अल्लाहतआला अपनी रहमत से गुनाहगारों को अपनी अजाब से निजात देते हैं



जनसंदेश न्यूज़
शहाबगंज/चंदौली। बड़गावां जामा मस्जिद के एमाम मौलाना अजमल हयात साहब ने कहा कि मुकद्दस माह-ए-रमजान का पहला अशरा रहमतों वाला खत्म हो गया।मौलाना अजमल हयात ने बताया कि रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत का है। इसमें अल्लाह के बंदों के रोजे, इफ्तार, सेहरी नमाज ए तरावीह और दूसरे नेक कामों को कबूल करता है। इन नेक कामों की वजह से गुनाहगारों की बख्शता है। 
कहा कि लॉक डाउन के चलते लोग अपने-अपने घरों में रहकर खूब अल्लाह की इबादत करने में मागून हैं। उनके द्वारा कुरान की खूब तिलावत भी की जा रही है। अल्लाह ने इस मुबारक महीने को तीन आसरों में तक्सीम किया है। पहला अशरा खुदा की रहमत वाला है। एक से दस रमजान यानी पहले अशरों में खुदा की रहमत नाजिल होती है ।रमजान का चांद नजर आते ही शैतान कैद कर लिये जाते हैं। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोज़ख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। अल्लाहतआला अपनी रहमत से गुनाहगारों को अपनी अजाब से निजात देते हैं। 
वहीं नेक काम के सबाब में 70 गुना इजाफा कर दिया जाता है। रसूल सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम ने फरमाया कि अगर लोगों को मालूम हो जाय कि रमजान क्या चीज है तो मेरी उम्मत साल के इबाने रमजान होने की तमन्ना करेगी। रमजान का महीना रहमत व बरकत वाला महीना है। पहला आशरा खत्म और दूसरा आशरा शुरू हो गया है। सभी रोजेदारों को नमाज व कुरान की तिलावत ज्यादा से ज्यादा करनी चाहिए। 


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