काम पर लौट रहे श्रमिक, कैंट से गुजरने वाली तीन क्लोन ट्रेन भी प्रवासियों के लिए पड़ी कम

श्रमिकों के समक्ष क्लोन ट्रेन भी बौना, टिकट रिग्रेट


टिकट काउंटर के कुछ घंटे बाद से ही क्लोन ट्रेन में भी दिख रिग्रेट



अश्वनी कुमार श्रीवास्तव
वाराणसी। महानगरों में काम के लिए लौट रहे श्रमिक प्रवासियों के भीड़ के दबाव को कम करने के लिए रेलवे बोर्ड ने जिस क्लोन ट्रेन को चलाने का निर्णय लिया एक बार फिर बौना साबित हुआ। 


मुम्बई, सूरत और दिल्ली के साथ ही अहमदाबाद के लिए चलायी जा रही इन क्लोन ट्रेनों के लिए शुरू हुआ आरक्षण कार्य कुछ ही घंटे में रिग्रेट हो गया। कंर्फम तो दूर की बात अब वेटिंग टिकट भी मिलना मुश्किल हो गया है। 


शनिवार को शुरू टिकट बुकिंग के पहले दिन ही एक मिनट भी नहीं लगा और पूरी  क्लोन ट्रेन की सीटें आरक्षित हो गईं। वहीं रविवार को इन ट्रेनों में टिकट रिग्रेट दिखाने लगा। मतलब वेटिंग टिकट भी निकलना मुश्किल हो गया। राहत की बात यह है कि इन रुटों पर चली क्लोन टेकृन से जिन श्रमिकों को टिकट मिला उन्हें ना सिर्फ राहत मिली बल्कि दलाल की ओर से वसूली जा रही मोटी रकम से भी इन श्रमिकों को मुक्ति मिल गयी। 


एक नजर आकक्षण आंकड़ो पर 


कैंट स्टेशन के मुख्य आरक्षण केंद्र के मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक डा. एमएस अहमद की माने तो सप्ताह में प्रत्येक बुधवार वाराणसी के रास्ते सूरत जाने वाली क्लोन गाड़ी संख्या 09066 ताप्तीगंगा एक्सप्रेस के स्लीपर श्रेणी में वेटिंग का स्तर तीन सौ  के पार कर रिग्रेट हो गया। जिसके बाद वेटिंग निकलना भी बन्द हो गया। थर्ड एसी में 150 वेटिंग पहुंच गया। कैंट स्टेशन से हफ्ते में तीन दिन चलने वाली वाराणसी-नई दिल्ली गाड़ी संख्या-04059 महामना क्लोन एक्सप्रेस में भी श्रमिकों की भीड़ का असर दिखा। इस ट्रेन में भी वेटिंग तीस के पार है। 


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