कार्तिक पूर्णिमा पर बनारस में गंगा घाटों पर उमड़ी भारी भीड़, लोगों ने किया स्नान-दान

कोरोना के खौफ को नजरंदाज करते हुए आस्थावानों ने गंगा में लगाई डुबकी



जनसंदेश न्यूज

वाराणसी। कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली पर सोमवार को काशी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई। दशाश्वमेध घाट पर श्रद्धालुओं का रेला नजर आया। कहीं कोरोना का डर दिखाई नहीं दिया। आस्था कोरोना पर भारी पड़ी। लोगों ने बिना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए गंगा में डुबकी लगाई। साथ ही गंगा मैया से कोरोना को खत्म करने की प्रार्थना की।

देव दीपावली कार्यक्रम में शरीक होने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी भी बनारस पहुंच गए हैं। वो आज देव दीपावाली की भव्यता देखेंगे। नौकायन कर गंगा के घाटों की खूबसूरती को निहारेंगे। साथ ही लेजर शो भी देखेंगे। कार्तिक मास की पूर्णिमा पर गंगा स्नान अति फलदायी माना जाता है। कई श्रद्धालु कार्तिक महीने भर गंगा स्नान के अनुष्ठान का इस दिन डुबकी लगाकर समापन करते हैं। सुरक्षा के लिए जल पुलिस तैनात की गई है।



बनारस में गंगा स्नान के साथ ही आस्थावानों ने गरीबों को दान-पुण्य भी किया। सनातम धर्म में कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और दान अति श्रेष्ठ माना जाता है। सुबह सूर्योदय से पहले ब्रह्ममुहूर्त से ही लोग हर-हर गंगे, जय गंगा मैया, हर हर महादेव के जयकारे के साथ गंगा में डुबकी लगाने लगे। बनारस के गंगा घाटों पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने गरीबों में चावल, दाल, नमक, गुड़, खीर, वस्त्र, चंदन, फूल, दही, गाय घी, दूध, मिश्री, फल, कंबल, काला तिल, काला कपड़ा, लोहा-स्टील, जूता, छाता व तेल आदि का दान किया। पटना में गंगास्नान के लिए आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों-हजारों की तादाद में श्रद्धालु स्त्री-पुरुष पहुंचे थे। गंगास्नान के लिए गुरुवार की शाम से ही लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था।



इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर ग्रह-गोचरों का खास संयोग बनने से श्रद्धालुओं में अधिक उत्साह देखने को मिला। मान्यता है कि कुश लेकर इस तिथि पर गंगास्नान या स्नान करने से सात जन्म के पापों का नाश हो जाता है। चर्मरोग व कर्ज से मुक्ति मिलने के साथ वैवाहिक संबंधों में आनेवाली परेशानियां भी दूर होती हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगास्नान और भगवान हरि व  शिव की पूजा करने से पूर्व जन्म के साथ इस जन्म के भी सारे पाप नाश हो जाते हैं। भगवान श्रीहरि ने कार्तिक पूर्णिमा पर ही मत्स्य अवतार लेकर सृष्टि की फिर से रचना की थी। भगवान श्रीकृष्ण ने इसी तिथि पर रास रचाई थी। वहीं सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक का जन्म भी इसी तिथि को हुआ था।

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