चंदौली में अवैध ब्लड कारोबार में लिप्त अस्पताल सील! जान से खिलवाड़, इन सात महत्वपूर्ण जांच को करते थे नजरअंदाज



जनसंदेश न्यूज़
चंदौली। कलेक्ट्रेट से सटा स्वास्तिक अस्पताल रविवार को स्वास्थ्य महकमे के रडार पर आ गया। अवैध ब्लड के कारोबार का भंडाफोड होने के बाद एडीशनल सीएमओ डा. डीके सिंह की अगुवाई में पुलिस व प्रशासनिक दल स्वास्तिक अस्पताल पहुंचा और अफसरों के जवाब-तलब में अस्पताल के चिकित्सक द्वारा अवैध ब्लड की खरीद की बात स्वीकार की गई। इतना ही नहीं अस्पताल में भर्ती मरीजों के आपरेशन व ईलाज संबंधित दस्तावेज भी अफसरों के सक्षम प्रस्तुत नहीं किए गए। ऐसे में अंततः अस्पताल को सील करने की कार्यवाही अमल में लायी गयी। 


दरअसल अवैध ब्लड का कारोबार कर रहे दो तस्कर रविवार को स्वास्तिक अस्पताल के बाहर सदर कोतवाली पुलिस के हत्थे चढ़े। पूछताछ में अस्पताल की संलिप्तता जाहिर हुई तो एसीएमओ डा. डीके सिंह समेत सीओ सदर कुंवर प्रभात सिंह व कोतवाल गोपाल जी गुप्ता ने अस्पताल पर छापेमारी की। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों को चढ़ने वाले ब्लड की बीएचटी (पर्ची) तलब की तो वहां मौजूद चिकित्सक निरूत्तर रहे। इसके बाद उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों की सर्जरी से जुड़े दस्तावेजों की मांग की और पूछा कि किस मरीज को कौन सी बीमारी का ईलाज आपरेशन के जरिए किया गया। 



अस्पताल की कमियों को देख एडीशनल सीएमओ आक्रोशित हो उठे। उन्होंने कहा कि अवैध ब्लड की खरीद मरीज के जान के साथ खिलवाड़ है। यह बड़ा घपला होने के साथ-साथ नर्सिंग होम का दुस्साहस है, जो किसी भी हाल में क्षम्य नहीं है। बताया कि अस्पताल के लोग निजी पैथालाजी की मिलीभगत से बिना किसी जांच के केवल ब्लड ग्रुप का मिलान करके मरीज को रक्त चढ़ा दे रहे थे। इस कारोबार में लिप्त तस्करों ने बताया कि वह डोनर को 1500 रुपये देते थे। साथ ही 800 रुपये प्रति यूनिट खुद का कमीशन रखकर अस्पताल को ब्लड की सप्लाई करते थे। 
एडीशनल सीएमओ ने बताया कि स्वास्तिक अस्पताल को सील करने की कार्यवाही पूर्ण कर ली गयी है। जल्द ही अस्पताल के खिलाफ जांच की कार्यवाही आरंभ की जाएगी। इतना स्वास्तिक अस्पताल संचालक के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। अंत में एंबुलेंस मंगाकर अस्पताल में भर्ती आठ मरीजों को जिला अस्पताल भेज दिया गया।



सात महत्वपूर्ण जांच को करते थे नजरअंदाज 
चंदौली। अवैध ब्लड का कारोबार लोगों की जान के कितना बड़ा जोखिम है इसकी पुष्टि रविवार को खुद स्वास्थ्य महकमे के आला अफसरों ने की। एडीशनल सीएमओ डा. डीके सिंह ने बताया कि ब्लड को चढ़ाने से पूर्व सात महत्वपूर्ण जांच की जाती है, जिसमें टीएलसी, डीएलसी, वीडीआरएल, एचआईवी समेत एचबी, मलेरिया, हेपेटाइटिस-बी एवं हेपेटाइटिस-सी जैसी महत्वपूर्ण जांच होती है, ताकि ब्लड चढ़ाने वाले मरीज में रक्त के साथ किसी तरह का संक्रमण न फैले। जबकि अवैध कारोबार करने वाले इन जांचों को नजरअंदाज कर किया जा रहा है, जो मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है।



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