प्रदेश में 100 साल पुराने नियमों को खत्म करने जा रही है योगी सरकार, लालफीताशाही से मिलेगी मुक्ति!



जनसंदेश न्यूज़

लखनऊ। केन्द्र सरकार से प्राप्त निर्देश के बाद योगी सरकार ने प्रदेश में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश सरकार अब 100 वर्ष पुराने नियमों खत्म करने जा रही है। योगी सरकार के इस कदम के बाद प्रदेश वासियों को कानूनी उलझन और उद्योगपतियों को लालफीताशाही से मुक्ति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास विभाग को इसकी जिम्मेदारी भी सौंप दी है। 

सीएम योगी ने दिये निर्देश में यह भी बताने को कहा है कि नियमों से जुड़े संबंधित विभाग में कौन से नियम ऐसे है जो वर्तमान समय के तहत अनावश्यक है। इसके साथ ही उन्हें ऐसे नियमों को सामने लाने को कहा है जिनका विलय किया जा सकता है।

100 वर्ष पुराने नियम को देखते हैं जो 1920 में ‘यूपी रूल्स रेगुलेटिंग द ट्रांसपोर्ट टिंबर इन कुमाऊं सिविल डिवीजन’ बना था। जबकि, कुमाऊं क्षेत्र के साथ अलग राज्य उत्तराखंड 20 वर्ष पहले गठित किया जा चुका है. तो ऐसे में इस नियम के अनावश्यक बने रहने पर सवाल उठते हैं, जिसका जवाब अब वन विभाग को देना होगा। तथा ‘इंडियन फॉरेस्ट यूपी रूल 1964’, ‘यूपी कलेक्शन एंड डिस्पोजल ऑफ डिरफ्ट एंड स्टैंडर्ड वुड एण्ड टिंबर रूल्स’, ‘यूपी कंट्रोल ऑफ सप्लाई डिस्ट्रब्यूशन एंड मूवमेंट ऑफ फ्रूट प्लांटस ऑर्डर-1975’, ‘यूपी फॉरेस्ट टिंबर एंड ट्रांजिट ऑफ यमुना’ इन कानूनों की जांच भी होनी है कि आखिर ये अस्तित्व में क्यों है?

वहीं, कई ऐसे नियम हैं जिनका विलय एक कानून बनाकर किया जा सकता है. जिसमें यूपी इशेंसियल कॉमोडिटीज से जुड़े चार नियम हैं, साथ ही यूपी शेड्यूल कॉमोडिटीज से संबंधित चार आदेश है जिनका विलय संभवतः किया जाएगा। इन्हें लेकर औद्दोगिक विकास विभाग ने संबंधित डिपार्टमेंट से जवाब मांगा है कि इन्हें खत्म किया जाना चाहिए या नहीं। 


Popular posts from this blog

'चिंटू जिया' पर लहालोट हुए पूर्वांचल के किसान

लाइनमैन की खुबसूरत बीबी को भगा ले गया जेई, शिकायत के बाद से ही आ रहे है धमकी भरे फोन

नलकूप के नाली पर पीडब्लूडी विभाग ने किया अतिक्रमण, सड़क निर्माण में धांधली की सूचना मिलते ही जांच करने पहुंचे सीडीओ, जमकर लगाई फटकार