अच्‍छी खबर : टूरिस्ट हब के रूप में विकसित होंगे गांव, पूर्वांचल के इन-इन जिलों का यह है खाका

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने ‘भागीरथी सर्किट’ की बनायी कार्ययोजना 


- पर्यटकों को देंगे गंगातट पर बसे गांवों की संस्कृति को निकट से देखने का मौका


- चयनित और आसपास के गांवों की आर्थिक स्थिति होगी बेहतर, बढ़ेगा रोजगार


- वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर व मीरजापुर जिलों को मिलाकर भेजा गया प्रस्ताव


- गंगा किनारे बसे सुप्रसिद्ध स्थल वाले गांवों को विकसित करने का है प्रपोजल



सुरोजीत चैटर्जी
वाराणसी। गंगातट के कई गांव स्मॉल टूरिस्ट हब के रूप में विकसित करेंगे। यह ऐसे गांव हैं जो धार्मिक और ऐतिहासिक कारणों से प्रसिद्ध हैं। इन गांवों को भागीरथी सर्किट में शामिल कर ऐसे प्रयास होंगे ताकि देशी-विदेशी पर्यटन रात्रि निवास के लिए इन गांवों में पहुंचे और वहां के महत्व समेत धार्मिक व सांस्कृतिक रीति-रिवाजों को निकट से देखकर परिचित हो सकें। इस प्रकार की पहल से संबंधित गांव समेत आसपास के गांव के लोगों को न सिर्फ रोगजार के अवसर मिलेंगे बल्कि पर्यटन उद्योग को भी अलग तरह से बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए वाराणसी समेत आसपास तीन अन्य जनपदों की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजा गया है।


यूपी में भागीरथी सर्किट बनाने के लिए चल रही कवायद के अंतर्गत उम्मीद जतायी जा रही है कि इस प्रोजेक्ट में राज्य में गंगा किनारे बसे लगभग 16 सौ गांव और वहां के लोग लाभांवित होंगे। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बन रही इस कार्ययोजना के माध्यम से सरकार की ‘स्वदेश दर्शन’ स्कीम भी मूर्त रूप ले सकेगी।


उत्तर प्रदेश पर्यटन के क्षेत्रीय कार्यालय से भागीरथी सर्किट के लिए वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और मीरजापुर जनपदों के ऐसे गांवों का वर्कप्लान शासन को भेजा गया है जहां प्रसिद्ध मठ-आश्रम, किला आदि हैं। उनमें से कुछ स्थान पर पहले से ही कार्य चल रहे हैं जबकि अधिकांश स्थान पर टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर (टीएफसी), पक्के घाट, छोटे गेस्ट हाउस, घाट विस्तार आदि के प्रपोजल दिये गये हैं। हालांकि इस सर्किट के लिए दिये गये प्रस्तावों के बारे में कार्यदायी संस्था तय होने के बाद ही दिये कुछ खर्च का इस्टीमेट तय होगा।


छोटे गेस्ट हाउस के तौर पर कॉटेज हाउस आदि बनाएंगे। टूरिस्ट को इन गांवों में जाकर एक-दो रात प्रवास करने के लिए प्रेरित करेंगे। पर्यटक गांवों में रात्रि निवास की इच्छा जाहिर करे तो उसके सामने गंगातट के विभिन्न गांवों का विकल्प पेश करेंगे। परियोजना तैयार होने के बाद उसकी मार्केटिंग होगा ताकि पूरी दुनिया तो पता चल सके कि वाराणसी समेत पूर्वांचल के कई जिलों के गांवों में भी पर्यटन के लिए काफी कुछ है।


छोटे-छोटे प्रोजेक्ट से होगी पहल
- टूरिस्ट अफसर कीर्तिमान श्रीवास्तव के मुताबिक भागीरथी सर्किट के जरिये चयनित गांवों समेत उसके आसपास के गांव के लोगों को अपने ही इलाके में रहते हुए रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। पर्यटन के लिहाज से गांव की प्रसिद्धि बढ़ने पर वहां की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा। इस सर्किट के संबद्ध प्रत्येक गांव में 25 लाख रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक की छोटी-छोटी परियोजनाओं के माध्यम से स्मॉल टूरिस्ट हब विकसित किया जाएगा। इस बारे में चार जिलों की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी गई है। 


पूर्वांचल के जिलों का यह है खाका
- वाराणसी: कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर व घाट के निकट कैंपिंग साइट, जैन तीर्थ स्थल चंद्रावती में घाट व टीएफसी, गंगा-वरुणा संगम स्थित जौ विनायक पर घाट व सीढ़ी, राजघाट पर सांस्कृतिक मंच, चेंजिंग रूम, खिड़किया घाट पर घाट निर्माण प्रस्तावित, आदिकेशव घाट पर टीएफसी, डोमरी गांव में टीएफसी, रामनगर के बलुआ घाट पर पक्का घाट, अस्सी घाट से रविदास घाट तक वुडन ब्रिज प्रस्तावित, शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर के निकट टीएफसी।


- चंदौली: बलुआ (सराय) में पश्चिम वाहिनी गंगा तट पर गंगा आरती के लिए सांस्कृतिक मंच, घाट व सीढ़ी।


- गाजीपुर: कुर्था गांव स्थित पवहारी बाबा आश्रम के निकट छोटे आकार का घाट, चोचकपुर स्थित मौनीबाबा आश्रम में गेस्ट हाउस (टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर यानी टीएफसी)।


- मीरजापुर: चुनार किला के निकट पक्का घाट, रामगया घाट पर पक्का घाट व घाट विस्तारीकरण, चुनार मार्ग स्थित बड़ी शीतला माता मंदिर पर टीएफसी।


 


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