आजमगढ़ के ‘ओसामा’ की जमानत से हाईकोर्ट का इनकार, सीएए-एनआरसी विरोध के साथ ही पुलिस पर किया था आत्मघाती हमला



जनसंदेश न्यूज़
प्रयागराज। सीएए-एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिंसा के लिए भड़काने, सरकार और देश विरोधी बयान देने, दो समुदायों के बीच घृणा पैदा करने की कोशिश और एक धर्म विशेष के बारे में असम्मानित टिप्पणियां करने के आरोप में आजमगढ़ के ओसामा की जमानत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नामंजूर कर दी है। जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने सुनवाई की।
आरोपी ओसामा के खिलाफ आजमगढ़ के बिलरियागंज थाने में सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने, पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने, देश विरोधी बयान देने सहित दर्जन भर से ज्यादा गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
याची के अधिवक्ता का कहना था कि सभी आरोप सामान्य प्रकृति के हैं। इस मामले में आरोपी बनाए गए अन्य लोगों की जमानतें इस अदालत द्वारा पूर्व में मंजूर की जा चुकी हैं। मामले के सभी गवाह पुलिस के ही कर्मचारी हैं, जिन्होंने खुद अपना बयान रिकार्ड करवाया है। 
जमानत अर्जी का विरोध कर रहे सरकारी वकील का कहना था कि आरोपी का कृत्य अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। यह सिर्फ भीड़ हिंसा को भड़काने का मामला नहीं है, बल्कि दो समुदायों के बीच धर्म के आधार पर शत्रुता बढ़ाने की कोशिश की गई है।
कोर्ट ने प्राथमिकी देखने के बाद कहा कि लगाए गए आरोपों से स्पष्ट है कि याची सशस्त्र हिंसक भीड़ में शामिल था, जिसने पुलिस पर हमला किया और उनके कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। सार्वजनिक संपत्ति नष्ट की गई। पांच फरवरी 2020 को यह घटना काफी देर तक जारी रही। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने जमानत देने से इंकार कर दिया है। 


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