भाषा का गतिशील होना अति आवश्यक-चन्द्रकला त्रिपाठी

भारतीय सब्जी अनुसन्धान संस्थान में हिंदी चेतना मास का समापन



जनसंदेश न्यूज़

वाराणसी। भारतीय सब्जी अनुसन्धान संस्थान में मंगलवार को हिंदी चेतना मास का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह की मुख्य अतिथि ख्यातिलब्ध हिंदी विद्वान प्रोफेसर चन्द्रकला त्रिपाठी, प्राचार्य, महिला महाविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय थी। 

मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में राजभाषा हिंदी के गौरवशाली इतिहास का वर्णन करते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भाषा का गतिशील होना अति आवश्यक है तभी वो आमजन तक पहुँच सकती है। 

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, हिंदी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय उपस्थित रहे। समारोह में संस्थान के सभी विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, प्रसाशनिक अधिकारी, तकनीकी कर्मचारी एवं शोध अध्येता उपस्थित रहे। राजभाषा समिति के सदस्य डॉ डी आर भारद्वाज ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। 

संस्थान के निदेशक डॉ जगदीश सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की राजभाषा से जुड़ी गतिविधियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर हिंदी चेतना मास के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्य अतिथि के कर. कमलों से पुरस्कार वितरित किया गया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ इन्दीवर प्रसाद ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ रामेश्वर सिंहए सचिव राजभाषा समिति ने किया।




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