अब किसान भी चलाएंगे ‘ब्रह्मास्त्र’, जीरो बजट में देशी गौ आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु प्रशिक्षण

- सेवापुरी विकास खंड को इस दिशा में भी मॉडल ब्लॉक बनाने की आरंभ हुई कवायद

- प्रथम दिन अफसर-कर्मचारी हुए ट्रेंड, आज से न्याय पंचायतवार किसानों का प्रशिक्षण

- फसलों में कीट प्रबंधन के तहत नीमास्त्र व अग्नि अस्त्र बनाने की जानकारी भी दी गयी

- ब्रह्मास्त्र घोल एक बार बनाने के बाद आगामी छह माह तक कर सकते हैं उसका प्रयोग



सुरोजीत चैटर्जी

वाराणसी। पौराणिक काल में देवता और योद्धाओं को विभिन्न अस्त्र-शस्त्रों के साथ ही ब्रह्मास्त्र चलाने का हुनर हासिल था। अब आप भी ‘ब्रह्मास्त्र’ का प्रयोग कर सकते हैं लेकिन जब फसलों में लगे कीट का नाश करना हो तब। सिर्फ यही नहीं, इसके लिए आप अग्नि अस्त्र और नीमास्त्र भी आजमा सकते हैं। जी हां, जीरो बजट में होने वाली गौ आधारित प्राकृतिक या जैविक खेती में यह तकनीक कारगर बतायी गयी है। न किसी केमिकल का प्रयोग और न ही कोई ऐसी दवा जिससे फसल की सेहत पर असर पड़े। इस प्रकार के जैविक कीटनाशकों का उपयोग करने के लिए अलग से कुछ खर्च भी नहीं करना पड़ेगा।

एक एकड़ क्षेत्रफल में सिर्फ शून्य बजट आधारित एक देशी गाय के जरिये प्राकृतिक अथवा जैविक खेती का तरीका बताने के लिए गुरुवार से सेवापुरी ब्लॉक मुख्यालय सभागार में आरंभ प्रशिक्षण कार्यशाला के पहले दिन लखनऊ तथा बहराइच के ट्रेनरों ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को यह जानकारी दी। उन्होंने कीट प्रबंधन के अंतर्गत तीन विधियां बतायीं जिनके नाम रोचक है। कहा, फसल में यदि सुडिंयां अथवा इल्लियां लगें तो पांच किलो नीम की पत्ती, 2-2 किलो अमरूद, पपिता, आम, अरंडी की पत्तियों की चटनी बनाकर दस लीटर गोमूत्र में मिला दीजिए। उसके बाद धीमी आंच पर चार उबाल आने तक उबालना चाहिए।





उसे ठंडा होने के लिए 48 घंटे तक रखने के बाद पांच लीटर घोल को 100 ली. पानी में मिला दें। यही घोल ब्रह्मास्त्र कहलाता है। इस मिश्रण को एक एकड़ फसल पर छिड़काव करें। खास यह कि इस घोल का उपयोग छह माह तक कर सकते हैं। इसी प्रकार फसलों का रस चूसने वाले कीटों को खत्म करने के लिए पांच किलो नीम की पत्ती या फल, एक किलो गोबर और 100 लीटर का घोल बनाकर गोमूत्र के साथ मिलाते हुए प्रक्रिया अपनानी चाहिए। वहीं, 20 ली. गोमूत्र, पांच किलो नीम पत्ती, 500 ग्राम तंबाकू पाउडर और इतनी ही मात्रा में लहसुन की चटनी मिलाकर अग्नि अस्त्र बनाया जाता है।

वर्कशॉप में प्रशिक्षण देने वालों में कृष्णा चौधरी, गोपाल उपाध्याय, अजीत प्रसाद महापात्र, अनिरुद्ध यादव, मदन बिहारी पाठक, हवलदार थे। कार्यशाला में जेडी कृषि अखिलेश चंद्र शर्मा, डीडी कृषि स्मिता वर्मा, सीवीओ डॉ. वीबी सिंह, जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य, जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त आदि की प्रमुख उपस्थिति रही। शुक्रवार से किसानों के लिए न्याय पंचायतवार ट्रेनिंग प्रोग्राम चलेगा। मॉडल ब्लॉक के तौर पर विकसित किये जा रहे सेवापुरी विकास खंड को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में भी मॉडल बनाने की दिशा में यह पहल हो रही है।




 

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