योगी सरकार के प्रस्ताव पर बनारस में भी उठने लगे विरोध के सुर, गठित हुआ प्रदेश स्तरीय संयुक्त मंच

बोले, क्या गारंटी पांच साल बाद करेंगे नियमित


संविदा पर नौकरी के मुद्दे पर भड़के राज्य कर्मचारी


मामले को लेकर अक्टूबर में घेरेंगे विधानसभा, शासन पर खड़े किये सवाल


बोले: यह कौन बताएगा कि अगली सरकार उन संविदा कार्मियों रखेगी या निकाल बाहर करेगी


यही प्रक्रिया विधायक, सांसद व मंत्री बनने के लिए भी अपनाने का नियम बनाए सरकार
बोले: सरकार बताए कि नयी पेंशन मद में काटी गई धनराशि कितनी है और वह कहां जमा है



सुरोजीत चैटर्जी
वाराणसी। पांच साल संविदा पर नौकरी पर रखने के लिए शासन के प्रस्ताव के विरोध में राज्य कर्मचारियों समेत शिक्षक, अधिकारी और पेंशनरों ने प्रदेश स्तर पर संयुक्त मंच गठित किया है। जिसमें विभिन्न संगठनों के प्रांतीय अध्यक्ष शामिल हैं। वह इस मुद्दे को लेकर अक्टूबर माह में विधानसभा घेरने की तैयारी में हैं। प्रकरण में मंच ने संविदा पर पदों को भरने की कवायद को कर्मचारी सेवा नियमावली के विपरीत करार देते हुए सरकार से पूछा है कि इस बात की क्या गांरटी है कि पांच साल संविदा पर नौकरी करने के बाद कर्मचारी को नियमित कर दिया जाएगा। साथ ही इस बात की क्या विश्वसनीयता है कि अगली सरकार उन संविदा कार्मियों रखेगी या बाहर का रास्ता दिखाएगी।


उन्होंने मांग की कि संविदा पर कार्य कराने की प्रक्रिया विधायक, सांसद और मंत्री बनने के लिए भी अपनायी जाय। सरकार बताए कि नयी पेंशन मद में काटी गई धनराशि कितनी है और वह कहां जमा है। संयुक्त मंच में शामिल वाराणसी के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को वर्चुअल बैठक कर आगामी रणनीति पर चर्चा की। मीटिंग की अध्यक्षता राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष शशिकांत श्रीवास्तव और संचालन मंत्री श्याम राज यादव ने किया।


इस मौके पर वक्ताओं ने सख्त नाराजगी जताते हुए सरकार की ओर से लाए जा रहे पांच वर्ष की संविदा के प्रस्ताव का विरोध किया। साथ ही कहा कि शासन के ऐसे मनमाने रवैये के खिलाफ प्रदेश स्तर पर अक्टूबर में विधानसभा घेराव और आंदोलन होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है जिससे कर्मचारियों, शिक्षकों व अफसरों को आर्थिक और मानसिक पीड़ा का समाना करना पड़ रहा है।


उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी व शिक्षक समाज को नकारा घोषित कर सरकार इस संवर्ग की सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ कर रही है। ऊर्जा समेत कई विभागों को निजीकरण की ओर ले जाने के लिए सरकार दमनात्मक रवैया अपना रही है। जले पर नमक छिड़कर युवाओं को चुनौती दी जा रही है।



श्री श्रीवास्तव ने कहा कि पांच साल की संविदा के प्रस्ताव से बेरोजगारों में रोजगार मिलने से पहले ही डर और उत्पीड़न की आशंका घर कर रही है। शासन का यह प्रस्ताव युवा और कर्मचारी विरोधी है। वहीं, समूह ‘ख’ व ‘ग’ की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है। इससे सरकारी नौकरियों में भी ठेका प्रथा लागू हो जाएगी। परीक्षा से चयनित अभ्यर्थी पांच साल की कठिन संविदा प्रक्रिया में छंटनी से बचने के बाद ही पक्की नौकरी के दावेदार होंगे।


उन्होंने कहा कि संविदा काल में कर्मचारी पूरी तरह बंधुआ बनने के लिए बाध्य रहेगा।  गुजरात में फिक्स पे सिस्टम में वर्षों वेतन नहीं बढ़ता, स्टाफ पर्मानेंट नहीं किये जाते। वर्तमान में ही आउटसोर्सिंग से कार्यरत 90 प्रतिशत ठेका कार्मिकों को तय मानदेय से 30 फीसदी तक कटौती कर ठेकेदार भुगतान कर रहा है।


मीटिंग में यह भी रहे


- दिवाकर द्विवेदी, दीपेंद्र श्रीवास्तव, बीएन चौबे, शशांक शेखर पांडेय, ईआरसी श्रीवास्तव, सुभाष सिंह, मनीष चौबे, सुरेंद्र पांडेय,  सारांश सिंह, अमित श्रीवास्तव, विकास सिंह, गीता उपाध्याय, गीतांजलि राणा, योगेश कुमार श्रीवास्तव, विजय कुमार श्रीवास्तव, अंजनी राय, आनंद यादव, विवेक कुमार सिंह, रोहित श्रीवास्तव, डॉ. राजशेखर, दीप सिंह, शशिकांत सिंह, अरविंद दुबे, खंझाटी राम, कुंदन सिन्हा, उमाशंकर सिंह, अशोक सिंह, संजय तिवारी, अवधेश कुमार वर्मा।


 


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