क्या आहार द्वारा स्वास्थ्यधन की प्राप्ति हो सकती है, अगर हां तो कैसे?


जनसंदेश न्यूज़
आज मेरे इस लेख में हम वैश्विक महामारी कोरोना के सन्दर्भ में ये समझने का प्रयास करेंगे कि क्या आहार द्वारा स्वास्थ्यधन की प्राप्ति हो सकती है? और अगर इसका जवाब हां है तो फिर अगला प्रश्न है कि कैसे? 
बहोत थोड़े शब्द में समझना है तो इस प्रश्न का उत्तर हां है, क्योंकि हम बिलकुल वासी ही बनते जो हम खाते है। 
दीपो भक्षयते ध्वान्तं कज्जलं च प्रसूयते।
यदन्नं भक्षयेन्नित्यं जायते तादृशी प्रजा।।
ये श्लोक वृद्ध-चाणक्य से लिया गया है, हम जो भोजन खाते हैं, वह हमारे बीजों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है, दोनों पुरुषों और महिलाओं को। आधुनिक चिकित्सा नैदानिक अध्ययन कर रही है।
विपणन, प्रचार, विशाल निगमों और बाजार क्षेत्रों के अर्थशास्त्र सरल सत्य को जनता तक पहुंचने की अनुमति नहीं दे सकते हैं, लेकिन कभी-कभी वे मुश्किल काम करते हैं। यह केवल जीव विज्ञान है, और कुछ नहीं। इसी तरह, भोजन का सेवन हमारे शरीर को सीधे प्रभावित करता है। आखिरकार, व्यायाम शरीर नहीं बनाता है, भोजन शरीर बनाता है। व्यायाम शरीर को आकार देता है, न कि बनाता है। जबकि यह तथ्य कि भोजन हमारे स्वयं के शरीर को सीधे प्रभावित करता है, अच्छी तरह से समझा जाता है, यह तथ्य कि हमारा भोजन और अन्य सेवन हमारी अगली पीढ़ी को सीधे प्रभावित कर सकता है, अब पर्याप्त सबूत हैं कि वे संबंधित हैं, और तामसिक (तामसिक, अशुद्ध, अनहेल्दी और नकारात्मक) भोजन, तंबाकू, शराब का सेवन प्रजनन कोशिकाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
इससे हमें ये समझना चाहिए कि हम वो ही बनेंगे जो आहार हम ग्रहण करते है, अन्यथा नहीं, इसीलिए हमें केवल ऐसा ही आहार ग्रहण करना चाहिए जो हमे ऐसी वैश्विक महामारी ओ से लड़ने के लिए सक्षम बनाएं। 
अब बात तो यह भी चली आती है की क्या खाएं और ना खाएं, कैसे खाए, कब खाएं, किस ऋतू में क्या खाना है और क्या नहीं खाना है, यह सब हमें जानना होगा। 



शरीरेन्द्रिय सत्वात्मा संयोगो। 


चरक संहिता के अनुसार हमारा अस्तित्व - शरीर, इंद्रिया अंग, सत्व (मन) और आत्म (आत्मा) तत्व का मिलन है।
इसीलिए हमारे बड़े हमें सदा आशीर्वाद देते है दीर्घायुषी भव।’ 
इसका मतलब है कि आप लंबे समय तक उपरोक्त सभी तत्वों के साथ लम्बा आयुष्य जिओ।
चरक संहिता आगे कहता है - स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं। अपने शास्त्रों के अनुसार - शास्त्र का उद्देश्य एक स्वस्थ व्यक्ति को स्वस्थ रखना और किसी व्यक्ति में प्रकट होने वाली बीमारियों (मन, शरीर या दोनों) का प्रबंधन या इलाज करना है।

हमे क्या नहीं करना है सिर्फ इतना समझ लेने से हमारी यात्रा सुगम हो जायेगी, तो पहले मैं आपको ये बता देना चाहता हूं कि कोई भी ऐसा आहार जो दूर-दूर से भी आपके गले को ख़राब कर सकंे या उसे हानि पहुंचा सके, या फॉर ऐसा कोई आहार जो आपकी श्वसन यंत्रणा में बाधा उत्पन्न करें, ऐसा आहार आपको नही लेना है। जैसे कि कोई भी शीत वस्तुए, फ्रिज में रखा हुआ बासी आहार, किसिबिः प्रकार के शीत पेय, मिल्क शेक या जूस आदि जिस में बर्फ हो या जिसका तापमान आपके शरीर के तापमान से कम हो, वैसा कुछ भी गलती से भी ग्रहण नहीं करना है।
कोई भी ऐसा आहार जिसकी वजह से आपकी अन्न नलिका या श्वसन नलिका में बाधा उत्पन्न हो, हमें नही लेना है, ये वो समय है जिसमें फेफड़े से जुड़े रोगियों को अपना खास ख्याल रखना पड़ेगा। ये वो समय है जहां हमें अपनी रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाना है, नाकि कुछ गलत खाकर उसकी हानि करनी है। तो फिर अगला प्रश्न ये आता है की कौन सा ऐसा खाना है जिस से हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढे? ये महामारी की ऋतू में हमंे हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने में विटामिन सी, सबसे ज्यादा हमें ऐसे फल और सब्जी चुनने है, जिसमे विटामिन सी भरी मात्रा में पाया जाता हो। 
आइये जानते है कुछ ऐसे फलों के बारे में जो हमारे शरीर में विटामिन सी की आपूर्ति को बढ़ता है। खट्टे फल जैसे संतरा, पपीता, नींबू, अमरूद, अंगूर, और सब्जियाँ जैसे ब्रोकोली, फुलगोभी, ब्रसेल्स स्प्राउट्स और शिमला मिर्च, विटामिन सी के प्राकृतिक स्रोत हैं। अन्य विटामिन सी से भरपूर विटामिनों में शामिल हैं पपीता, कैंटालूप और स्ट्रॉबेरी। अगर सुविधा हो और उपलब्धि हो तो पालक, गोभी, शलजम साग, और अन्य पत्तेदार साग भी बहोत सहायक होंगे। 
एक बात का हमंे अवश्य ख्याल रखना है की बहार से कई हुई सब्जियों को अवश्य पहले अच्छे से धो ले, उसके गुनगुने पानी में कम से कम 20 से 25 मिनट तक भिगाकर रखे, जिसके पश्चात आप उसका उपयोग कर सकते है। 
जहां तक हो सके फैक्ट्री में बने हुए रेडीमेड और मसालेदार खाना या नाश्ता खाने का समय अब नही है। इसीलिए हमे बहार के बटाटा वेफर, सेव, भुजिया, फरसान, या फिर किसी भी प्रकार के तले हुए नाश्ते हमे जहा तक हो सके ग्रहण नहीं करने है। 
दूसरी पर अत्यंत महत्वपूर्ण बात ये है कि हमें कितना खाना चाहिए ? अभी सिर्फ इतना समझे कि हमें एकसाथ पेटभर नहीं खाना है, चाहे तो दिन में तीन बार की जगह चार बार खाए, पर एक बार में ही भरपेट बिलकुल ना खाए। 


Dr Sitesh Roy



 


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