कोरोना के चलते बनारस में ज्यादातर डेंटल क्लीनिक बंद, जानिए कौन डेेंंटिस्ट ले रहा रिस्क

कोविड के खतरे के बावजूद फुलवरिया में मरीजों का इलाज करते रहे डॉ. वैभव सिंह


जनसंदेश न्यूज़

वाराणसी। कोरोना संक्रमण का सर्वाधिक खतरा डेंटिस्ट महसूस कर रहे हैं। यही कारण है कि अधिकतर डेंटल क्लीनिक बंद चल रही हैं। मरीजों को अपने दांतों और मसूड़ों की देखभाल का पूरा ध्यान रखना होगा। बनारस के जाने-माने डेंटिस्ट डा.वैभव सिंह ऐसी ही सलाह देते हैं। हालांकि लाकडाउन के बावजूद फुलवरिया में इनकी क्लीनिक एक दिन के लिए भी बंद नहीं हुई। संक्रमण के खतरे के बावजूद ये लगातार मरीजों के दांतों की देखभाल कर रहे हैं। वो कहते हैं कि दांत के रोगों से कराहते हुए लोग आखिर कहां जाएंगे? हम जानते हैं कि कोविड का खतरा ज्यादा गंभीर है, फिर भी मरीजों की सेवा में जुटे हैं।

फुलवरिया स्थित इनकी क्लीनिक पर रोजाना शहर भर से बड़ी संख्या में दांत के मरीजों का जमघट लग रहा है। लेकिन कोई यूं ही नहीं लौटता। सबका इलाज होता है। डा.वैभव बताते हैं कि इलाज के दौरान मुंह में बनने वाले एयरोसोल संक्रमण फैलाने का बड़ा जरिया हो सकता है। मशीन से जब भी दांतों की सफाई की जाती है तब पानी और हवा के मिश्रण से एयरोसोल बनते हैं, जो पूरे वातावरण में फैल जाते हैं। इससे डॉक्टर सहित आसपास मौजूद लोग संक्रमित हो सकते हैं। भारत में दांतों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता है।


   डा.वैभव के मुताबिक लगभग 95 फीसदी भारतीयों में मसूड़ों की बीमारी है। पचास फीसदी लोग टूथब्रश का उपयोग नहीं करते। 15 वर्ष से कम उम्र के 70 फीसदी बच्चों के दांत खराब हो चुके हैं। वो सलाह देते हैं कि बहुत अधिक चीनी खाने से बचें। स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ भी दांतों के क्षय का कारण बन सकते हैं, क्योंकि चीनी लार में जीवाणुओं के साथ प्रतिक्रिया करके एसिड बनाती है जो दांतों के इनेमल को नष्ट कर देता है। दूध की बोतल से बच्चों के दांत खराब हो सकते हैं। माताओं को हर फीड के बाद एक साफ कपड़े से शिशुओं के मसूड़े और दांत पोंछने चाहिए। अगर अनदेखा छोड़ दिया जाए तो टीथ इंफेक्श़न से हृदय संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

डा.वैभव कहते हैं कि कोरोना काल में दांत में असहनीय पीड़ा होने के बाद भी ज्यादातर लोग कोरोना के भय के कारण इलाज के लिए नहीं आ रहे हैं। मरीजों के अंदर तो भय है ही, डॉक्टरों भी खौफजदां हैं। जरूरी ऐहतियात बरतते हुए वो मरीजों का इलाज कर रहे है। यह रिस्क इसलिए ले रहे हैं कि दांत दर्द के दौरान मरीज को कई बार महिलाओं की डिलवरी से भी ज्यादा दर्द होता हैइस दर्द को बर्दाश्त करना कठिन है।

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