दिव्यांग पति-पत्नी की शौचालय के पैसे पर डाका, प्रधान-सचिव ने प्रोत्साहन राशि की आधी रकम हड़पी

डीएम कार्यालय के सामने धरने की चेतावनी




जनसंदेश न्यूज 
मनिहारी/गाजीपुर। केन्द्र सरकार के राष्ट्रव्यापी भारत स्वच्छता अभियान अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से लूट का शिकार बन कर रह गया है। जिसके चलते लोग खुले में शौच करने तथा सरकार की ऐसी योजनाओं को कोसने के लिए बाध्य हैं। खास बात तो यह है कि, गांव में बने शौचालय कागजी  खानापूर्ति तथा गरीब ग्रामीण जनता के साथ भद्दा मजाक और छलावा बनकर रह गया है। 


ग्राम प्रधान एवं सचिव द्वारा कमीशन खोरी ने पात्र लाभार्थियों के साथ-साथ  दिव्यांग जनों के अधिकार एवं पात्रता पर डाका डाल कर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दिव्यांग जनों के साथ शौचालय मुहैया कराने के नाम पर आधी धनराशि हड़पने और आधी धनराशि देने का मामला गांव की राजनीति में भूचाल ला दिया है। 


ताजा मामला मनिहारी विकास खंड के सिखड़ी ग्राम पंचायत का है, जहां शौचालय पात्रता सूची में दिव्यांग धर्मेन्द्र कुमार का नाम आने के बाद भी लम्बी दौड़ कराई गई, जबकि पति पत्नी दोनों दिव्यांग हैं। अंत में वो थक हार कर खुद के पैसे से अपना शौचालय बनवा लिया। जिसको बाद में प्रोत्साहन राशि में मिले 12000 में से 6000 रुपए प्रधान और सचिव के कमीशन के रूप में चला गया। बाकी 6000 दिव्यांग को देकर उसका मुंह बंद करने की कोशिश की गई। 


इसकी शिकायत दिव्यांग ने खुद अखबार नुमाइंदों से करते हुए प्रधान और सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के अंदर बाकी शेष राशि नहीं मिली तो हम दोनों दिव्यांग पति-पत्नी जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। हालांकि, शिकायतकर्ता के जागरूक होने के बाद यह मामला संज्ञान में आया है। गांव के लोगों का कहना है कि इस शौचालय घोटाले में लिप्त सचिव एवं ग्राम प्रधान पर जिला प्रशासन द्वारा बड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि भविष्य में कभी कोई लाचार आदमी इनका शिकार न हो सके।


खण्ड विकास अधिकारी मनिहारी दिनेश कुमार मौर्य ने कहा कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। मैं सचिव को तलब कर इसका निस्तारण करवाता हूं। वहीं ग्राम प्रधान परशुराम यादव ने कहा कि एक किस्त दे दिया गया है, दूसरी किस्त आते ही दे दिया जाएगा।


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