मानव रक्त तस्करी: दूसरे दिन तीन गये जेल, कुछ ऐसे खेल रहे थे अवैध रक्त तस्करी का खेल


सैम्पलिंग के लाइसेंस पर निकाल रहे थे मानव खून

जनसंदेश न्यूज़
चंदौली। मानव रक्त की तस्करी में पुलिस ने सोमवार को तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसमें शुभम पैथालाजी के संचालक शशिकांत यादव समेत स्वास्तिक अस्पताल के संचालक डा. केपी सिंह व प्रबंधक रामबचन पांडेय शामिल हैं, जिन्हें प्रथम दृष्टया खून की तस्करी में पुलिस ने दूसरे दिन आरोपी बनाया है। फिलहाल इस मामले में स्वास्तिक अस्पताल समेत वैभव पैथालाजी, शुभम पैथालाजी को सील किया गया है, लेकिन पुलिस ने वैभव पैथालाजी के न तो संचालक के खिलाफ कोई एक्शन लिया और ना ही किसी कर्मचारी को ही पकड़ा। पूछने पर जांच टीम के गठित होने की बात कहकर जिम्मेदार अफसरों ने पल्ला झाड़ लिया। 
सदर कोतवाली पुलिस ने सोमवार को किए गए खुलासे मे यह बताया कि भानू प्रताप व बब्बू चौहान नामक तस्कर वैभव पैथालाजी व शुभम पैथालाजी के माध्यम से रक्त निकालकर स्वास्तिक अस्पताल को सप्लाई करते थे। इसके एवज में उन्हें अस्पताल संचालन डा. केपी सिंह द्वारा 2500 रुपये प्रति ब्लड यूनिट भुगतान किया जाता था। पूछताछ में पुलिस को यह भी जानकारी हाथ लगी कि पैथालाजी में निकाले गए रक्त को बिना किसी जांच के ही मरीजों को चढ़ाया जाता था। जबकि इन दोनोें पैथालाजी को ब्लड सैम्पलिंग करने का अधिकार प्राप्त है न की रक्त ब्लीडिंग का। बावजूद इसके ये अवैध तरीके से मानव शरीर से रक्त निकालकर उसका गोरखधंधा कर रहे थे। 



पुलिस ने बताया कि डा. केपी सिंह के पास अवैध ब्लड गरीबों से निकालने व बिना परीक्षण किए मरीजों को चढ़ाए जाने का रैकेट है। जिसमें भानू प्रताप, बब्बू चौहान के अलावा शशिकांत यादव,, कुंदन शर्मा व प्रदीप चौहान शामिल हैं। वहीं अन्य लोगों की तफ्तीश अभी जारी है। यह गिरोह बिहार प्रांत के मोहनियां स्थित नारायण नर्सिंग होम को भी अवैध रक्त की आपूर्ति करते थे, जिसके खिलाफ कार्यवाही के लिए स्थानीय प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। पुलिस ने बताया कि प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्तिक अस्पताल मरीजों को भर्ती करके ब्लक की आवश्यकता न होने पर भी फर्जी ढंग से ब्लड चढ़ाकर योजना के अंतर्गत रकम कमाता था।


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