चंदौली में जनपद न्यायालय के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

कोर्ट ने किसानों की स्वेच्छा के बिना अधिग्रहण को बताया गलत

जनसंदेश न्यूज़
चंदौली। जनपद न्यायालय के लिए बाघो मौजा में चल रही जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही पर हाईकोर्ट की खण्ड पीठ ने रोक लगा दी है। बीते नौ सितंबर को न्यायमूर्ति मुनीश्वरनाथ भंडारी व न्यायमूर्ति अजय भनोट की खण्ड पीठ ने शारदा सिंह और 33 अन्य बनाम राज्य सरकार के मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है कि किसानों की स्वेच्छा के बिना विक्रय विलेख यानी बैनामा की प्रक्रिया को निष्पादित करने के लिए विवश नहीं किया जाए। 


हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कहा है कि बाघो मौजा स्थित जमीन के उपयोग व उपभोग का किसानों को पूर्ण अधिकार है। उन्हें उनके इस अधिकार से तब तक वंचित नहीं किया जा सकता, जब तक उनकी जमीन अधिग्रहित व विक्रय विलेख निष्पादित न हो जाए। हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद प्रभावित किसानों में खुशी की लहर दिखाई दी। शारदा सिंह, अशोक सिंह, मंगला, नन्हें, रामकुमार सिंह, रामजी यादव, नरोत्तम, दिलीप सिंह, अरुन सिंह, तेज प्रताप आदि किसानों ने कहा कि जबरिया उनकी भूमि का अधिग्रहण जिला प्रशासन नहीं कर सकता।


बाघो में जमीन अधिग्रहण को लेकर जिला प्रशासन की रूख स्थानीय किसानों के खिलाफ रहा। क्योंकि जमीन अधिग्रहण के बदले संबंधित किसानों को उचित मुआवजा देने में जिला प्रशासन आनाकानी कर रहा है और किसानों के विरोध व मनाही के बावजूद जबरिया भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही को अमल में लाया जा रहा है, जो पूरी तरह से जिला प्रशासन की तानाशाही है। कहा कि जब शासन-प्रशासन ने किसानों की व्यथा नहीं सुनी तो अंततः हम सभी को कोर्ट की शरण में जाना पड़ा।


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