अलादीन: नाम तो सुना होगा में नया मोड़, मल्लिका से शैतानी ताकत से जिीन बनी अम्मी की चुनौतियां बढ़ी


जनसंदेश न्यूज 
इंदौर। सोनी सब के शो अलादीन: नाम तो सुना होगा ने अपने चौंकाने वाले रहस्यों से लगातार दर्शकों को रोमांचित किया है। इस शो के मौजूदा एपिसोड्स में दर्शक देख रहे हैं कि अलादीन (सिद्धार्थ निगम), मल्लिका (देबिना बनर्जी) के लिए खंजर के कुछ हिस्सों को खोजने और अपनी अम्मी (स्मिता बंसल) को ठीक करने के लिए एक मिशन पर निकला हुआ है। गौरतलब है कि इस शो में स्मिता बंसल अभिनीत अम्मी हाल ही में मल्लिका की शैतानी ताकतों के कारण जिनी बन गई है।  
यह नया मोड़ स्मिता बंसल के लिए कई बदलावों को लेकर आया है क्योंकि अब जिनी के रूप में उन्हें चलना नहीं बल्कि तैरना है। अपने इस अनोखे अनुभव के बारे में बताते हुये उन्होंने कहा, जब मैं शो पर जिनी में बदली थी, तो मुझे होवरबोर्ड का इस्तेमाल करना था और शुरूआत में यह मेरे लिए एक बहुत बड़ी चुनौती थी। जब आप होवरबोर्ड का इस्तेमाल करते हैं तो यह बहुत ही अलग एहसास होता है क्योंकि आपको इसे अपने पैरों से नियंत्रित करना पड़ता है। पहले दिन जब मैं इसपर खड़ी हुई, तो मैं गिर गई। 
सौभाग्य से उस दौरान प्रणीत और एक क्रू मेंबर ने मुझे पकड़ लिया था और मुझे ज्यादा चोट नहीं लगी। होवरबोर्ड को इस्तेमाल करने का सबसे मुश्किल हिस्सा उसे चालु और बंद करना होता है क्योंकि आपका एक पैर उसके ऊपर होता है और दूसरे से आपको उसको सही तरह से संतुलित करना होता है, ताकि आप होवरबोर्ड पर ढंग से चढ़ सकें और उससे उतर सकें। क्योंकि, मेरा पहला दिन था, मैंने खुद को ज्यादा होशियार समझा और होवरबोर्ड से मैं कूद गई और आखिरकार गिर गई।
उन्होंने आगे कहा, सेट पर प्रैक्टिस करना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि यहां पर जो सतह है वो बिलकुल भी प्लेन नहीं है और इसके बीच में बहुत सारी बाधाएं हैं। मैंने खुद भी कुछ एपिसोड्स देखें है जहां मैंने थोड़ी बहुत ठोकर खाई लेकिन एडिटिंग की वजह से वह नजर नहीं आया। इन सब से हताश होकर एक बार मैंने होवरबोर्ड पर हार मानने की और हाथ से खींचने वाली ट्रॉली इस्तेमाल करने की सोची जिसकी व्यवस्था हमारे निर्देशक ने की थी। हालांकि, वह बहुत ही थकाऊ और लंबा काम था, इसलिए मैंने होवरबोर्ड पर एक और कोशिश की और काम बन गया। अब मैं लंबे समय से इसका उपयोग कर रही हूं और इसके साथ काफी सहज हूं।
उन्हें होवरबोर्ड का इस्तेमाल करना किसने सिखाया इस बारे में बताते हुए स्मिता बंसल ने बताया, प्रणीत (रिंग के जिनी) नियमित रूप से शूटिंग पर होवरबोर्ड का इस्तेमाल करते आ रहे हैं और उन्होंने ही मुझे इसे इस्तेमाल करने के लिए सिखाने की कोशिश की। यहां तक की सिद्धार्थ (अलादीन), जो एक शानदार जिम्नास्टिक है, वो भी बहुत ही आसानी से होवरबोर्ड का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने तो यहां तक कहा कि अम्मी, सिर्फ अपने दिमाग के माध्यम से इसे नियंत्रित करें और आप इसका इस्तेमाल करने में सक्षम होंगी, लेकिन मैं नहीं कर सकी। 
अलादीन नाम तो सुना होगा के बारे में सबसे खुबसूरत चीज ये है कि आपके सभी सह-कलाकार और आपकी टीम आपके साथ बहुत ही धीरज रखते हैं और वो आपको किसी भी चीज के लिए दबाव नहीं डालते, वो आपको प्रोत्साहित करते हैं। प्रणीत और सिद्धार्थ ने इस चीज को सुनिश्चित किया कि शॉट्स के बीच में भी, मैं होवरबोर्ड का उपयोग करके अभ्यास करूं। इसलिए ये पूरी प्रक्रिया सुखद बन गई थी। इस बारे में सिद्धार्थ निगम ने कहा, मैं निजी तौर पर शूटिंग पर होवरबोर्ड को इस्तेमाल करने का आनंद उठाता हूं और यह देखकर अच्छा लगता है स्मिता मैम भी अपनी जिनी की भूमिका के लिए इसका इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह उनके लिए एक नई चीज थी, लेकिन उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी और हर एक दिन उन्होंने होवरबोर्ड पर सवार होकर इस कला में महारथ हासिल करने के लिए अभ्यास जारी रखा। 
   


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