पराली जलाने पर हो सकती है जेल: जिलाधिकारी



 

सतेंद्र सिंह बिजनौर
 

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम के अंतर्गत पराली या फसल के अवशेष जलाना अपराध, दोषी पाए जाने पर आर्थिक दंड के अलावा उसे कारावास की भी हो सकती है सजा, फसल के अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरक शक्ति कमजोर होती है तथा मात्रा में वायु प्रदूषण भी होता है, जो पर्यावरण के अत्यन्त नुकसानदेह- जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय ने स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम के अंतर्गत पराली या फसल के अवशेष जलाना अपराध घोषित किया गया है, जिसके क्रियान्वयन के दोषी पाए जाने पर आर्थिक दंड के अलावा उसे कारावास की भी सज़ा हो सकती है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर होने के साथ-साथ भारी मात्रा में वायु प्रदूषण भी होता है, जो पर्यावरण के लिए अत्यन्त हानिकारक है। उन्होंने उपस्थित समस्त ग्राम प्रधानों, सेकेट्री व किसान सहायक को निर्देशित करते हुऐ कहा कि पराली न जलाने के बारे में अपने अपने क्षेत्रों में सभी किसानों एवं आम लोगों को जागरूक करें।
जिलाधिकारी  स्यौहारा के डबाकरा हाॅल में आयोजित फसल अवशेष प्रबन्धन जागरूकता गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए उपस्थित कृषक बंधुओं का आहवान कर रहे थे।
उन्होंने उपस्थित कृषकों से पराली न जलाने के लिए दृढ़ संकल्पित हो कर शपथ दिलाते हुए आहवान किया कि कोई भी कृषक बन्धु किसी भी अवस्था में अपने खेतों या अन्य स्थान पर पराली व फसल के अवशेष न जलाए क्योंकि पराली या फसल के अवशेष जलाने से एक ओर मिट्टी की उर्वरक शक्ति कमजोर होती है, वहीं दूसरी ओर इससे भारी मात्रा में वायु प्रदूषण भी होता है, जो पर्यावरण के अत्यन्त नुकसानदेह होता है। उन्होंने बताया कि पराली जलाना कानूनन जुर्म है, इसके अंतर्गत पराली जलाने वाले को जुर्माने के साथ साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है। उक्त सम्बन्ध में उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम के अंतर्गत पराली या फसल के अवशेष जलाना दण्डनीय अपराध है, जिसके दोषी पाए जाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति के लिए 02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए रू0 2500 प्रति घटना, 02 एकड़ से 05 एकड़ के लिए रू0 5000 तथा 05 एकड़ से अधिक के लिए रू0 15000 प्रति घटना का प्राविधान है तथा अपराध की पुनरावृत्ति होने पर दोषी को जेल की सज़ा के अलावा अर्थदण्ड भी दिया जाएगा।

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