दस करोड़ कंपोजिट ग्रांट का नहीं मिला लेखा-जोखा, बेसिक विभाग की प्रधानाध्यापकों पर ‘तिरछी’ नजर

दस करोड़ अवमुक्त, नौ करोड़ बजट जारी  




जनसंदेश न्यूज 
गाजीपुर। परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदलने के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत  कंपोजिट ग्रांट धनराशि के रूप में करोड़ो रूपए भेजी गई है। लेकिन ज्यादातर जगहों पर प्रधानाचार्यो ने इस धनराशि का उपयोग नहीं किया है। इसके बावजूद विभाग सभी स्कूलों में पुनः करोड़ों रूपए की धनराशि भेज रही है।


बेसिक विभाग ने शासन के निर्देश पर परिषदीय विद्यालयों की दशा बदलने के लिए मुहिम चलाई है। विद्यालयों के जर्जर भवन, टूट-फूट, शौचालय तथा स्वच्छता आदि सुविधाओं को पूरा कर स्कूलों की सूरत और सीरत बदलने का विभाग ने संकल्प लिया है। कंपोजिट धनराशि से विद्यालयों में साफ-सफाई, विद्यालयों की पुताई, विद्युत कनेक्शन, शौचालय व्यवस्था सही कराना, फुलवारी आदि रंगरोगन का कार्य आरम्भ हो गया है। जिले में 2751 स्कूलों के लिए मार्च माह से पूर्व ही 9.98 करोड़ तथा अक्टूबर 2269 स्कूलों 8.83 करोड़ सभी स्कूलों को छात्र संख्या के आधार पर भेज दी गई है। लेकिन विभाग को इन विद्यालयों का लेखा जोखा नहीं मिला है।


12 हजार पांच सौ से 75 हजार भेजी धनराशि
गाजीपुर। समग्र शिक्षा अभियान के तहत कंपोजिट ग्रांट के रूप में धनराशि  स्कूलों में 12 हजार 500 से लेकर 75 हजार भेजा गया है। इनमें जिन स्कूलों की छात्र संख्या 15 है वहां 12 हजार 500, 16 से 100 की छात्र संख्या में 25 हजार, 101 से 250 संख्या में 50 हजार तथा 250 से 999 छात्र संख्या वाले स्कूलों को 75 हजार के हिसाब से भेजा गया है। हालांकि ज्यादातर स्कूलों में कोरोना महामारी के दौरान इस  धनराशि से कार्य नहीं हो पाया है। 



परिषदीय स्कूलों का खस्ताहाल
गाजीपुर। कंपोजिट ग्रांट के तहत विद्यालयों की पुताई, मरम्मत आदि कार्य कराए जाते हैं।  लेकिन विभागीय सूत्रों के मुताबिक अधिकांश प्रधानाध्यापक फर्जी वाउचर लगाकर धनराशि खर्च दर्शा देते हैं। फिलहाल यह जांच का विषय है। अधिकारियों के निरीक्षण में इसका पर्दाफाश हो सकता है। जिले के तमाम स्कूलों की हालत काफी खस्ताहाल है। मूलभूत सुविधाओं विद्यालय की बाउंड्रीवॉल टूटी पड़ी हैं। दर्जनों विद्यालय प्रांगण में जर्जर भवन खड़े हुए हैं। कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। पेयजल के नाम पर इंडिया मार्का नल में लगे समरसेबल खराब पड़े हैं। वर्षों से पानी की गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई जिसके कारण बच्चे गुणवत्ताविहीन पानी पीने पर विवश हैं। शौचालय अपूर्ण पड़े हैं जिसमें अक्सर ताले लटके रहते हैं।


सफाई कर्मी नहीं करते सफाई
विद्यालयों में सफाई कर्मी न पहुंचने के कारण गंदगी का अंबार रहता है ऐसी स्थिति में नौनिहालों की शिक्षण व्यवस्था कैसे होगी? प्राथमिक शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है। भ्रष्टाचार के कारण जमीनी स्तर पर स्कूलों की दुर्दशा में कोई प्रभावी सुधार नहीं हो पाता जिससे नौनिहालों को अपने मेघा बढ़ाने का सही मंच नहीं मिल पाता है। अधिकांश विद्यालयों की खेलकूद मैदानों पर अवैध कब्जा है इससे बच्चों के खेलकूद में बाधा उत्पन्न होती है।


स्कूलों पर नहीं हुआ कार्य


गाजीपुर। सदर ब्लाक स्थित खालिसपुर ,फतेहपुर अटवा, जल्लापुर, चौरही, नूरपुर, बंजारीपुर, कैथवलिया  प्राथमिक विद्यालयों में भी कार्य नहीं हुआ है। वहीं मुहम्दाबाद क्षेत्र के  प्राथमिक विद्यालय शक्करपुर, नगवा उर्फ नवापुरा, मालीपुर, चकफरीद,  हैसी, चकहलाद, चकताहा, नोनहरा बरतर, बेलपठार, हुस्सेपुर कोठियां, रसूलपुर हबीबुल्लाह, झुनका, कमालपुर लोधी, मीरानपुर, महुवी, शहबाजकुली, डॉरीडीह के साथ सैकड़ों स्कूलों में अभी तक पूरा पैसा खर्च नही किया गया। बिरनो विकास खंड के भागमलपुर भवरहां, गोपालपुर , पृथ्वीपुर सहित दो दर्जन स्कूलों पर कोई कार्य नहीं हुआ।  मरदह, मनिहारी जखनियां सहित करीब करीब अधिकतर विकास खंडों में ज्यादातर स्कूलों पर कार्य नहीं हुआ है।    


परिषदीय विद्यालयों पर भेजी गई कंपोजिट ग्रांट की धनराशि के तहत कार्य की जांच की जाएगी । इन सभी विद्यालयों से उपभोग प्रमाण पत्र मांगा गया है। विभाग छात्रों की सुविधा को लेकर सभी प्रधानाध्यपकों के कार्य की गहनता से जांच करेगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता
  


 


 


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