अरबों की जमीन हड़पने में मददगार चार गिरफ्तार, बैंककर्मी की मिली भगत से निकाले गए एक करोड़

1 अरब 39 करोड़ की जमीन पर दावा करने वाले भूमाफियाओं पर दर्ज है मुकदमा


राय साहब बागीचा प्रकरण में बैंक कर्मी, लेखपाल की मिलीभगत का हो चुका है पर्दाफाश



रवि प्रकाश सिंह
वाराणसी। वीडीए की स्वामित्त की जमीन (राय साहब का बागीचा जिसकी कीमत सर्किल रेट के अनुसार लगभग 01 अरब 39 करोड़ रुपये) हड़पने तथा हाईकोर्ट द्वारा स्थगन आदेश के बाद भी संगठित भू-माफियाओं द्वारा आपराधिक षड़यंत्र कर अवैध दस्तावेजों द्वारा मालिकाना हक व कब्जा साबित करने वाले भू-माफियाओं के सहयोगी ओम प्रकाश, प्रशान्त उर्फ रिन्कू, उमेश कुमार, तरुण रंजन श्रीवास्तव को कैण्ट पुलिस ने गिरफ्तार किया। उक्त भूमि पर वीडीए द्वारा वर्ष 2002 में विभूति नगर योजना प्रोजेक्ट शुरू किया गया था।


राय साहब के बगीचे की जमीन को अवैध तरीके से बेचने, सट्टा कराने और कब्जा करने वालों के खिलाफ विकास प्राधिकरण पहले ही कैंट थाने में एमएलसी पुत्र समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। गिरफ्तार चारों के ऊपर आरोप है कि सुनियोजित तरीके से राय पुष्पलता के खाते में भूमाफियाओं द्वारा लीज डीड के एवज में एक करोड़ डाले थे। बाद में इन्ही लोगों ने गिरफ्तार चोरों लोगों के सहयोग और बैंककर्मी की मिलीभगत से खाता ट्रांसफर कर एक-एक कर पैसे निकाल लिए।


ये है पूरा मामला, पैसे निकालने में किसने की मदद कौन रहा शामिल  
वर्ष 2017 में को राय पुष्पलता द्वारा उसी जमीन का लीज डीड भूपेन्द्र प्रताप और अकील अहमद को किया गया, इसमें गवाह प्रताप सिंह और रामधनी राय बने। इसी साल जून में राय पुष्पलता ने दूसरा लीज डीड संतोष कुमार के साथ किया गया, जिसमें गवाह अकील अहमद और रामधनी राय बने। इसी साल अगस्त में राय पुष्पलता द्वारा अपनी सम्पूर्ण सम्पत्ति का वसियतनामा भूपेन्द्र प्रताप सिंह और अकिल के साथ किया।


मार्च 2019 में राय पुष्पलता के द्वारा सट्टा बिना कब्जा बीरा इन्फ्रास्ट्रक्टरर डेवलपर्स साथ किया।  इसी साल 18 मार्च को राय पुष्पलता के खाते में 01 करोड़ रुपया आया। इस 01 करोड़ रुपये को सुनियोजित ढंग से आपराधिक षड्यंत्र के तहत एक राय होकर अकिल अहमद और भूपेन्द्र प्रताप सिंह व अन्य लोगों के द्वारा हड़पने का प्रयास किया गया। इनके द्वारा राय पुष्पलता की जमीन हड़पने के साथ-साथ उनके खाते में जो एक करोड़ रुपये गया था उसको भी सुनियोजित ढंग से हड़प लिया गया। इसमें बैंककर्मी तरुण रंजन श्रीवास्तव (एसडीओ) को अपने गिरोह में शामिल कर पहले राय पुष्पलता के खाते को कोटक महेन्द्रा बैंक के रामकटोरा शाखा से स्थान्तरित कर गोदौलिया शाखा में परिवर्तित किया गया इसके बाद अकील, भूपेन्द्र और तरुण ने षडयंत्र के तहत नामिनी बदलवा कर भूपेन्द्र को राय पुष्पलता का भतीजा बता कर बदलवा दिया गया।
इसके बाद अकील, भूपेन्द्र, तरुण ने प्रशान्त उर्फ रिंकू, के द्वारा बदल-बदल कर लाये गये लोगों द्वारा राय पुष्पलता के खाते में आये पैसे को एक राय होकर षडयंत्र के तहत कूटरचित तरीके से सारा पैसा निकाल लिया गया। इसमें मददगार की भूमिका ओम प्रकाश, प्रशान्त उर्फ रिन्कू, उमेश कुमार और तरुण रंजन श्रीवास्तव ने निभाई। इन्ही सब की मदद से खाते से एक करोड़ निकाले गए।


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