भविष्यनोमुखी है नई शिक्षा नीति: प्रो. प्रकाशमणि

व्यक्तित्व विकास करने वाली है नयी शिक्षा नीति: प्रो. कर्णाटक


रोजगारपरक है नई शिक्षा नीति: निर्मला एस. मौर्य




जनसंदेश न्यूज़
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के प्रबंध अध्ययन संकाय की ओर से शुक्रवार को राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इसका विषय था राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020: आयाम एवं चुनौतियां। 


इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि इस शिक्षा नीति में भारतीय परंपराओं के साथ-साथ सभी विधाओं का भी ध्यान रखा गया है। इसमें आंगनबाड़ी से लेकर विश्वविद्यालय तक की शिक्षा व्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की गई है। यहीं नहीं वैश्विक आदान-प्रदान की भी व्यवस्था की गयी है, ताकि भारत विश्वगुरु बन सके। 


उन्होंने कहा कि यह शिक्षा नीति भविष्यनोमुखी के साथ-साथ वर्तमान को संवारने वाली है। नई शिक्षा नीति जग से जन तक मनुष्य को मनुष्यता से आधार से आकाश तक को समेकित करते हुए आगे जाने का प्रावधान है भारतीय अस्मिता एवं मूल्यवर्धन को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाया गया है श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी जी ने बताया कि भाषाओं के संबंध में संस्कारों के प्रति आग्रह है। इस नई शिक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है 2025 तक नामांकन शत-प्रतिशत करना है नई शिक्षा नीति का ध्यान है। नई शिक्षा नीति के चार प्रमुख विशेषताएं हैं जो कि समग्रता एकात्मता सभी का मुख्यधारा में समायोजन भविष्य मुखी है। जय जवान- जय किसान, जय विज्ञान एवं जय अनुसंधान भी नई शिक्षा नीति का मूल मंत्र है। जिज्ञासा रचनात्मकता संकल्प बाध्यता वाला विद्यार्थी तैयार करना ही नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य है।


विशिष्ट अतिथि के रूप में दून विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपति प्रो. अजीत कुमार कर्णाटक ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देने के साथ-साथ किताबों का बोझ कम करने पर भी जोर दिया गया है। मल्टीडिस्पलीनरी शिक्षा से विद्यार्थियों की विषय के प्रति रुचि बढ़ेगी। नई शिक्षा नीति 34 वर्षों के अंतराल के बाद आई है। जिसमें 4 वर्ष बाद आपको शोध करने की अनुमति दिए जाने का प्रावधान है। शोध की गुणवत्ता ही इस नई शिक्षा नीति का प्रमुख उद्देश्य है। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना करना भी इस नई शिक्षा नीति में है।


बतौर अध्यक्ष प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि नई शिक्षा नीति बहुआयामी है। इसमें प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक काफी मंथन किया गया है ताकि विद्यार्थियों को रोजगारपरक बनाए जा सके। विषय प्रवर्तन आयोजन संयोजक प्रो. अविनाश पाथीर्डीकर और स्वागत प्रो.मानस पांडेय ने किया। संचालन डॉ. आशुतोष सिंह, धन्यवाद ज्ञापन श्री अमित वत्स ने किया। 


इस अवसर पर डॉ सुरजीत कुमार, प्रो वंदना राय, डॉ प्रदीप कुमार, डॉ आलोक सिंह, डॉ मनोज मिश्रा, डॉ सुनील कुमार, प्रो एच सी पुरोहित , डॉ सुशील कुमार सिंह, प्रो अजय वाघ, प्रशांत यादव बिद्युत मल, नितिन चौहान आदि उपस्थित थे।


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