जिलाधिकारी के फैसले से निकाय अध्यक्षों में नाराजगी, खुलकर जता रहे हैं विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला?



जनसंदेश न्यूज़
बलिया। 14 वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग तथा अवस्थापना विकास निधि से कराये जाने वाले कार्यों को लेकर जिलाधिकारी द्वारा एक समिति का गठन कर इसकी स्वीकृति के उपरांत ही विकास कार्य कराये जाने के फैसले को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नगर निकायों के अध्यक्ष इसके विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं। नगर निकाय अध्यक्ष इस आदेश को नगर निकाय की स्वायत्तता के प्रतिकूल ठहरा रहे हैं तथा उन्होंने इस मसले को लेकर मुख्यमंत्री व नगर विकास मंत्री को पत्र भी लिखा है। जिला प्रशासन के एक फैसले को लेकर जिले के सभी नगर निकायों के अध्यक्ष बहुत मुखर हैं। 
दरअसल जिलाधिकारी हरि प्रताप शाही ने गत 6 जून को एक आदेश जारी कर एक समिति का गठन किया है। पिछले साल 27 जून के शासनादेश का हवाला देकर किये गए इस आदेश में 14 वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग तथा अवस्थापना विकास निधि से स्थानीय निकायों में कराये जाने वाले कार्यों को लेकर दिशा निर्देश देने के साथ ही एक समिति का गठन किया गया है। 
समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष व अपर जिलाधिकारी ( वित्त/राजस्व) सचिव होंगे। इस समिति में नगर निकाय के प्रभारी अधिकारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी, सम्बंधित उप जिलाधिकारी तथा लोक निर्माण विभाग व जल निगम के अधिशासी अभियंता को सदस्य बनाया गया है। इस आदेश में स्पष्ट अवधारित किया गया है कि यह समिति उपरोक्त निधियों के सम्बंध में नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत से प्रस्ताव प्राप्त कर इसे स्वीकृत/अनुमोदित करेगी। 
इस आदेश की जानकारी होते ही जिले के नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत के अध्यक्ष खुलकर इसके विरोध में आ गए हैं। नगर निकाय के अध्यक्षों ने पिछले दिनों जिला मुख्यालय पर बैठक कर इस आदेश के विरोध में रणनीति पर चर्चा किया। इसके बाद नगर निकाय अध्यक्षों की तरफ से रसड़ा नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मोती रानी सोनी ने मुख्यमंत्री व नगर विकास मंत्री को अलग-अलग पत्र भेजा है तथा जिलाधिकारी के आदेश को नगर पालिका अधिनियम के प्रतिकूल ठहराया है। 
पत्र में कहा गया है कि इस आदेश से नगर निकाय बोर्ड का महत्व ही समाप्त हो जायेगा। उन्होंने शासन द्वारा वर्ष 1997, 2001 व 2003 में निर्गत आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि शासन ने समय-समय पर आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकायों के दैनिक क्रियाकलापों में हस्तक्षेप किया जाना उचित नही है। नगर निकाय के अध्यक्षों ने इसे निकायों के स्वायत्तता का हनन करार देते हुए कहा है कि इस आदेश के कारण अध्यक्ष छोटा से छोटा कार्य भी नही करा पायेंगे। 
बिल्थरारोड नगर पंचायत के अध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्त, जो भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष भी हैं, ने दावा किया है कि 27 जून 2019 के शासनादेश का हवाला देकर किया गया। यह आदेश योगी सरकार की लोकप्रियता को क्षति पहुंचाने वाला है। वह इसको लेकर जिला प्रशासन की मंशा पर सवालिया निशान लगाते हुए कहते हैं कि पूरे प्रदेश में यह शासनादेश क्रियान्वित नही हुआ है। केवल बलिया जिले में ही यह आदेश किया गया है। वह कहते हैं कि एक वर्ष पहले निर्गत यह आदेश अब क्यों क्रियान्वित किया जा रहा है। 
स्थानीय निकाय अध्यक्षों के असंतोष को देखकर भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बलिया के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त व सलेमपुर के भाजपा सांसद रवींद्र कुशवाहा ने कल जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में नगर निकाय के अध्यक्षों के साथ बैठक किया। 
भाजपा सांसद रवींद्र कुशवाहा ने न्यूजट्रैक से आज बातचीत में कहा कि वह निकाय अध्यक्षों की भावना से सहमत हैं तथा उनका स्पष्ट मत है कि नगर निकाय स्वायत्तशासी संस्था है। इनके कार्याे में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जाना उचित नही है। उन्होंने कहा कि वह इस मसले पर नगर निकाय अध्यक्षों द्वारा दिये गये प्रत्यावेदन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संदर्भित करेंगे। नगर पंचायत अध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्त कहते हैं कि उन्हें भाजपा सरकार से न्याय की पूरी उम्मीद है, न्याय न मिलने की स्थिति में न्यायपालिका का सहारा लिया जायेगा।


 


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