जानिए कौन हैं दुनिया की तीस वो हस्तियां, जिन्हें आरएसएफ ने कोरोनाकाल में बेहतरीन रिपोर्टिंग के लिए पहनाया 'सूचना नायक' का ताज

पत्रकारों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर ने गहन सर्वेक्षण के बाद जोखिम उठाने वाले खबरनवीसों की जारी की सूची


पेरिस में है रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर का मुख्यालय, पत्रकारों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ दुनिया भर में यह संस्था उठाती है आवाज



जनसंदेश न्यूज


पेरिस। हर संकट अपने नायकों को पैदा करता है। दुनिया भर में पत्रकार, व्हिसलब्लोअर और मीडिया आउटलेट हैं जो कोविड 19 के दौर में बाधाओं को दूर करने में कामयाब रहे। महामारी की शुरुआत हुई तो दुनिया के कुछ चुनिंदा पत्रकार ही अपने साहस, दुस्साहस और दृढ़ संकल्प के बल पर भरोसेमंद और गुणवत्तापरक जानकारी दे सके। सेंसरशिप का विरोध करते हुए खबरें लिखीं। चुनौतियों का सामना करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए काम किया।


रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर (RSF) ने ऐसे नायकों का चयन किया है जिन्होंने असाधारण संकट के दौरान स्वतंत्रतापूर्वक काम करते हुए हर समय, काल और परिस्थियों में खुद प्रतिष्ठित किया है। आरएसएफ द्वारा नामित लोगों को कोविड का बचाव करते समय एक मॉडल के रूप में देखा जा सकता है। पत्रकारों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने जो सूची संकलित की है उसका सर्वेक्षण जनता ने नहीं किया, बल्कि संस्था ने खुद किया है। रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर (RSF) ऐसी संस्था है जो पत्रकारों पर होने वाली जुल्म और ज्यादतियों के खिलाफ दुनिया भर में आवाज उठाती है। साथ ही उन सरकारों पर अंकुश लगाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुहिम भी चलाती है। संस्था का मुख्यालय पेरिश में है।


रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर (RSF) के मुताबिक तीस नायकों में एक तिहाई एशिया महाद्वीप के हैं, जहां कोविड का प्रभाव सबसे अधिक रहा। इनके सूचना नायकों में छह यूरोप और मध्य एशिया से हैं। बाकी अन्य अफ्रीका, अमेरिका और मध्य पूर्व से हैं। इनमें से अधिकांश नायकों में सामान्य तथ्य यह है कि उन्होंने महामारी के गुरुत्वाकर्षण या संकट के दौरान सरकार के कुप्रबंधन को उजागर करने वाली जानकारी का खुलासा किया।


सर्बिया में ऐना लेलिक जैसे दिग्गज पत्रकार हो या स्लोवेनिया में Blaž Zgaga, Andjouza Abouheir ।  बेलारूस में कोमोरोस और सर्गेई सतसुक ने कोरोना के संकटकाल में अहम भूमिका अदा की। सूचना नायकों में एक नेत्र चिकित्सक ली वेनलियानग को भी शामिल किया गया है, जिन्होंने पहली बार दुनिया को इस गंभीर बीमारी के खतरे के बारे में दिसंबर 2019 में ही सचेत कर दिया था। साथ ही यह अल्टीमेटम दे दिया था कि यह महामारी समूची दुनिया में तेजी से फैलेगी। सूचना नायकों में एक अधिवक्ता हैं चेन कुरैशी, जिन्होंने अपने ब्लॉग पर कोविड के प्रारंभिक स्थल वुहान के अस्पतालों में अराजकता का खुलासा किया। वेनेजुएला में, स्वतंत्र पत्रकार डार्विनसन ने आधिकारिक महामारी के आंकड़ों पर सवाल उठाया तो उन्हें 12 दिनों तक जेल काटनी पड़ी।


भारत में,  जनसंदेश टाइम्स अखबार के रिपोर्टर विजय विनीत को प्रशासन ने धमकियां दी। इस आशय की नोटिस दी जिससे उन्हें छह महीने की सजा हो सकती थी। इन्होंने लाकडाउन के दौरान बनारस में घास खा रहे भूखे बच्चों के बारे में ग्राउंड रिपोर्ट लिखी। साथ ही यह भी बताया कि किस हालात में दलित बच्चों को अन्न न मिल पाने की वजह से घास खानी पड़ी। बांग्लादेश के प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट अहमद कबीर किशोर को फेसबुक पर एक राजनीतिक कार्टून पोस्ट करने के लिए एक संभावित आजीवन कारावास की सजा का सामना करना पड़ रहा है।


कोरोना काल में स्वाति न्यूज वीक वेबसाइट के संपादक यूजीन दूबे ने इवासातिनी साम्राज्य पर सवाल उठाने उठाते हुए एक लेख लिखा, जिस पर पुलिस ने उनसे कड़ी पूछताछ की, जिसके चलते उन्हें पड़ोसी देश दक्षिण अफ्रीका भागना। बीजिंग स्थित रिपोर्टर क्रिस बकले को न्यूयॉर्क टाइम्स में खबर लिखने पर  76 दिनों के लिए चीन छोड़ने पर मजबूर किया गया। 24 साल में पहली बार उनके वीजा का नवीनीकरण नहीं किया गया।


रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर (RSF) ने जिन लोगों को सूचना नायकों की सूची में शामिल किया है उनमें से कई नायकों ने भारी दबाव और सेंसरशिप का सामना करने में साहस दिखाया। इन्हीं में एक हैं काइसीन। वो एक स्वतंत्र अंग्रेजी और चीनी-भाषी पत्रकार हैं। बीजिंग के आउटलेट में छपी उनकी रिपोर्ट के लिए चीनी सरकार ने उनसे कड़ी पूछताछ की। ऐसा ही साहस अफगान रिपोर्टर अनीश शाहिद ने दिखाया। इन्होंने संक्रमण यौगिक के खतरे के बावजूद साहसिक पत्रकारिता की। खासतौर पर उन इलाकों में भी जहां तालिबानों के हमले का खतरा हर वक्त मंडराता रहता है।


संयुक्त राज्य अमेरिका में, व्हाइट हाउस के कई संवाददाताओं ने कोविड संकट के प्रतिकूल परिस्थितियों में अपनी दृढ़ता से खुद को प्रतिष्ठित किया। राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके सहयोगियों द्वारा लगातार हमलों के बावजूद, वे दृढ़ता से डटे रहे। इन पत्रकारों ने महामारी से निपटने में शिथिलता बरते जाने पर सरकार से सवाल किया।


अफ्रीका में, इवोरियन वेब रेडियो WA FM और Togolese समाचार साइट TogoCheck अफवाहों और नकली समाचारों का मुकाबला करने और जनता के लिए विश्वसनीय जानकारी का प्रसार करने के लिए बनाई गई थी। ब्राजील में, वैकल्पिक मीडिया आउटलेट ने संसाधनों को त्यागने के लिए "गबंटे डे क्राइस" बनाने के लिए तैयार किया। वायुरी नेटवर्क के पत्रकारों ने रियो डी जनेरियो के क्षेत्रों में निवास किया। अमेज़न में 750 से अधिक स्वदेशी समुदायों को पुख्ता सूचना दी कि कोविड का खतरा काफी बढ़ गया है। रूस में, 25 मीडिया आउटलेट ने सिंडिकेट-100 का गठन किया। इसका मकसद महामारी की चपेट में आए चिकित्सा कर्मियों के लिए सुविधाओं को आसान बनाना और जनता को सचेत करना था।


रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर (RSF) ने  उन पत्रकारों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की है जो रिपोर्टिंग करते हुए इस बीमारी की जद में आए और शहीद हो गए। 


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