अब ‘झोलाछाप’ नहीं रहेंगे ग्रामीण हुनरमंद, परंपरागत रूप से तकनीकी व अन्य कार्य करने वालों के लिए रिफ्रेशर कोर्स


- जिले के बड़ागांव व सेवापुरी ब्लॉक के 31 हजार लोगों को करेंगे अपडेट

- केंद्र सरकार की ‘संकल्प योजना’ के अंतर्गत प्रशिक्षित कर देंगे प्रमाण-पत्र

- केंद्र व राज्य सरकार समेत निजी क्षेत्र के संस्थानों को किया गया है एकजुट



सुरोजीत चैटर्जी

वाराणसी। ग्रामीण इलाकों में बगैर प्रशिक्षण लिए परंपरागत रूप से प्लंबर, फीटर, इलेक्ट्रीशियन, ब्यूटीशियन, रिबोर मैकेनिक आदि का काम करने वाले हुनरमंद अब ‘झोलाछाप मिस्त्री’ नहीं कहलाएंगे। ऐसे लोगों को न सिर्फ सरकारी स्तर से प्रशिक्षित किया जाएगा बल्कि ट्रेनिंग के बाद उन्हें सर्टिफिकेट भी देंगे। ताकि इन हुनरमंदों को या तो किसी न किसी संस्थान में रोजगार मिले अथवा वह खुद आधिकारिक रूप में ट्रेंड तकनीशियन के तौर पर अपना कार्य कर सकें। भारत सरकार की ‘संकल्प’ योजना के अंतर्गत जनपद के बड़ागांव और सेवापुरी विकास खंडों में इसकी औपचारिक शुरुआत शुक्रवार को होगी।

कौशल विकास के क्षेत्र में ‘संकल्प’ स्कीम यानी स्किल एक्वीजीशन एंड नॉलेज अवेयरनेस फॉर लाइवलीहुड प्रमोशन (एसएएनकेएएलपी) और ‘स्ट्राइव’ योजना यानी स्किल स्ट्रेंथेनिंग फॉर इंडस्ट्रियल वैल्यू एनहांसमेंट (एसटीआरआईवीई) के तहत वाराणसी में इस पहल की तैयारी हो चुकी है। इसके लिए चयनित दोनों ब्लॉकों में कल मिलाकर लगभग 31 हजार अनट्रेंड हुनरमंदों को विधिवत प्रशिक्षित करने के लिए रिफ्रेशर कोर्स संचालित होगा।

इस रिफ्रेशर कोर्स में सफाईकर्मियों से लेकर स्कूटर-बाइक-कार मैकेनिक, नलकूप मिस्त्री, बिजली मिस्त्री, विभिन्न उपकरणों को दुरुस्त करने वाले मिस्त्री, ब्यूटीशियन वगैरह शामिल हैं। सरकारी स्तर पर ट्रेनिंग के बाद प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का लाभ यह होगा कि उन्हें किसी न किसी छोटे-बड़े औद्योगिक संस्थान में नौकरी मिल सकेगी। इसके अलावा ऐसे प्रशिक्षित हुनरमंद अपने स्तर पर भी बेहतर ढंग से कामकाज कर सकेंगे।

विश्व बैंक के सहयोग से संकल्प और स्ट्राइव योजना को आरंभ किया गया है। हालांकि कौशल विकास मिशन के अंतर्गत पहले से ही कई स्तर पर पहल हुई है। जबकि व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में देश में पहली बार केंद्र व राज्य सरकार समेत निजी क्षेत्र के संस्थानों की कोशिशों को एकजुट करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर की निकाय की स्थापना की गयी है। जिससे प्रोफेशनल ट्रेनिंग की दिशा में न सिर्फ एकरूपता आए बल्कि संबंधित गतिविधियों के दोहराव से बचना भी संभव हो।



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