मार गिराए 50 फीसदी टिड्डी, शेष भागे लेकिन टला नहीं है खतरा, देर रात तक डीएम ने खुद संभाला मोर्चा

- टिड्डी दलों को भगाने के लिए खुद राजपुर गांव में डीएम ने संभाला मोर्चा


- गुरुवार रात्रि से भोर तक और पूर्वाह्न भी जमी रही दवा छिड़काव की टीम


- फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ियां से हुई मुश्किल, लायी गईं छोड़ी गाड़ियां


- जिले से भगाया जिंदा बची टिड्डियों को, लेकिन आज भी रहेगी निगरानी


- प्रयागराज-भदोही की सीमा पर जमाया है डेरा, हवा के रुख का इंतजार



सुरोजीत चैटर्जी


वाराणसी। जनपद में गुरुवार को लाखों की संख्या में हमला करने वाले पाकिस्तानी टिड्डी के दलों को रातभर व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर शुक्रवार तक या तो मार गिराया गया अथवा उन्हें जिले से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अनुमान है कि बनारस पर धावा बोलने वाले टिड्डियों में से 50 फीसदी टिड्डियों का खात्मा किया जा चुका है। जिंदा बच गये टिड्डी वाराणसी से बाहर प्रयागराज और भदोही की सीमा पर चिह्नित हुए हैं। आशंका है कि यदि शनिवार को दुर्भाग्यवश हवा का रुख दोबारा बनारस की ओर हुआ तो वह टिड्डी वापस इधर रुख कर सकते हैं। इसलिए फिलहाल खतरा पूरी तर टला नहीं है। जिले के अलर्ट मोड पर ही रखा गया है।


टिड्डी दलों के अचानक हमले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने गुरुवार देर रात खुद कमान संभाली और पिंडरा विकास खंड के राजपुर गांव पहुंच गये। कारण, राजपुर और निकट के नयेपुर गांव में सर्वाधिक संख्या में टिड्डी दलों के रूकने की पुष्टि हुई थी। टिड्डियों का अन्य दल इसी ब्लाक के गंजारी, अमौत, चितौरा, गोधरी और नेहिया गांव समेत हरहुआ विकास खंड के पुआरीकला और भोपापुर गांवों में भी डेरा जमाया था। रात्रि करीब आठ बजे राजपुर में कीट नाशक दवाओं के छिड़काव के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के अलावा स्प्रे मशीन लेकर कर्मचारी पहुंचे।



उसके बाद डीएम श्री शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी मधुसूदन हुल्गी, एसडीएम पिंडरा मणिकंडन ए., उप निदेशक कृषि डॉ. राजीव कुमार झा, जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य भी पहुंच गये। दवाओं का घोल तैयार करने के बाद रात्रि करीब दस बड़े दवा का छिड़काव आरंभ कराया गया। गांव के जिस क्षेत्र में यह छिड़काव कार्य चल रहा था, वहीं फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ियां नहीं पहुंच सकीं। फलस्वरूप छोटी गाड़ियों मदद लेनी पड़ी। दूर खड़े फायर ब्रिगेड के वाहनों के पाइप खींचकर तय स्थल तक पहुंचाया गया।


निकट ही ट्यूबवेल होने के कारण पानी की कमी का कोई संकट नहीं था। हालांकि छिड़काव के दौरान दवा का घोल कम पड़ जाने के चलते आनन-फानन में करीब 50 लीटर कीटनाशी दवा और मंगवानी पड़ी। मौके पर प्रकाश व्यवस्था का पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण भी दवा का छिड़काव कर रही टीम को असुविधा का सामना करना पड़ा। कारण, वाहन पर रखे जेनरेटर की क्षमता पर्याप्त नहीं थी। उसके बावजूद कर्मचारी हतोत्साहित नहीं हुए और अपना अभियान जारी रखा।



छिड़काव के दौरान पेड़-पौधों पर बैठी टिड्डियां उड़ने और केमिकल के प्रभाव से जमीन पर गिरने लगीं। दवा छिड़काव की मुहिम भोर में लगभग 3.30 बजे तक चली। उधर, नयेपुर में भी कुछ देर तक कर्मचारियों ने दवा का छिड़काव किया। सब्जी के खेतों से अधिक वृक्षों पर टिड्डियों का जमावड़ा अधिक होने के कारण ट७ीम के पसीने छूट गये। उन्हें अधिक मशक्कत करनी पड़ी। लगातार चले अभियान के दौरान स्टाफ थककर चूर हो चुके थे। टीम ने पूर्वाह्न दस बजे तक टिड्डियों को भगाने और मारने का सिलसिला जारी रखा था। शुक्रवार की सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके का नजारा देखने पहुंच गये।



चारों ओर मरे हुए टिड्डियों की भरमार थी। दिन में उड़ने का स्वभाव रखने वाली टिड्डी प्रात:काल भारी बारिश होने के चलते जिंदा बचे टिड्डी भींग कर भारी हो गये और उड़ नहीं सके। पूर्वाह्न लगभग 11 बजे से उन टिड्डियों ने उड़ना आरंभ किया और अलग-अलग राह पकड़ी। हालांकि स्प्रे करने वाली छोड़ी मशीनों को तैयार रखा गया था। अफसरों के निर्देश पर उन टिड्डियों की दिशा पर निगरानी रखी जा रही थी। अधिकांश टिड्डी जनपद के बाहर चले गये लेकिन बहुत कम संख्या में टिड्डियों का एक झुंड राजातालाब क्षेत्र के मेहंदीगंज पहुंचा सूचना मिलते ही आनन-फानन में दवा छिड़काव करने वालों की टीम वहां पहुंची और अपना काम शुरु  कर दिया।


इधर, जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य ने बताया कि वाराणसी आए टिड्डियों में से 50 प्रतिशत को मार दिया गया है। अवशेष टिड्डियों में से बहुत कम संख्या में टिड्डियों ने मेहंदीगंज में डेरा डाला था, जिन्हें खत्म किया जा चुका है। फिलहाल जनपद से भगाए गये टिड्डियों का एक बड़ा समूह प्रयागराज और भदोही की सीमा पर है। यदि शनिवार को पुन: हवा की दिशा बनारस की ओर रही तो टिड्डी दल दोबारा यहां आ सकते हैं।



संगठन में शक्ति, ‘थैंक्स’ टिड्डियों


बेजुबान कीट के आगे नतमस्तक कई देश फिर भी लिया सबक


- कई किसानों ने टिड्डियों के हौसले को सराहा


- पशुपालकों ने लिया संख्या बल का संदेश


रामदुलार यादव


चांदमारी। न सीखने की कोई उम्र नहीं होती और न ही सिखाने की। किसी से कुछ भी सीखा जा सकता है। सीखने के लिए जरूरी नहीं कि गुरु हो ही। फूलों ने हमें कांटो में रहकर हंसना सिखाया। कुत्ते ने वफादारी सिखायी। धरती ने सहनशीलता और चांद ने शीतल रहना सिखाया। उसी तरह टिड्डियों ने भी दी है। समूह में रहना, एकजुटता और विशाल संख्या में साथ चलने की सीख, भले ही उसने अपने हमलों से दुनिया के कई देशों को संकट में डाल दिया हो।


बीते गुरुवार को लाखों की संख्या में टिड्डी दलों ने भले ही बनारस को चिंता में डाल दिया लेकिन कई किसानों ने उसे अलग संदेश के रूप में देखा। बेजुबान टिड्डियां जो एक हल्का-सा वार भी सहन नहीं कर सकतीं, उनके विशाल समूह से किसान सहम गये, प्रशासन हलकान हो गया। पूरी मशीनरी को अलर्ट मोड में आना पड़ा। एक टिड्डी से किसानों को कोई परेशानी नहीं लेकिन उनकी अत्यधिक संख्या ने जरूर चिंता में डाल दिया और अन्नदाता अपनी फसल बचाने के लिए खेतों की ओर दौड़ पड़े।


एक तरफ टिड्डियों के धावा बोलने से किसानों को अपनी मेहनत से उगाई फसल नष्ट होने का डर सता रहा था तो दूसरी ओर टिड्डियों के साहस की चर्चा भी होती रही। कुरौली गांव के जयप्रकाश में कहा कि टिड्डियों ने एक बड़ी नसीहत दी कि किसी भी आंदोलन को सफल बनाने के लिए संख्या बल जरूरी है। ताकि अपना जायज हक हासिल कर सकें। दूसरी ओर, पशुपालकों की समस्याओं की आवाज उठा रहे तरया गांव निवासी भारतीय पशुपालक संघ अध्यक्ष विजय बहादुर यादव बोले, टिड्डियों ने जोश भर दिया।


उन्होंने कहा कि संगठन में ही शक्ति है। इसके लिए टिड्डियों को ‘थैंक्स’। अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़कर समस्याओं के बारे में हम अपनी आवाज बुलंद करेंगे। आयर गांव के युवा सौरभ मिश्र ने टिड्डियों ने कहा कि टिड्डियों ने संगठित रहने की कला बताई। सैकड़ों-हजारों मील का सफर कर टिड्डियों का पहुंचना यह संदेश देता है कि अगर इच्छा और साहस है तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। राजनीति के गलियारों से जुड़े कुछ लोगों ने भी टिड्डियों टिड्डियों के हमलों को अलग तरह से देखा। क्षेत्र पंचायत सदस्य बेचू गौड़ ने कहा कि अपने लोगों की संख्या इतनी बढ़ा दो कि विपक्षी नाक रगड़ता रह जाय। किसी को परास्त करना है तो संख्या बल और एकजुटता बेहद आवश्यक है।


 


धान की नर्सरी और सब्जी की फसलों को पहुंचा नुकसान


- टिड्डी दल से पिंडरा ब्लाक के राजपुर और नयेपुर गांव के किसान हुए प्रभावित


- लाखों की संख्या में जिस डाल, टहनी और पौधे पर बैठे, उसका रंग दिखा पीला


- सुबह विभिन्न गांवों से होकर जौनपुर के केराकत तहसील की ओर उड़ गए कीट



जनसंदेश न्यूज


पिंडरा। स्थानीय विकास खंड के राजपुर और निकट के नयेपुर गांवों में गुरुवार देर रात से भोर में करीब 3.30 बजे तक टिड्डियों को मारने के चले अभियान के बावजूद क्षेत्र के कई पेड़ प्रभावित हो गये। लाखों की संख्या में इन टिड्डियों ने आम, नीम, पीपल, सागौन और शीशम की डालियों पर डेरा जमा लिया था। फलस्वरूप उन वृक्षों को नुकसान पहुंचा।


दोनों गांवों में शाम चार बजे के बाद जब टिड्डियों के झुंड पेड़ों की डालियों और पौधों पर रुके तो ऐसा लग रहा था मानो उन वृक्षों में फूल आ गये हों। पूरे इलाके के पेड़ और पौधों की ऊपरी शाखा के रंग पीले हो चुके थे। एक तरफ कोरोना महामारी से किसानों को जूझना पड़ा है वहीं, दूसरी ओर लाखों की संख्या में पहुंचे टिड्डी दल को लेकर किसानों चिंतित दिखे। उन्हें अपनी फसलों को बचाने की फिक्र खाए जा रही थी। रात्रि में टिड्डियों को मारने का अभियान चला। शुक्रवार की सुबह भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर वस्तुस्थिति देखने पहुंचे।


मौके पर भारी संख्या में मरे हुई टिड्डियां जमीन पर पड़ी थीं। उसे देखने के लिए भीड़ जुटी। टिड्डियों के चलते कुछ वृक्षों के डाले तक टूटे पाए गये। कई किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों में दवा का छिड़काव करने में जुट गये। टिड्डी दल के आक्रमण के कारण राजपुर गांव में सबसे अधिक नुकसान सब्जी के खेती करने वालों को हुआ है। किसान जयप्रकाश पटेल और अजित पटेल ने बताया कि टिड्डियों का दल बैंगन के खेतों में उतरा और पत्तियों को खाने लगे। चूंकि पहले से तैयारी थी, इसलिए ज्यादा क्षति नहीं हुई। टिड्डी दल कई खेतों में धान की नर्सरी भी खा गए।


शुक्रवार को प्रात : लगभग 9.30 बजे टिड्डियों का दल राजपुर और नयेपुर से उड़कर उत्तर दिशा के गांव सहमलपुर पहुंचा। उसके बाद हीरामनपुर, चारों, शाहपुर तथा गरखड़ा होते हुए हुए टिड्डी दल जौनपुर जनपद के केराकत तहसील की ओर बढ़ गया। एसडीएम मनिकंडन ए. ने बताया कि अब पूरे इलाके से टिड्डियों का बाहर जा चुका है। किसान सामान्य ढंग से खेती कर सकते हैं।



मुकाबले को तैयार थी टीम


दानगंज। चोलापुर ब्लाक क्षेत्र में टिड्डियों के हमले से निबटने के लिए शुक्रवार को ही तैयारियां की जा चुकी थीं। विकास खंड मुख्यालय से संबंधित कर्मचारियों और सफाईकर्मियों को जिम्मेदारी दी थी। साथ ही टीमों को गठन किया गया था। बीते गुरुवार टिड्डी दलों के ठहराव का इंतजार करते हुए स्टाफ देर रात तक ब्लाक में जमे रहे। लेकिन इन कीटों का समूह जगदीशपुर, सहडीह गांवों से होकर पश्चिमी क्षेत्र की ओर चले जाने की सूचना पर कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। साथ ही किसानों की चिंता भी दूर हुई।



ब्लाकों पर हों सभी इंतजाम : सीडीओ


वाराणसी। टिड्डी दलों को मारने के लिए जनपद के प्रत्येक ब्लाक मुख्यालय पर एक वॉर रूम स्थापित करने के निर्देश हैं। हर विकास खंड कार्यालय में सौ स्प्रे मशीन तैयार रखेंगे। यदि किसानों के साथ भी स्प्रे मशीन उपलब्ध है तो उन कृषकों का ब्योरा तैयार करना होगा। सौ की ही संख्या में सफाईकर्मियों के नाम, फोन नंबर और तैनाती स्थल की सूची तैयार रहेगी। कीटनाशक दवाओं का स्टॉक कृषि विभाग से तालमेल कर एकत्र किया जाएगा। इसके अलावा टिड्डियों का मूवमेंट किन गांवों से होकर किधर है, इसकी जानकारी एक रजिस्टर पर दर्ज करना आवश्य है। इन कार्यों में यदि जरूरत पड़ी तो किराए पर वाहन भी लेंगे। सीडीओ मधुसूदन हुल्गी ने यह निर्देश सभी खंड विकास अधिकारिओं और पंचायत राज विभाग के सहायक विकास अधिकारियों को दिये हैं।


 


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