सरकारी उदाशीनता की गाज बिजली बन कर गिर रही किसानों पर




सेटेलाइट भी निकला पलटूराम,पराली दिखा रहा मगर गन्ने की सुखी फसल नही दिखा रहा


         कुशीनगर । अन्नदाता किसान की पीडा भी अजीब है उसके मेहनत की कमाई गन्ने की फसल तेजी से खेतों मे सुख रही है लेकिन सरकारी उदाशीनता का अजब आलम है कोई भी ठोस योजना सरकार और उसके नुमाइंदे प्रशासन के पास नही है इस सरकारी उदाशीनता की गाज बिजली बन कर किसानों पर टूट रही है किसान अकुला कर माथा पीट रहा है जबकि सरकारी मशीनरी सेटेलाइट से खेतों मे पराली जलाने का रिकार्ड रख कर किसानों पर कडी कारवाई कर रही है जबकि सेटेलाइट भी पलटूराम बनकर किसानों के खेतों मे सुख रहे गन्ने की फसलों को नही दिखा रहा है अजब कसमकस है किसानों के साथ।

   जी हाँ बात करते हैं कुशीनगर जनपद की जिसे चीनी का कटोरा कह कर लोगों ने महिमामंडन किया है जनपद के किसानों के लिए गन्ना उत्पादन मुख्य आय का जरिया है जिससे आय कर किसान शादी विवाह मांगलिक कार्य, बच्चों की शिक्षा और जीविकोपार्जन करते हैं लेकिन आज किसानो की यह गाढी कमाई हजारों एकड मे तेजी से सुख रही है लेकिन ताज्जुब है जनपद प्रशासन जिसमे जिलाधिकारी, गन्ना विकास विभाग और कयी सारे जिम्मेदार अधिकारी व विभाग अपनी आँखें मूँद कर बैठै हुए हैं जो सीधे तौर पर गन्ना किसानो के लिए अन्याय है कायदे से जिला प्रशासन को किसानो की सुधि लेनी चाहिए उन्हे सर्वे करवा कर उसका मुआवजा देना चाहिए सूत्रों की बात माने तो कयी किसानों की दिल का दौरा पड जा रहा है कुछ किसानों के हृदयाघात से भी मौत हुयी है।

     .उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को स्वतः संज्ञान लेकर फौरन गन्ना किसानों की ब्यथा दूर करना चाहिए और सम्बंधित विभागों और अधिकारियों को भी त्वरित कदम उठाने का निर्देश देना चाहिए और अन्नदाता किसानों के आँसू पोछे जाने चाहिए।

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