कैंट पुलिस ने मंडी निदेशक से मांगा लिखित जवाब, सुंदरीकरण के लिए सरकार ने पास किये थे 20 करोड़

काम का निरीक्षण और जांच के नाम पर लखनऊ ने कोरम पूरा किया



रवि प्रकाश सिंह
वाराणसी। पहड़िया मण्डी स्थल के सुन्दरी करण व निर्माण के लिए प्रदेश सरकार ने करोड़ों का बजट जारी किया था। आरोप है कि इस पैसे को मंडी अधिकारी और ठेकेदारों की गठजोड़ से गटक लिया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद आठ महीने बाद जागी कैंट थाना पुलिस ने अब मंडी निदेशक मुख्यालय से 13 बिंदुओं पर लिखित जवाब मांगा है। जांच अधिकारी ने पूछा कि अब ये कृत्य हो रहा था तब आप कहां थे। जांच की आंच मण्डी निदेशक सहित अन्य अधिकारियों तक पहुंचने पर लखनऊ मुख्यालय में हड़कं प मच गया है। 


पूर्वांचल की सबसे बड़ी कृषि उत्पादन मण्डी समिति पहड़िया को आदर्श मण्डी के रूप में विकसित करने के लिए 2016 में तत्कालीन सपा सरकार ने लगभग 20 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। ये बजट सीसी रोड, पक्की नाली, दुकान, शौचालय और कैन्टीन के साथ दुकानों का मरम्मत, पानी टंकी लगाने के लिए जारी हुआ था। लेकिन काम होने से पहले ही अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से करोड़ो पास करा लिए गये। 




मजे की बात ये है कि इस काम का निरीक्षण मण्डी परिषद लखनऊ मुख्यालय के अधिकारी भी समय-समय पर करते थे। बावजूद इसके लंबा गणित हो गया। आंख बंद कर निरीक्षण करने का परिणाम ये रहा कि करोड़ों कहां चले गए पता नहीं चला। चार साल बीतने के बाद भी मण्डी का निर्माण कार्य ठेकेदारों द्वारा नही कराया गया। जनवरी 2020 में मण्डी उपनिदेशक निर्माण (डीडीसी) के पदभार संभालने के बाद रामनरेश ने कार्यो का मूल्यांकन किया तो भारी घोटाला सामने आया। 


उन्होंने ठेकेदारों से कार्य पूरा कराने के लिए लिखित व मौखिक दबाव बनाया तो ठेकेदार बगले झांकने लगे। डीडीसी ने मण्डी परिषद मुख्यालय से कड़े तेवर के बाद तीन ठीकेदारों सहित दो संयुक्त निदेशक, दो डीडीसी, दो अपर अभियंता सहित एक लेखाधिकारी के खिलाफ कैन्ट थाने में भ्रष्टाचार में मुकदमा 28 जनवरी को दर्ज कराया गया था। जांच अधिकारी कैन्ट थाने के प्रभारी राकेश कुमार सिंह ने अगस्त 18 को मण्डी निदेशक मुख्यालय लखनऊ जितेंद्र प्रताप सिंह को पत्राचार करके 13 प्रश्नों का जवाब लिखित में मांगा है।  


 


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