पूर्वांचल में कोरोना मरीजों की मुश्किलें बढ़ाएगी पराली

यूपी में पिछले साल 166 किसानों पर दर्ज हुआ था केस, 185 पर लगा था जुर्माना



विजय विनीत


वाराणसी। पूर्वांचल में धान की पराली अब कोरोना पीड़ितों के लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। जानते हैं क्यों? पराली जलाने पर श्वांस रोग से पीड़ित कोरोना मरीजों की जान जा सकती है। यूपी सरकार ने पराली जलाने पर पिछले साल 166 किसानों पर केस दर्ज किया था और अन्य 185 पर जुर्माना लगाया था। जिन किसानों पर केस दर्ज हुआ था, उनमें ज्यादातर किसान पूर्वांचल के चंदौली और गाजीपुर जिले के थे। अबकी सरकार ने शुरू से ही पराली जलाने वालों को अल्टीमेटम देने शुरू कर दिया है।


कृषि एवं पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक पराली जलाए जाने पर बड़ी मात्रा में जहरीली प्रदूषक गैसें-मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड निकलती हैं। ये गैसें कोरोना पीड़ितों की जान ले सकती हैं। साखतौर पर उन मरीजों की जिनका आक्सीजन सैचुरेशन कम हो जाता है। जिसके चलते कोरोना वायरस महामारी की परिस्थिति और खराब हो सकती है।


विशेषज्ञों के मुताबिक यदि पराली जलाने के वैकल्पिक प्रबंध नहीं किए गए तो प्रदूषण तत्व और कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन जैसी जहरीले गैसों के कारण श्वसन संबंधी गंभीर समस्याओं में बढ़ोत्तरी कर सकती हैं, जिसके चलते कोविड-19 के हालात और बिगड़ जाएंगे क्योंकि कोरोना वायरस श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है।


पूर्वांचल के वातावरण में पराली के चलते सूक्ष्म कणों की मात्रा में 18 से 40 फीसदी योगदान रहता है। पूर्वांचल में पराली का जलाना एक बड़ी समस्या है। और इससे हर साल प्रदूषण में बारी बढ़ोतरी होती है। पराली की वजह से गाजीपुर और चंदौली में हवा जहरीली हो जाती है। आलम यह हो जाता है कि लोगों को घर से बाहर निकलना मुश्किल होता है। पराली की वजह से आक्सीजन में लगातार गिरावट आ रही इसको लेकर एनजीटी ने कई बार निर्देश दिए, लेकिन समस्या को आज तक कोई कारगर हल नहीं निकल सका।



कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के मुताबिक फसल के अवशेष यानी पराली जलाए जाने पर पिछले साल 166 किसानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और 185 किसानों पर जुर्माना लगाया गया था। उन्होंने किसानों को ऐसा न करने की हिदायत दी है। उन्होंने कहा है कि पराली जलाए जाने पर 2500 रुपये से लेकर 15000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा गलती करने पर प्राथमिकी दर्ज कराए जाने का प्रावधान किया गया है। पिछले साल लपरवाह किसानों से 1,30,500 रुपये की जुर्माना वसूला गया था। श्री शाही के मुताबिक अनुसार सरकार द्वारा जारी निर्देशों के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में एक लेखपाल को निलंबित किया गया, एक लेखपाल के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई की गई, जबकि 7 लेखपालों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।


हालांकि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से प्राप्त रिमोट सेंसिंग की एक रिपोर्ट अनुसार,  पूर्वांचल में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में 46.9 प्रतिशत की कमी आई है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मुख्य सचिव स्तर पर एक निगरानी प्रकोष्ठ का भी गठन किया गया है, जहां सभी जनपदों से इस संबंध में प्रतिदिन की कार्रवाई की रिपोर्ट प्राप्त की जाती है। कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वो अभी से निगरानी करें, ताकि किसान पराली न जला सकें। अगर किसी गांव में पराली जलाई जाती है तो वहां के प्रधान और सेक्रेटरी को भी जिम्मेदार माना जाएगा।


हालांकि मानवाधिकार कार्यकर्ता डा.लेनिन किसानों के खिलाफ कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि योगी सरकार को हर जिले में ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जहां किसान अपनी पराली ले जाकर बेच सकें। इसके एवज में वो पैसा अथवा भूसा हासिल कर सकें। पराली की समस्या को दंड अथवा जुर्माने से हल नहीं किया जा सकता है। पराली को आय का जरिया बनाना होगा। इस दिशा में सरकार ने अभी कोई कदम नहीं उठाया है।


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