लखनऊ हिंसा के आरोपियों को पोस्टर लगाये जाने पर हाईकोर्ट ने माना ‘Right To Privacy’ का उलंघन, स्वतः लिया संज्ञान
जनसंदेश न्यूज़
प्रयागराज। लखनऊ हिंसा के आरोपियों के पोस्टर लगाए जाने के मामले में 10 बजे हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच में सुनवाई हुई। एडवोकेट जनरल राघवेंद्र प्रताप सिंह के प्रयागराज पहुंचने में विलंब के चलते मामले की सुनवाई के लिए 3.00 बजे तक का समय मांगा। अब 3 बजे मामले की सुनवाई होगी।
कोर्ट ने पोस्टर मामले पर नाराजगी जताई कोर्ट ने कहा सड़कों पर नागरिक का पोस्टर लगाना नागरिक के सम्मान, निजता, स्वतंत्रता के खिलाफ गई। सरकार एडवोकेट जनरल के कोर्ट पहुंचने के पहले गलती सुधारने के लिए कार्यवाही करें। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा है कि पोस्टरों में इस बात का कहीं जिक्र नहीं है कि किस कानून के तहत यह पोस्टर लगाए गए हैं। हाईकोर्ट का मानना है कि सार्वजनिक स्थान पर संबंधित व्यक्ति की अनुमति के बिना उसका फोटो या पोस्टर लगाना गलत है। यह राइट टू प्राइवेसी (निजता के अधिकार) का उल्लंघन है।
आंचल में ममता लिए हुए,
नैनों में आंसू पिए हुए,
सौप दे जो अपना पूरा जीवन,
फिर क्यो आहत हो उसका मन।
महिला दिवस की हार्दिक शुभकामना.....