गांधी जैसा कोई दूसरा नहीं: प्रो. हरिकेश सिंह

गांधी ने मैंकाले के शिक्षा नीति को समाप्त किया



रवि प्रकाश सिंह
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शताब्दी वर्ष पर इतिहास विभाग की ओर से आयोजित पांच दिवसीय  ‘क्यों याद करें हम गांधी को’ ऑनलाइन वेबिनार व्याख्यानमाला का समापन रविवार को हुआ।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छपरा विवि बिहार के पूर्व कुलपति प्रो.हरिकेश सिंह ने लोक शिक्षक गांधी पर विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि गांधी जैसा कोई दूसरा न हुआ नाही होगा। गांधीजी ने मैंकाले के शिक्षा नीति को समाप्त करने के लिए ही महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ  के समान अन्य विवि की नींव रखी। गांधी को लोक शिक्षक के रूप में इस लिए याद किया जाता है कि उन्होंने आंदोलन के साथ-साथ ग्रामीण शिक्षा विकास को बढ़ाने का पूरा प्रयास किया। इस काम में उनकी धर्मपत्नि कस्तूरबा गांधी का सहयोग रहा। संबोधन के अंत में प्रो.सिंह ने कहा कि गांधी से बड़ा शिक्षक, प्रशिक्षक या संपादक शायद ही कोई दूसरा हो।


अध्यक्षता विवि के कुलपति प्रो.टीएन सिंह ने की। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जो महात्मा गांधी से अछूता रहा हो। गांधी ने सर्वत्र काम किया है। वास्तव में अगर भारत को आत्मनिर्भर बनाना है तो गांधी को आत्मसात करना होगा। अतिथियों का स्वागत व विषय प्रर्वतन जननायक चंद्रशेखर विवि के संस्थापक कुलपति एवं इतिहास विभाग काशी विद्यापीठ के प्रमुख प्रो.योगेंद्र सिंह ने किया। संचालन डॉ.अंजना वर्मा और धन्यवाद डॉ. जया कुमारी आर्यन ने दिया। समापन अवसर पर प्रो.राजबाला सिंह, डॉ.अलका पांडेय, डॉ.अनिरूद्ध तिवारी, डॉ.अंजू सिंह, डॉ.शैलेश कुमार, डॉ. प्रिया श्रीवास्तव, डॉ.अर्चना गोस्वामी, डॉ.अजय गौतम, विरेंद्र कुमार, डॉ.अनिल कुमार आदि लोगों ने भाग लिया।


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