ढूंढ़े नहीं मिल रहे ‘लापता’ पात्र किसान, पीएम किसान सम्मान निधि में आवेदन किये हजारों किसानों को तलाश रहा जिला प्रशासन

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के हजारों आवेदकों को लेकर संकट


- जिले में ऐसे करीब साढ़े नौ हजार पात्रों के संशोधन कार्य में फंसा पेंच


- आशंका: जनपद छोड़कर जा चुके और बनारस के पते पर दी है अर्जी


- कृषि विभाग ने बैंकों से मांगी इन आवेदकों के खातों की वर्तमान स्थिति



सुरोजीत चैटर्जी
वाराणसी। जनपद में वह कृषक ढूंढ़े नहीं मिल रहे, जिन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए आवेदन तो किया है लेकिन घर के पते पर वह नदारद हैं। उनका बैंक खाता चालू हैं अथवा नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं। ऐसे किसानों की संख्या नौ हजार से अधिक है। अब बैंकों से कहा गया है कि संबंधित किसानों के खाते यदि उनकी शाखाओं में हैं तो ब्योरा उपलब्ध कराएं ताकि निधि का पैसा भेजने की दिशा में औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।


जिले में अबतक लगभग ढाई लाख किसान ऐसे हैं जिन्हें या तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है या उन्हें किश्त भेजने की तैयारी है। इनमें से करीब सवा दो लाख किसानों को निधि की धनराशि विभिन्न किश्तों में भेज रहे हैं। शेष लगभग 25 हजार किसानों को पैसा भेजने की कवायद है। दावा है कि यह सभी किसान स्कीम की पात्रता पर खरे हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए आवेदन कर चुके करीब 14 हजार कृषकों के डाटा में संशोधन व सत्यापन का कार्य चल रहा है।


“स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि ऐसे किसानों में से लगभग साढ़े नौ हजार किसान अपने घर के पते उपलब्ध न होने का कारण क्या है। वह मौके पर रहते भी हैं अथवा नहीं, यह तय करना अफसरों के लिए मुश्किल हो रहा है। आशंका जतायी जा रही है कि घर के पते पर न मिलने वाले किसान वर्तमान में वाराणसी को छोड़कर बाहर जा चुके हैं और अन्य जनपद में रहने लगे हैं। उन्हीं किसानों ने बाहर रहते हुए वाराणसी के एड्रेस पर अपना आवेदन दिया है। क्योंकि सत्यापन कार्य के दौरान वह किसान न तो मौके पर मिले और न ही जनपद में उनकी मौजूदगी पुष्ट हो सकी।


इस समस्या को देखते हुए कृषि विभाग ने थक-हारकर उन बैंकों को ‘लापता’ किसानों के बैंक अकाउंट चालू रहने के बारे में सूचना मुहैया कराने को कहा है। ताकि ऐसे नदारद किसानों के बैंक खातों की स्थिति स्पष्ट हो सके। जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए आवेदन करने वाले करीब साढ़े नौ हजार किसान अपने पते पर नहीं हैं। यह उनमें शामिल है। जिनके आवेदनों का डाटा संशोधन का कार्य चल रहा है। 


वहीं, लगभग पांच हजार किसानों के आधार कार्ड, नाम आदि की त्रुटियां सुधारी जा रही हैं। स्कीम का लाभ लेने के लिए तय मानकों में शामिल किसानों को अपना बैंक खाता नंबर, आईएफएससी कोड, आधार नंबर या कृषि विभाग में पंजीकरण संख्या और अपना मोबाइल फोन नंबर देने का प्रावधान है। वर्तमान में जनपद के लगभग ढाई लाख किसान इस योजना के लिए पात्रों की लिस्ट में हैं।


 


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