एड़ी-चोटी की कोशिशें हुईं फेल, हासिल नहीं कर सके टार्गेट, गेहूं खरीद की तिथि बढ़ाने के बावजूद सरकारी क्रय केंद्र रहे नाकाम

- जनपद के 34 सरकारी क्रय केंद्रों पर कुल जमा 18.37 फीसदी हुई खरीद


- सहकारी समितियों के सेंटरों पर दूर की कौड़ी रहा 62 सौ एमटी का लक्ष्य


- सभी क्रय केंद्रों को मिलाकर सिर्फ 714 किसान पहुंचे अपनी उपज बेचने



जनसंदेश न्यूज


वाराणसी। शासन-प्रशासन ने एड़ी-चोटी जोर लगाया कि समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद का निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लिया जाय। लेकिन उनकी प्रत्येक स्तर की कवायद नाकाम रही। अन्नदाता के घर-घर दस्तक तक दे दी लेकिन सफल नहीं हो सके। अंतत: सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 जून कर दी। फिर भी कामयाबी हाथ नहीं लगी। रबी सीजन में इस बार सरकारी स्तर पर कुल 15 हजार एमटी टार्गेट के सापेक्ष बमुश्किल 28 सौ एमटी गेहूं खरीदने में सफलता मिली जो कुल लक्ष्य का महज 18.37 फीसदी ही रहा।


जनपद में खाद्य विभाग, एफपीओ, पीसीएफ, यूपी एग्रो और एनसीसीएफ के कुल मिलाकर 34 क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद हुई। इनमें से खाद्या विभाग और एफपीओ को पांच हडार एमटी खरीद का टार्गेट दिया गया था। दोनों के कुल दस क्रय केंद्रों पर मात्र 969.65 एमटी गेहूं खरीदा जा सका जो इनके कुल लक्ष्य सिर्फ 19.39 प्रतिशत ही है। जबकि बीते साल इन दोनों के क्रय केंद्र पर 5786.15 एमटी गेहूं की खरीद हुई थी। इसीप्रकार पीसीएफ में इस बार अपने 17 क्रय केंद्र के लिए तय कुल लक्ष्य 65 सौ एमटी के सापेक्ष 15.27 फीसदी खरीद हुई। इनके सभी 17 क्रय केंद्र पर कुल जमा 992.46 एमटी गेहूं क्रय की गयी। गत वर्ष इनके सेंटरों पर कुल 3638.09 एमटी खरीद हुई थी।


दूसरी ओर, यूपी एग्रो के तीन क्रय केंद्र पर गेहूं खरीद का टार्गेट तीन हजार एमटी के सापेक्ष 192.45 एमटी (6.42 प्रतिशत) रहा। बीते साल इन्हीं केंद्रों पर कुल 1975.75 एमटी खरीद की गयी थी। इन सभी की तुलना में एनसीपीएफ ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इनके चार क्रय केंद्रों पर कुल 500 एमटी खरीद का लक्ष्य था। जिसके सापेक्ष 120.30 फीसदी खरीद हुई। इनके केंद्रों पर कुल 601.50 एमटी गेहूं खरीदा गया।


अब भुगतान की स्थिति पर नजर डालिए।  इस बार सरकारी क्रय केंद्रों पर कुल 714 किसान ही गेहूं लेकर पहुंचे। उनसे खरीदे गए कुल 2756.06 एमटी गेहूं के एवज में अभी भी लगभग 24 लाख 23 हजार 300 रुपये बकाया है। जबकि पांच करोड़ 30 लाख 54 हजार रुपया का भुगतान कर दिये जाने का दावा किया गया है।


गेहूं खरीद के दौरान कई मौके ऐसे भी आए जब क्रय केंद्र पर मुआयने के लिए पहुंचे अफसरों के सामने ही कई किसानों के अपनी उपज उस सेंटर पर बेचने के बजाय मौके पर ही प्राइवेट सेक्टर के कारोबारियों से सौदा कर गेहूं बेच दिया। दूसरी ओर, फ्लोर मिलों के अलावा विभिन्न कंपनियों ने सीधे किसान के दरवाजे पर पहुंचकर समर्थन मूल्य से अधिक भुगतान करते हुए गेहूं खरीदा। सरकार क्रय केंद्रों पर कई तरह की समस्याओं और धनराशि में कटौती आदि को देखते हुए किसानों ने अवसर का लाभ उठाया और निजी क्षेत्र में अपनी उपज बेच दी। फलस्वरूप गेहूं खरीद का सरकारी लक्ष्य पीछे छूट गया।


सरकार की मंशा किसान को मिले उपज का अधिक पैसा


जिला खाद्य विपणन अधिकारी अरुण कुमार त्रिपाठी के मुताबिक कई स्तर पर प्रयासों के बावजूद शासन से तय टार्गेट हासिल नहीं किया जा सका। उधर एआर कोआॅपरेटिव विनोद कुमार सिंह कहते हैं कि सरकार का मुख्य लक्ष्य है कि किसान को उसकी उपज का अधिक से अधिक मूल्य प्राप्त हो। इसीलिए शासन स्तर से समर्थन मूल्य का निर्धारण किया जाता है। अब किसान चाहे सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचे अथवा प्राइवेट सेक्टर में। अबकी बार भी सरकारी स्तर पर गेहूं खरीद के लिए सहकारी समितियों के क्रय केंद्रों को लक्ष्य दिये गये थे। समितियों ने टार्गेट हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास किया।


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