभाजित है तथा अलग-अलग विषयों के सम्बंध में व्यवस्था दी गई है। यह बातें कुशवाहा भवन, चन्दुआ छित्तूपुर में आयोजित 25वें बनारस पुस्तक मेला के चैथे दिन संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित गोष्ठी ‘सामाजिक न्याय एवं व्यवस्था’ में संस्था के सचिव, एम.एस. कुशवाहा ने कही।

इस मौके पर लोक संपर्क ब्यूरो, भारत सरकार, वाराणसी के डॉ. लाल जी ने संविधान की मूल भावना से लोगों को परिचित कराया। भारत के संविधान की उद्देशिका ‘हम भारत के लोग’ को पढ़ कर दोहराया गया। डॉ. भीम राव अम्बेडकर के संविधान निर्माण में किये गए योगदान की चर्चा की गयी। संविधान और लोकतंत्र एक दुसरे के पूरक हैं। जनता सरकार चुनती है और सरकार संवैधानिक दायरे में रहकर कार्य करती है। 



आनंद प्रकाश सिंह ने कहा कि अभी भी उंच-नीच की भावना लोगों में से गयी नहीं है, न्याय समय से नहीं मिलता है। आकाशवाणी के हरेन्द्र आजाद ने कहा कि हम किताबों से दूर होते जा रहे है बौद्धिक क्षमता पुस्तकों से प्राप्त होती है, हमें ज्ञान को बढ़ाना है। ज्ञान से ही पहचान बनाने की जरुरत है। आकाशवाणी के ही गौरव कुमार ने कहा कि समाज के ताना-बाना संविधान में ही है बाबा साहब ने सामाजिक समरसता 50 वर्ष आगे की परिकल्पना की थी। संविधान की आत्मा अनुच्छेद 32 में निहित है हमें संवैधानिक साक्षर होना पड़ेगा। 

आकाशवाणी के चन्दन कुमार ने भी कहा कि संविधान के दायरे में अपने कर्तव्यों का भी पालन होना चाहिये। कार्यक्रम के पूर्व सामाजिक न्याय एवं व्यवस्था विषय पर संस्था के प्रबंधक, मिथिलेश कुमार कुशवाहा ने प्रकाश डाला और कहा कि जिनके लिए कानून बने है उनको पता ही नहीं रहता है। 130 करोड़ की आबादी के देश में संवैधानिक ज्ञान बहुत ही कम है। पूरे देश के अधिवक्ता साक्षरता का भार उठा सकते है। 

इस अवसर पर लालजी, मनीष उपाध्याय, दिनेश कुमार सिंह, मनीष कुशवाहा, अभिजीत, नरेश सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। संचालन एम.एस. कुशवाहा ने किया और धन्यवाद् ज्ञापन अवधेश कुमार कुशवाहा ने किया। 




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