कृषि विधेयक के विरोध पर गन्ना मंत्री ने गांधी परिवार पर साधा निशाना, बोले, राहुल-प्रियंका क्या जानें खेती  

सूबे के गन्ना मंत्री बोले: कृषि बिल को लेकर कांग्रेस और विपक्ष पर फैला रहा भ्रम


एपीएमसी एक्ट का राहुल ने पूर्व में किया था समर्थन अब कांग्रेस कर रही है विरोध


- 55 वर्षों में एक बार कांग्रेस ने किसानों का किया कर्जा माह उसमें भी हुआ घोटाला



सुरोजीत चैटर्जी
वाराणसी। सूबे के गन्ना मंत्री सुरेश राना ने कृषि सुधार विधेयक को लेकर हो रहे विरोध पर आरोप लगाया है कि कांग्रेस और विपक्ष नये कृषि बिल को लेकर भ्रम फैला रहा है। आज जब कृषि सुधार के प्रयास हो रहे हैं तो कांग्रेस व विपक्षी पार्टियां किसानों को गुमराह कर रही हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी क्या जानें खेती-बाड़ी। श्री राना ने चुनौती दी कि ये दोनों कृषि से जुड़े मेरे सिर्फ दो सवालों का जवाब दे दें।


कृषि सुधार विधेयक के बारे में गुरुवार को आ योजित वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैबिनेट मंत्री श्री राना मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि संसद में पारित कृषि सुधार विधेयक मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम है। कांग्रेस ने अपने शासन काल में किसानों को बंधन में जकड़ रखा था। यूपीए सरकार ने कभी भी किसानों के हित में कोई फैसला नहीं लिया। सन 2013 में स्वयं राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस शासित 12 राज्य अपने यहां से फल-सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करेंगे। अब कांग्रेस ही एपीएमसी में बदलाव का विरोध कर रही है।


श्री राना ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल देश के किसानों को भड़का रहे हैं कि मोदी सरकार इस विधेयक के जरिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को खत्म करने जा रही है। जबकि पीएम मोदी और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कई बार कह चुके हैं कि एमएसपी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा, यह पहले की तरह लागू रहेगी। कई फसलों की एमएसपी बढ़ायी गयी है। कांग्रेस ने किसानों के सशक्तिकरण के लिए कुछ नहीं किया। 55 सालो में एक बार कांग्रेस ने किसानों का कर्जा माफ किया और उसमें भी भारी घोटाला हुआ। किसानों को गुमराह कर राजनीति करना कांग्रेस की पुरानी आदत रही है। जबकि मोदी सरकार कृषकों के लिए लगातार ताम पहल जारी रखे हुए है।


किसान की जमीन नहीं फसल पर होगा करार : गन्ना मंत्री


- प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश राना ने कहा  नये कृषि सुधार विधेयक पर बोले


- कहा  : कृषि बिल में किसान की भूमिलीज पर लेने व बेचने पर रहेगा प्रतिबंध


- किसानों के लिए लाभकारी बिल, किसी भी राज्य में बेच सकेंगे अपनी उपज


- कृषि सुधार विधेयकों से बढ़ेगा मुनाफा, अन्नदाता होंगे पहले से अधिक सशक्त


जनसंदेश न्यूज
वाराणसी। कृषि सुधार विधेयकों से किसानों का मुनाफा बढ़ेगा और अन्नदाता सशक्त होंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद की व्यवस्था बनी रहेगी। मंडी समितियां बंद नहीं होंगी। किसानों को अपनी फसल के भंडारण व बिक्री की आजादी मिलेगी। उन्हें बिचौलियों के चंगुल से मुक्त करेंगे। नये बिल में किसान की जमीन पर लीज और भूमि की बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा। सिर्फ अन्नदाता की फसल पर करार होगा। किसान अपनी उपज देश के किसी भी प्रदेश में जाकर मनमुताबिक मूल्य प्राप्त कर सकेगा। इसके लिए अवागमन आदि बिंदुओं का सरलीकरण किया जाएगा। 


प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राना ने गुरुवार की शाम वर्चुअल माध्यम से वाराणसी के मीडियाकर्मियों संग आ योजित पत्रकार वार्ता में यह कहा। उन्होंने बताया कि कृषि सुधार विधेयकों में कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य यानी संवर्धन और सरलीकरण विधेयक, कृषक सशक्तिकरण व संरक्षण कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक के पास होने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नये अवसर मिलेंगे और उनका मुनाफा बढे“गा। इसी के तहत आधुनिक तकनीक का लाभ देंगे।


उन्होंने कहा कि किसान अपनी मर्जी का मालिक होगा। अब जरुरी नहीं कि किसान राज्य की सीमाओं में रहकर ही फसल बेचे। भुगतान सुनिश्चित करने के लिए देय पेमेंट राशि का उल्लेख डिलिवरी रसीद किसानों को उसी दिन मुहैया कराने की व्यवस्था होगी। अनुबंधित किसानों को नियमित और समय पर भुगतान के अलावा सभी प्रकार के कृषि उपकरणों की सुविधाजनक आपूर्ति समेत क्रेडिट या नकद पर समय से गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री की आपूर्ति करेंगे।


कैबिनेट मंत्री ने मोदी सरकार की ओर से किसानों के लिए अबतक हुई पहल और अन्नदाताओं की आय दोगुनी करने के लिए चल रहे प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि नये विधेयकों के कारण कृषि क्षेत्र में संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना संभव होगा। फलस्वरूप निवेश को बढ़ावा, उत्पाद सीमा, आवाजाही, वितरण एवं आपूर्ति की आजादी संग बिक्री की अर्थव्यवस्था बढ़ाने बढाने में मदद मिलेगी। श्री राना ने कहा कि कृषि बिल का न्यूनतम समर्थन मूल्य से कोई लेना-देना नहीं है। एमएसपी पहलेकी ही तरह मिलता रहेगा। प्रेसवार्ता में भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष महेश चंद श्रीवास्तव और काशी क्षेत्र के मीडिया प्रभारी नवरतन राठी भी थे।


कई राज्यों में हो रही कांट्रैक्ट खेती
कृषि बिल के तहत वन मार्केट-वन नेशन की परिकल्पना साकार होगी। किसान किसी पर भी निर्भर रहने के बजाय बड़ी कंपनियों संग पार्टनर बनकर ज्यादा मुनाफा कमा सकेगा। कांट्रैक्ट खेती से किसानों को तय रेट प्राप्त करने की गारंटी मिलेगी। वह किसी भी समय करार से बाहर निकलने के लिए आजाद रहेगा। कई राज्यों में किसान सफलतापूर्वक बड़े कॉर्पोरेट संग गन्ना, कपास, चाय, कॉफी आदि प्रोडक्ट प्रोड्यूस कर रहे हैं। दस हजार नये एफपीओ पर केंद्र 6850 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। आत्मनिर्भर पैकेज में कृषि क्षेत्र के लिए एक लाख करोड़ रुपये की घोषणा हुई है। मोदी सरकार में फसलों के एमएसपी में भारी वृद्धि की गई है।


 


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