बीते दो साल में दागी नेताओं के केस में हुआ इजाफा, सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई रिपोर्ट


देश के 4859 पूर्व व वर्तमान सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट सलाहकार ने अपनी रिपोर्ट पेश कर बताया कि पूर्व और मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों में पिछले दो सालों में इजाफा हुआ है। शीर्ष अदालत को बताया कि इसके लिए हाई कोर्ट द्वारा माइक्रो लेवल पर मॉनिटरिंग करने की जरूरत है, ताकि केसों का निपटारा जल्दी से जल्दी सुनिश्चित किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि नई रिपोर्ट के मुताबिक 4859 पूर्व व वर्तमान सांसदों और एमएलए के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। मार्च में ये संख्या 4442 की थी। सुप्रीम कोर्ट में 2016 में बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया था कि जिन सांसदों और विधायकों के खिलाफ केस दर्ज हैं वो मामले लंबे समय से पेंडिंग हैं। ऐसे वर्तमान और पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज केस में जल्दी से जल्दी मामले का निपटारा किया जाना चाहिए।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ हाई कोर्ट हर जिले में स्पेशल कोर्ट गठित करने पक्ष में है, ताकि उन स्पेशल कोर्ट में दागी नेताओं के मामले का जल्दी से जल्दी निपटारा किया जाए। कुछ राज्यों में हाई कोर्ट ने जोन वाइज स्पेशल कोर्ट बनाए जाने की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी हाई कोर्ट इस बात के फेवर में है कि गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनके बयान सुरक्षित माहौल में हो, इसके लिए सुरक्षित गवाह एग्जामिनेशन रूम बनाया जाए साथ ही विडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधाएं हों। रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली में सेशन कोर्ट में 25 केस पेंडिंग है, जबकि मैजिस्ट्रेट की कोर्ट में 62 ऐसे केस पेंडिंग हैं। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के केस भी शामिल हैं। याचिकाकर्ता बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय की ओर से पीआईएल दाखिल कर मांग की गई है कि नेताओं और ब्यूरोक्रेट जिन्हें सजा हो चुकी है उनके चुनाव लड़ने पर आजीवन बैन होना चाहिए। साथ ही मांग की गई है कि नेताओं के खिलाफ पेंडिंग मामलों का निपटारा एक साल में हो इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया जाना चाहिए। दागी नेताओं के मामले की जल्दी सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल कोर्ट का गठन करने का सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किया था।


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