नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल: छात्रवृति घोटाले को लेकर फर्जी छात्रों की डाटा फीडिंग, सैकड़ों स्कूल बने शिक्षा माफियाओं का निशाना



अजय सिंह उर्फ राजू

गाजीपुर। नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल के जरिए करोड़ो की छात्रवृति घोटाले को लेकर फर्जी छात्रों की फीडिंग की जा चुकी है। शिक्षा माफियाओं ने जिले से विभाग को प्रस्तावित सूची भेजने का काम शुरू कर दिया है। इस फर्जीवाड़े में रिश्तेदारों से लेकर सगे संबंधियों के बेंकों खातो का उपयोग किया गया है।

भारत सरकार की महात्वाकांक्षी योजना नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल के जरिए जिले में 2020-21 में स्कॉलरशिप उतारने के लिए चार  हजार से अधिक फर्जी छात्र संख्या दिखाकर आवेदन किया गया है। माफियाओं ने कम्पयूटर सेंटर पर ऑनलाइन रात दिन 30 अक्टूबर तक फीडिंग कराई है। जिसके लिए उन्होंने खाता नंबर की भी व्यवस्था किए है। जालसाजो ने इस फर्जीवाड़े को लेकर  रिश्तेदार से लेकर संबंधी का इस्तेमाल किया है। 

वहीं कुछ माफियाओं ने अगल बगल से छात्रों के मार्कसीट लेकर उनको दो हजार की लालच देकर कागजात लिए है। इस छात्रवृति में विकलांग  व अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों के  ज्यादातार नाम भरे  गए है। ऐसा यह इसलिए करते है कि सरकार से मिली छात्रवृति धनराशि को आसानी से उतार लिया जाए। 2020-21 में सैकड़ो कालेजों के नाम पर करोड़ो की छात्रवृति गबन करने के लिए माफिया अपने नेटवर्क का जाल बिछा रखा है। वह नीचे से उपर तक मैनेज करने में जुट गए है। शिक्षा माफियाओं ने सहायता प्राप्त कालेज से लेकर जूनियर से प्राइमरी तक कालेजों को इंटर कालेज दिखाकर फर्जी खाता संख्या के आधार पर छात्रवृति आवेदन कर दिया है। फिलहाल बैंक अधिकारी इन जालसाजों के कारस्तानी को लेकर सतर्क है, लेकिन माफिया 2020-21 में बड़ा गमन की योजना बनाए है।

 इसका कारण 2018-19 में हुए स्कॉलरशिप घोटाले की जांच में विलंब हुआ है। हालांकि, डीएम एवं सीडीओ छात्रवृति घोटाले को लेकर काफी सख्ती के साथ जांच कराने में लगे हुए है।  सीडीओ की अध्यक्षता वाली गठित जांच टीम इस फर्जीवाड़े के तह तक जाकर पर्दाफाश करने में जुटी हुई है। जांच टीम ने  32 कालेजों को नोटिस भेजकर जवाब भी मांग चुकी है। लेकिन वह चालबाज शिक्षा माफिया को पकड़ नहीं पा रही है। शासन ने आवेदन तिथि नवंबर के अतिम सप्ताह तक बढा दिया है। शिक्षा माफियाओं का नेटवर्क खासकर बिरनो, मरदह , मनिहारी सदर,  नंदगंज क्षेत्रों  में बहुत तेजी से कार्य कर रहा है। यहां  स्कूलों से लगायत चिन्हित कम्पयूटर सेंटरो पर कार्य कराया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अल्यसंख्यक विभाग से इन जालसाजों ने पासवर्ड लिया है। जिसके आधार पर यह फर्जी छात्रों की संख्या दिखाकर बड़े स्तर पर घोटाला का योजना बनाए हुए है।   



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