शराब तस्करी के आरोपित भाजपा नेता को जमीन निगल गई या आसमान?


आखिर पुलिस की गिरफ्त से कैसे छूटा शातिर तस्कर?


तीन दिन तक दबिश देने के बावजूद नहीं हो सकी गिरफ्तारी, अभियुक्त को जल्द पकड़ लेने का दावा


अपने रसूख का फायदा उठाकर ढाब इलाके में अवैध खनन भी कराता था शातिर संजय गुप्ता

जनसंदेश न्यूज
वाराणसी। शराब तस्कर संजय गुप्ता अब पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनता जा रहा है। पुलिस को समझ में नहीं आ रहा है कि उसे आसमान निगल गया या जमीन? या फिर किसी नेता के घर महफूज जगह बैठा है? इस बीच शराब तस्कर संजय गुप्ता के कई दूसरे काले कारनामे भी उजागर हुए हैं। भाजयुमो के जिलाध्यक्ष पद पर कब्जा करने वाला ये शख्स सरकार को भी चोट देता रहा है।
भाजयुमो के अध्यक्ष रहे संजय गुप्ता के भाई संतोष गुप्ता व दो अन्य को पुलिस ने 12 पेटी देसी शराब के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसी दिन रात में संजय गुप्ता को भी थाने बुलाकर बैठा लिया। उसे जेल भेजने की तैयारी हो रही थी, तभी एक कबीना मंत्री का फोन घनघनाने लगा। लाचारी में पुलिस को उसे छोड़ना पड़ गया। हालांकि सुबूत के तौर पर शराब तस्करी में इस्तेमाल की जाने वाली बिना नंबर की स्कार्पियो को जब्त कर लिया है। शराब तस्करी के मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस संजय गुप्ता की तलाश में जुट गई है। पिछले तीन दिनों से दबिश का दौर जारी है, लेकिन वो हाथ ही नहीं आ रहा है।  
इस बीच संजय गुप्ता के काले कारनामों का चिट्ठा परत-दर-परत उजागर हो रहा है। शराब तस्करी ही नहीं बल्कि ढाब क्षेत्र में अवैध खनन में भी इसका गोल गिरोह काम करता था। भाजपा के इसी नेता ने समूचे ढाब इलाके का अस्तित्व खतरे में डाल दिया है। अवैध खनन के लपेटे में अब भाजपा के जिला महामंत्री उमेश दत्त पाठक का भी नाम सामने आने लगा है। हालांकि श्री पाठक अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हैं और बेबुनियाद व मनगढ़ंत बताते हैं। वो ये भी कहते हैं कि संजय गुप्ता के मामले में किसी मंत्री का नाम उछालना ठीक नहीं है। हैरत की बात यह है कि इस मामले में कोई भी बयान देने से पुलिस के अधिकारी बच रहे हैं। सीओ अनिल राय दावा करते हैं कि उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।  


रोजगार सेवक बन संजय हड़प रहा था सरकारी धन


बकाया भुगतान के लिए अभी तक दौड़ रही है फाइलें


वाराणसी। भाजयुमो के निवर्तमान जिलाध्यक्ष संजय गुप्ता का एक और बड़ा खेल उजागर हुआ है। कहने को ये अमीर है, लेकिन सरकारी धन हड़पने के लिए रोजगार सेवक भी बन बैठा था। यह पद उसने दबंगई और रसूख से हथियाया था। संजय का नाम छांही गांव में बतौर रोजगार सेवक के दर्ज रहा है। वो काफी दिनों तक मानदेय लेता रहा है। इस बीच वो जिला पंचायत का चुनाव भी लड़ा, जिसमें उसकी करारी हार हुई। छांही गांव के प्रधानपति  सियाराम यादव बताते हैं कि  चुनाव लड़ने के समय उसने रोजगार सेवक पद से इस्तीफा दे दिया था।
विकास खंड कार्यालय से वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में मानदेय भुगतान के लिए  जिले पर 44 ग्राम रोजगार सेवकों की सूची भेजी गई। उस सूची में शराब तस्कर संजय गुप्ता का भी नाम शामिल है। तीनों वित्तीय वर्ष में उसे मानदेय 24 हजार का भुगतान भी किया गया। इतना ही नहीं उसका बकाया मानदेय एक लाख चौहत्तर हजार रुपये लिए भी। सूत्र बताते हैं कि पार्टी पदाधिकारियों और कतिपय प्रभावों की आड़ में उसने खूब उगाही की। इधर बीच वो लीकर किंग बनने का सपना देखने लगा था। लाकडाउन में उसने जमकर शराब की तस्करी की और अपने रैकेट के जरिये मनमाने दाम पर बिकवाया।


Popular posts from this blog

'चिंटू जिया' पर लहालोट हुए पूर्वांचल के किसान

चकिया प्रीमियर लीग के फाइनल में केजीएन क्लब ने धनावल को दी शिकस्त, यह रहे मैच के हीरो

काशी विद्यापीठ में शोध के लिए निकलेगा आवेदन, अब साल में दो बार होगी पीएचडी की प्रवेश परीक्षा